Sunday, October 18, 2026

नोएडा में सीवेज संकट से निपटने की बड़ी तैयारी, सेक्टर-56 में 5 MLD सम्पवैल शुरू; सेक्टर-51 में 8 MLD की नींव

बढ़ती आबादी के बीच सीवेज व्यवस्था मजबूत करने की पहल, ₹1.42 करोड़ की लागत से बना सम्पवैल; सेक्टर-51 परियोजना पर खर्च होंगे ₹4.83 करोड़

noida , Latest Updated On - Sep 11 2026 | 14:41:00 PM
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नोएडा प्राधिकरण ने बढ़ती आबादी के बीच सीवेज व्यवस्था मजबूत करने के लिए सेक्टर-56 में 5 MLD क्षमता वाले नवनिर्मित सम्पवैल का लोकार्पण किया। वहीं सेक्टर-51 में 8 MLD क्षमता वाले सम्पवैल का शिलान्यास हुआ। दोनों परियोजनाओं पर कुल करीब ₹6.26 करोड़ खर्च होंगे।

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नोएडा में तेजी से बढ़ती आबादी और उसके साथ बढ़ते सीवेज दबाव को देखते हुए प्राधिकरण ने सीवेज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को सेक्टर-56 में लंबे समय से जुड़ी सीवेज जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नवनिर्मित 5 MLD क्षमता वाले सम्पवैल का लोकार्पण किया गया। इसी के साथ सेक्टर-51 में सीवेज समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में 8 MLD क्षमता वाले नए सम्पवैल का शिलान्यास भी किया गया।

इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य मौजूदा सीवेज व्यवस्था को बेहतर करने के साथ-साथ भविष्य में आबादी बढ़ने के बाद पैदा होने वाले अतिरिक्त दबाव से निपटना है। खास बात यह है कि सेक्टर-51 की प्रस्तावित योजना में आसपास के कई क्षेत्रों और दो ड्रेनों को भी जोड़कर सीवेज को एसटीपी के माध्यम से शोधित करने की योजना बनाई गई है।

नोएडा क्षेत्र में बढ़ते आबादी घनत्व को देखते हुए सेक्टर-56 के D, F, G ब्लॉक और जनता फ्लैट की सीवेज समस्या के निस्तारण के लिए नवनिर्मित सम्पवैल का लोकार्पण किया गया।

यह लोकार्पण गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा और नोएडा के विधायक पंकज सिंह की उपस्थिति में किया गया। इस दौरान नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (पीआरएस) और महाप्रबंधक (जल) समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

प्राधिकरण के मुताबिक, नवनिर्मित सम्पवैल की क्षमता 5 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है। इसके निर्माण पर करीब 142.61 लाख रुपये, यानी लगभग 1.43 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

सीवेज कहां जाएगा? पूरी व्यवस्था ऐसे होगी

सेक्टर-56 में स्थापित इस नए सम्पवैल के जरिए सेक्टर-56 से निकलने वाले सीवेज को सीवेज पम्पिंग स्टेशन-55 के माध्यम से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सेक्टर-54 तक पहुंचाया जाएगा।

यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीवेज को सीधे खुले नालों या ड्रेनों में जाने देने के बजाय निर्धारित प्रणाली के तहत एसटीपी तक पहुंचाकर उसका उपचार किया जाएगा।

प्राधिकरण का कहना है कि इस परियोजना से सेक्टर-56 की मौजूदा सीवेज समस्या के समाधान में मदद मिलेगी और भविष्य में जब यहां आबादी बढ़ेगी, तब भी अतिरिक्त सीवेज दबाव के कारण समस्या पैदा न हो, इसके लिए क्षमता उपलब्ध रहेगी।

सेक्टर-56 में सम्पवैल का लोकार्पण करने के साथ ही शुक्रवार को सेक्टर-51 में प्रस्तावित 8 MLD क्षमता वाले सम्पवैल का शिलान्यास भी किया गया।

इस परियोजना की अनुमानित निर्माण लागत 483.34 लाख रुपये, यानी करीब 4.83 करोड़ रुपये है। प्राधिकरण की योजना के अनुसार इसका निर्माण पूरा होने के बाद सेक्टर-51 क्षेत्र की सीवेज व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित तरीके से एसटीपी से जोड़ा जा सकेगा।

किन इलाकों को मिलेगा फायदा?

सेक्टर-51 के प्रस्तावित सम्पवैल से केवल सेक्टर-51 को ही नहीं, बल्कि आसपास के कई क्षेत्रों की सीवेज व्यवस्था को जोड़ने की योजना है।

प्राधिकरण के अनुसार, भविष्य में सेक्टर-51 पार्ट-बी, केंद्रीय विहार और होशियारपुर को इस सम्पवैल के माध्यम से जोड़ा जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा D-11 और D-10 नामक दो ड्रेनों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना है।

इन क्षेत्रों से आने वाले सीवेज को प्रस्तावित सम्पवैल के जरिए STP-50 तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसका शोधित तरीके से निस्तारण किया जाएगा।

NGT के निर्देशों से भी जुड़ी है योजना

सेक्टर-51 की परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्राधिकरण के अनुसार आसपास के क्षेत्रों और दोनों ड्रेनों को एसटीपी व्यवस्था से जोड़ने की योजना राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों के क्रम में तैयार की गई है।

इसका उद्देश्य सीवेज को अनियंत्रित तरीके से ड्रेनों में जाने से रोकना और उसे उपचारित कर निर्धारित व्यवस्था के तहत निस्तारित करना है।