ग्रेटर नोएडा के थाना बीटा-2 पुलिस ने कंपनी के सर्विस वाल्व की कथित धोखाधड़ी और खरीद-फरोख्त के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 2,045 सर्विस वाल्व और 10 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं। मामला कंपनी के मासिक ऑडिट में करीब 10 हजार सर्विस वाल्व कम मिलने के बाद दर्ज कराया गया था।
ग्रेटर नोएडा में एक कंपनी के गोदाम और स्टॉक से लगातार कम हो रहे सर्विस वाल्व का मामला आखिरकार पुलिस की कार्रवाई तक पहुंच गया। शुरुआत में मामला सिर्फ स्टॉक में कमी का लग रहा था, लेकिन कंपनी के मासिक ऑडिट में जब करीब 10 हजार सर्विस वाल्व कम पाए गए तो शक गहराने लगा। इसके बाद कंपनी की ओर से थाना बीटा-2 में शिकायत दी गई और पुलिस ने जांच शुरू की।
अब इस मामले में पुलिस ने कथित तौर पर कंपनी के सर्विस वाल्व बेचने और खरीदने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से 2,045 सर्विस वाल्व और 10 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
कार्रवाई 13 अगस्त 2026 को थाना बीटा-2 पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर की। पुलिस ने आरोपियों को थाना बीटा-2 क्षेत्र में इंडेन एजेंसी के पास से गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सुनील कुमार, विपिन कुमार, विवेक और सुनीत कुमार उस कंपनी में काम करते थे, जो ग्रेटर नोएडा के साइट-4 क्षेत्र में स्थित है। कंपनी में सर्विस वाल्व बनाए जाते हैं।
पुलिस का आरोप है कि इन चारों कर्मचारियों ने कंपनी के साथ धोखाधड़ी करते हुए सर्विस वाल्व बाहर निकालकर उन्हें आरोपी मनजीत सिंह को बेच दिया। इस कथित खरीद-फरोख्त से अवैध धन अर्जित किए जाने की बात पुलिस ने बताई है।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब कंपनी ने अपने स्टॉक का मासिक ऑडिट कराया। ऑडिट में करीब 10,000 सर्विस वाल्व कम पाए गए। इतनी बड़ी संख्या में स्टॉक गायब मिलने के बाद कंपनी की ओर से मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।
शिकायत के आधार पर थाना बीटा-2 में मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस ने जांच शुरू कर दी।
पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर आरोपियों के संबंध में जानकारी जुटाई गई। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपियों को इंडेन एजेंसी के पास से पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुनील कुमार, विपिन कुमार, विवेक, सुनीत कुमार और मनजीत सिंह के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार सुनील कुमार, विपिन कुमार, विवेक और सुनीत कुमार कंपनी में कर्मचारी थे, जबकि मनजीत सिंह पर कंपनी से कथित तौर पर निकाले गए सर्विस वाल्व खरीदने का आरोप है।
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी सुनील कुमार, पुत्र चन्दी सिंह, राजपुर कलां, थाना दनकौर, गौतमबुद्धनगर का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 34 वर्ष बताई गई है।
दूसरा आरोपी विपिन कुमार, पुत्र मुनीम सिंह, भीकमपुर साहनी नगला, थाना तारिकग्राम, कन्नौज का निवासी है और उसकी उम्र करीब 27 वर्ष है।

तीसरा आरोपी विवेक, पुत्र धर्मेन्द्र कुमार, फूलपुर, थाना बरनाल, मैनपुरी का रहने वाला बताया गया है। उसकी उम्र करीब 30 वर्ष है।
चौथा आरोपी सुनीत कुमार, पुत्र सतीश चन्द, ग्राम नवादा, थाना दनकौर, गौतमबुद्धनगर का निवासी है। उसकी उम्र करीब 36 वर्ष बताई गई है।
वहीं पांचवें आरोपी मनजीत सिंह, पुत्र अमरीक सिंह, निधि खंड-2, थाना इंदिरापुरम, गाजियाबाद का निवासी है और उसकी उम्र करीब 51 वर्ष है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कुल 2,045 कंपनी सर्विस वाल्व बरामद किए हैं।
इसके अलावा पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से 10,000 रुपये नकद भी बरामद हुए हैं।

यह बरामदगी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पुलिस के अनुसार यही सर्विस वाल्व कंपनी से कथित तौर पर धोखाधड़ी करके बाहर निकाले गए और आगे बेचे जा रहे थे।
हालांकि कंपनी के ऑडिट में करीब 10 हजार सर्विस वाल्व कम मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन मौजूदा कार्रवाई में पुलिस ने 2,045 सर्विस वाल्व की बरामदगी की है। इसलिए आगे की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि शेष कमी का पूरा रिकॉर्ड क्या है और उसमें कितने वाल्व की भूमिका इस कथित नेटवर्क से जुड़ी है।
इस मामले में थाना बीटा-2 में मु0अ0सं0 300/2026 दर्ज किया गया है।
पुलिस ने मामला धारा 316(2)/317(2) बीएनएस के तहत पंजीकृत किया है।
अब पुलिस आगे की जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कंपनी से कथित तौर पर सर्विस वाल्व किस तरीके से बाहर निकाले जाते थे, कितने समय से यह गतिविधि चल रही थी, इनकी बिक्री कहां और किसे की जाती थी और इस पूरे मामले में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

इस घटना ने कंपनियों में स्टॉक मैनेजमेंट और आंतरिक निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अगर पुलिस के मुताबिक कंपनी से बड़ी संख्या में सर्विस वाल्व कथित तौर पर बाहर निकाले जा रहे थे, तो यह जानना भी जांच का हिस्सा होगा कि लंबे समय तक स्टॉक में हो रही कमी पकड़ में क्यों नहीं आई।
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले की जांच आगे बढ़ रही है। पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी और 2,045 सर्विस वाल्व की बरामदगी से कथित स्टॉक गड़बड़ी की एक अहम कड़ी सामने आई है।
लेकिन कहानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
करीब 10 हजार वाल्व की कमी कहां तक जाती है, कितने समय से यह खेल चल रहा था और इसके पीछे सिर्फ पांच लोग थे या कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था—इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
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