नोएडा के सेक्टर-104 स्थित हाजीपुर में नोएडा प्राधिकरण ने 7,950 वर्गमीटर अधिग्रहित जमीन पर बने अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। अदालत द्वारा प्राधिकरण के खिलाफ जारी एक पक्षीय स्थगनादेश खारिज होने के बाद यह कार्रवाई की गई। मामले में पहले प्राधिकरण की टीम के साथ कथित अभद्रता और एफआईआर का मामला भी सामने आया था।
करीब तीन साल से अदालत की कानूनी अड़चनों में फंसा नोएडा के सेक्टर-104 स्थित हाजीपुर की जमीन का मामला आखिरकार शुक्रवार को एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। अदालत से प्राधिकरण के खिलाफ जारी एक पक्षीय स्थगनादेश खारिज होने के बाद नोएडा प्राधिकरण की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खसरा नंबर-412 में करीब 7,950 वर्गमीटर अधिग्रहित जमीन पर बने अवैध निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया।
प्राधिकरण के अनुसार, जिस जमीन पर कार्रवाई की गई, उसे वर्ष 2002 में नियमानुसार अधिग्रहित किया गया था। इसके बावजूद वर्ष 2023 में यहां कथित तौर पर पांच मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण शुरू कर दिया गया। लंबे समय तक मामला अदालत में रहने के कारण प्राधिकरण की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब स्थगनादेश खारिज होने के बाद प्राधिकरण ने मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
कार्रवाई से पहले ही क्यों गरमा गया था यह मामला?
हाजीपुर की यह जमीन केवल अवैध निर्माण के आरोपों के कारण चर्चा में नहीं आई थी। इससे पहले भी यहां कार्रवाई करने पहुंची नोएडा प्राधिकरण की टीम को कथित तौर पर गंभीर विरोध का सामना करना पड़ा था।

प्राधिकरण के मुताबिक, वर्क सर्किल-8 की टीम जब निर्माण पर रोक लगाने के लिए मौके पर पहुंची थी, तब कुछ लोगों ने टीम को घेर लिया था। आरोप है कि वर्क सर्किल-8 के प्रबंधक दीपक कुमार को इमारत के अंदर घसीटकर ले जाया गया और उन पर डीजल डालकर आग लगाने का प्रयास किया गया। इस घटना के बाद प्राधिकरण की ओर से संबंधित भू-माफिया के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।
यही वजह है कि शुक्रवार की कार्रवाई को सामान्य अतिक्रमण विरोधी अभियान के बजाय प्राधिकरण के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
अदालत के आदेश के बाद खुला कार्रवाई का रास्ता
मामले में कानूनी पेच भी कम नहीं था। जानकारी के मुताबिक 12 अप्रैल 2023 को अदालत से प्राधिकरण के खिलाफ एक पक्षीय स्थगनादेश प्राप्त हुआ था। इसके चलते प्राधिकरण की ओर से जमीन और निर्माण के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई पर रोक लग गई थी।
करीब तीन वर्षों तक मामला अदालत में चलता रहा। हाल ही में गौतमबुद्धनगर की अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने प्राधिकरण के खिलाफ जारी एक पक्षीय स्थगनादेश को खारिज कर दिया।
प्राधिकरण के अनुसार, अदालत ने संबंधित पक्षों की ओर से किए गए दावों को स्वीकार नहीं किया और स्थगनादेश समाप्त होने के बाद जमीन पर कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद अधिकारियों ने नियमानुसार ध्वस्तीकरण की तैयारी की और शुक्रवार को टीम मौके पर पहुंच गई।

ध्वस्तीकरण अभियान भूलेख विभाग की ओएसडी हर्षिता तिवारी, ओएसडी इंदु प्रकाश सिंह, महाप्रबंधक सिविल अशोक कुमार अरोड़ा और वर्क सर्किल-8 के वरिष्ठ प्रबंधक रोहित कुमार के नेतृत्व में चलाया गया।
कार्रवाई के दौरान कुछ लोग ध्वस्तीकरण का विरोध करने के लिए मौके पर पहुंचे। हालांकि, वहां मौजूद प्राधिकरण और पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभाला। अधिकारियों की समझाइश के बाद विरोध कर रहे लोगों को शांत कर वापस भेज दिया गया और कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
7,950 वर्गमीटर जमीन पर था निर्माण
नोएडा प्राधिकरण के अनुसार, कार्रवाई वाली जमीन का क्षेत्रफल करीब 7,950 वर्गमीटर है। यह भूमि पहले ही वर्ष 2002 में अधिग्रहित की जा चुकी थी।
प्राधिकरण का आरोप है कि अधिग्रहित भूमि पर वर्ष 2023 में निश्याम बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड और हिमश्री हिमालय बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कमर्शियल निर्माण शुरू किया गया था। निर्माण को प्राधिकरण ने अनधिकृत माना और इसके खिलाफ कार्रवाई की कोशिश की।
लेकिन अदालत से मिले स्थगनादेश के कारण मामला लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सका। अब अदालत द्वारा स्थगनादेश खारिज किए जाने के बाद प्राधिकरण ने मौके पर कार्रवाई करते हुए निर्माण को ध्वस्त कर दिया।

नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी इंदु प्रकाश सिंह के मुताबिक, प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने अवैध कब्जों से प्राधिकरण की जमीन को मुक्त कराने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
हाजीपुर का यह मामला इसी अभियान के तहत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर इसलिए क्योंकि जमीन पहले से अधिग्रहित थी और इसके बावजूद उस पर निर्माण शुरू होने का मामला सामने आया।
अब आगे क्या?
शुक्रवार की कार्रवाई के बाद सेक्टर-104 के इस मामले में एक बड़ा कानूनी अध्याय फिलहाल समाप्त होता दिखाई दे रहा है। हालांकि, आगे की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। प्राधिकरण को जमीन पर अपना नियंत्रण पूरी तरह स्थापित करने के साथ संबंधित रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाना होगा।
करीब तीन साल तक अदालत में अटका रहा यह मामला अब स्थगनादेश खारिज होने के बाद कार्रवाई के चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में अब नजर इस बात पर होगी कि प्राधिकरण हाजीपुर की इस जमीन को पूरी तरह कब्जामुक्त कराने और भविष्य में दोबारा किसी तरह का अनधिकृत निर्माण न होने देने के लिए क्या कदम उठाता है।
नोएडा में अधिग्रहित जमीन पर कथित अवैध कब्जों और निर्माण के खिलाफ प्राधिकरण की कार्रवाई के बीच सेक्टर-104 की यह कार्रवाई एक अहम संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है—कानूनी अड़चन खत्म होते ही वर्षों से रुकी कार्रवाई को जमीन पर उतारा जा सकता है।
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