नोएडा प्राधिकरण ने बढ़ती आबादी के बीच सीवेज व्यवस्था मजबूत करने के लिए सेक्टर-56 में 5 MLD क्षमता वाले नवनिर्मित सम्पवैल का लोकार्पण किया। वहीं सेक्टर-51 में 8 MLD क्षमता वाले सम्पवैल का शिलान्यास हुआ। दोनों परियोजनाओं पर कुल करीब ₹6.26 करोड़ खर्च होंगे।
नोएडा में तेजी से बढ़ती आबादी और उसके साथ बढ़ते सीवेज दबाव को देखते हुए प्राधिकरण ने सीवेज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को सेक्टर-56 में लंबे समय से जुड़ी सीवेज जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नवनिर्मित 5 MLD क्षमता वाले सम्पवैल का लोकार्पण किया गया। इसी के साथ सेक्टर-51 में सीवेज समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में 8 MLD क्षमता वाले नए सम्पवैल का शिलान्यास भी किया गया।
इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य मौजूदा सीवेज व्यवस्था को बेहतर करने के साथ-साथ भविष्य में आबादी बढ़ने के बाद पैदा होने वाले अतिरिक्त दबाव से निपटना है। खास बात यह है कि सेक्टर-51 की प्रस्तावित योजना में आसपास के कई क्षेत्रों और दो ड्रेनों को भी जोड़कर सीवेज को एसटीपी के माध्यम से शोधित करने की योजना बनाई गई है।

नोएडा क्षेत्र में बढ़ते आबादी घनत्व को देखते हुए सेक्टर-56 के D, F, G ब्लॉक और जनता फ्लैट की सीवेज समस्या के निस्तारण के लिए नवनिर्मित सम्पवैल का लोकार्पण किया गया।
यह लोकार्पण गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा और नोएडा के विधायक पंकज सिंह की उपस्थिति में किया गया। इस दौरान नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (पीआरएस) और महाप्रबंधक (जल) समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
प्राधिकरण के मुताबिक, नवनिर्मित सम्पवैल की क्षमता 5 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है। इसके निर्माण पर करीब 142.61 लाख रुपये, यानी लगभग 1.43 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
सीवेज कहां जाएगा? पूरी व्यवस्था ऐसे होगी
सेक्टर-56 में स्थापित इस नए सम्पवैल के जरिए सेक्टर-56 से निकलने वाले सीवेज को सीवेज पम्पिंग स्टेशन-55 के माध्यम से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सेक्टर-54 तक पहुंचाया जाएगा।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीवेज को सीधे खुले नालों या ड्रेनों में जाने देने के बजाय निर्धारित प्रणाली के तहत एसटीपी तक पहुंचाकर उसका उपचार किया जाएगा।
प्राधिकरण का कहना है कि इस परियोजना से सेक्टर-56 की मौजूदा सीवेज समस्या के समाधान में मदद मिलेगी और भविष्य में जब यहां आबादी बढ़ेगी, तब भी अतिरिक्त सीवेज दबाव के कारण समस्या पैदा न हो, इसके लिए क्षमता उपलब्ध रहेगी।

सेक्टर-56 में सम्पवैल का लोकार्पण करने के साथ ही शुक्रवार को सेक्टर-51 में प्रस्तावित 8 MLD क्षमता वाले सम्पवैल का शिलान्यास भी किया गया।
इस परियोजना की अनुमानित निर्माण लागत 483.34 लाख रुपये, यानी करीब 4.83 करोड़ रुपये है। प्राधिकरण की योजना के अनुसार इसका निर्माण पूरा होने के बाद सेक्टर-51 क्षेत्र की सीवेज व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित तरीके से एसटीपी से जोड़ा जा सकेगा।
किन इलाकों को मिलेगा फायदा?
सेक्टर-51 के प्रस्तावित सम्पवैल से केवल सेक्टर-51 को ही नहीं, बल्कि आसपास के कई क्षेत्रों की सीवेज व्यवस्था को जोड़ने की योजना है।
प्राधिकरण के अनुसार, भविष्य में सेक्टर-51 पार्ट-बी, केंद्रीय विहार और होशियारपुर को इस सम्पवैल के माध्यम से जोड़ा जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा D-11 और D-10 नामक दो ड्रेनों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना है।
इन क्षेत्रों से आने वाले सीवेज को प्रस्तावित सम्पवैल के जरिए STP-50 तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसका शोधित तरीके से निस्तारण किया जाएगा।
NGT के निर्देशों से भी जुड़ी है योजना
सेक्टर-51 की परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्राधिकरण के अनुसार आसपास के क्षेत्रों और दोनों ड्रेनों को एसटीपी व्यवस्था से जोड़ने की योजना राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों के क्रम में तैयार की गई है।
इसका उद्देश्य सीवेज को अनियंत्रित तरीके से ड्रेनों में जाने से रोकना और उसे उपचारित कर निर्धारित व्यवस्था के तहत निस्तारित करना है।

नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सीवेज प्रबंधन की चुनौती लगातार बढ़ रही है। नई आवासीय सोसाइटियों, पुराने सेक्टरों और बढ़ती आबादी के कारण सीवेज नेटवर्क पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में सम्पवैल और पम्पिंग सिस्टम की क्षमता बढ़ाना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अहम माना जा रहा है।
सेक्टर-56 में तैयार किए गए सम्पवैल को केवल वर्तमान समस्या के समाधान तक सीमित नहीं रखा गया है। प्राधिकरण का दावा है कि इसकी 5 MLD क्षमता भविष्य में सेक्टर-56 की आबादी बढ़ने के बाद पैदा होने वाले अतिरिक्त सीवेज भार को संभालने में मदद करेगी।
वहीं सेक्टर-51 में प्रस्तावित 8 MLD सम्पवैल के जरिए कई क्षेत्रों को एक नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इससे सीवेज के संग्रह, पम्पिंग और उपचार की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जाएगा।
दोनों परियोजनाओं को देखा जाए तो नोएडा प्राधिकरण का फोकस केवल तत्काल सीवेज समस्या को दूर करने पर नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले दबाव के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने पर भी है।
अब नजर निर्माण की रफ्तार पर
सेक्टर-56 में जहां 5 MLD का सम्पवैल बनकर तैयार हो चुका है और उसका लोकार्पण कर दिया गया, वहीं सेक्टर-51 में 8 MLD परियोजना अभी निर्माण चरण में प्रवेश कर रही है।
अब महत्वपूर्ण यह होगा कि सेक्टर-51 की परियोजना तय समय और मानकों के अनुरूप कितनी तेजी से पूरी होती है और इससे प्रस्तावित क्षेत्रों तथा D-10 और D-11 ड्रेनों को एसटीपी-50 से जोड़ने की योजना जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।
फिलहाल 11 सितंबर को हुए लोकार्पण और शिलान्यास के साथ नोएडा में बढ़ते सीवेज दबाव से निपटने के लिए दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत हो गई है। एक परियोजना ने अपनी सेवाएं शुरू कर दी हैं, जबकि दूसरी आने वाले समय में शहर के बड़े हिस्से की सीवेज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभाने वाली है।
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