नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पार्किंग क्षेत्र को टर्मिनल से जोड़ने वाले अंडरपास में भारी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति सामने आई। एयरपोर्ट प्रबंधन के मुताबिक टीम ने 30 मिनट से भी कम समय में पानी साफ कर दिया। इस दौरान ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्ग से डायवर्ट किया गया और यात्रियों को सीधे टर्मिनल कर्ब से पिक-अप किया गया। NIA ने घटना की जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
ग्रेटर नोएडा के जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) को लेकर बारिश के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने एयरपोर्ट परिसर में जल निकासी की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। अत्यधिक बारिश के बाद एयरपोर्ट के पार्किंग क्षेत्र और टर्मिनल को जोड़ने वाले अंडरपास में बारिश का पानी भर गया। कुछ समय के लिए यह मार्ग प्रभावित हुआ और वहां से आने-जाने वाले ट्रैफिक को दूसरे रास्ते से गुजारना पड़ा।
हालांकि, एयरपोर्ट प्रबंधन ने साफ किया है कि इस जलभराव का असर फ्लाइट संचालन पर नहीं पड़ा और किसी भी उड़ान को बाधित नहीं होना पड़ा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने इस मामले में बाकायदा प्रेस नोट जारी कर घटना की स्थिति स्पष्ट की है।
एयरपोर्ट की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, कम समय में हुई बेहद तेज बारिश के कारण टर्मिनल को पार्किंग क्षेत्र से जोड़ने वाले पैसेज में बारिश का पानी प्रवेश कर गया। अचानक हुई भारी बारिश के कारण यह स्थिति बनी, जिसके बाद एयरपोर्ट की टीम तुरंत मौके पर सक्रिय हुई।

सबसे अहम बात यह रही कि एयरपोर्ट टीम ने जलभराव को दूर करने में 30 मिनट से भी कम समय लिया। प्रबंधन के अनुसार, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पानी को साफ किया और प्रभावित मार्ग को सामान्य करने की कोशिश शुरू कर दी। इस दौरान यात्रियों की आवाजाही और पिक-अप व्यवस्था को भी वैकल्पिक तरीके से संचालित किया गया।
जलभराव के समय ट्रैफिक को प्रभावित मार्ग से हटाकर वैकल्पिक रूट से भेजा गया। इससे यात्रियों को एयरपोर्ट परिसर में अनावश्यक परेशानी से बचाने की कोशिश की गई। एयरपोर्ट प्रबंधन ने यह भी बताया कि इस अवधि में यात्रियों को टर्मिनल के कर्ब पर ही सीधे पिक-अप करने की सुविधा दी गई। यानी पार्किंग क्षेत्र तक जाने वाले मार्ग में परेशानी होने के बावजूद यात्रियों के लिए पिक-अप व्यवस्था को पूरी तरह रोका नहीं गया।
यहां एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया। NIA के अनुसार, इस घटना का फ्लाइट ऑपरेशंस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। एयरपोर्ट से उड़ानों का संचालन बाधित नहीं हुआ और किसी फ्लाइट को रद्द या प्रभावित किए जाने की जानकारी नहीं दी गई। प्रबंधन का कहना है कि जलभराव की घटना के बावजूद एयरपोर्ट की परिचालन व्यवस्था सामान्य रूप से जारी रही।
लेकिन इस घटना का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में बारिश के दौरान जल निकासी की व्यवस्था को लेकर किसी भी छोटी घटना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जब भारी बारिश के दौरान टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र के बीच संपर्क मार्ग में पानी भरने की स्थिति पैदा हो। सवाल यह है कि इतनी तेज बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था ने कितना दबाव झेला और क्या भविष्य में इससे बड़ी बारिश होने पर ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न हो सकती है?
हालांकि, एयरपोर्ट प्रबंधन ने खुद इस सवाल को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि टीम घटना की जांच कर रही है। NIA ने आश्वासन दिया है कि जांच के दौरान यदि कहीं सुधार की आवश्यकता सामने आती है, तो आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यानी फिलहाल एयरपोर्ट प्रशासन का जोर इस बात पर है कि घटना को तत्काल नियंत्रित कर लिया गया और परिचालन प्रभावित नहीं हुआ, लेकिन साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है।

बारिश के दौरान जलभराव की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब जेवर एयरपोर्ट को लेकर लोगों की नजरें लगातार बनी हुई हैं। एयरपोर्ट क्षेत्र में आने वाले यात्रियों के लिए सड़क, पार्किंग, ड्रेनेज और टर्मिनल कनेक्टिविटी जैसी व्यवस्थाएं उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितना कि स्वयं फ्लाइट संचालन।
एक ओर एयरपोर्ट टीम ने 30 मिनट से कम समय में पानी साफ कर स्थिति को नियंत्रित करने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया है कि भविष्य में इससे भी अधिक बारिश होने पर एयरपोर्ट की ड्रेनेज व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी?
फिलहाल NIA की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि घटना के दौरान ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्ग से संचालित किया गया, यात्रियों को टर्मिनल कर्ब से पिक-अप की सुविधा दी गई और किसी भी फ्लाइट के संचालन में व्यवधान नहीं आया।
अब निगाहें एयरपोर्ट प्रबंधन की उस जांच और संभावित सुधारात्मक कार्रवाई पर रहेंगी, जिसका आश्वासन खुद NIA ने दिया है। क्योंकि किसी भी नए एयरपोर्ट की सफलता केवल विमानों के सुचारू संचालन से नहीं, बल्कि खराब मौसम जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उसकी इंफ्रास्ट्रक्चर और आपात प्रतिक्रिया क्षमता से भी तय होती है।
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