रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए गौतमबुद्ध नगर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावट और घटिया खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। 23 और 24 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए पनीर, घेवर, खोया और रसगुल्ले के कुल 7 नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए। वहीं सेक्टर-72 सरफाबाद स्थित रसगुल्ला निर्माणशाला में प्रदूषित अवस्था में मिले करीब 100 किलो रसगुल्ले, जिन पर मक्खी-मच्छर पड़े थे, नष्ट कराए गए। विभाग ने साफ किया है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा।
रक्षाबंधन का त्योहार करीब है। बाजारों में मिठाइयों की मांग बढ़ रही है और घरों में भी भाई-बहन के इस खास पर्व की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लेकिन त्योहार के मौसम में मिठाइयों और दूध से बने उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसी को देखते हुए गौतमबुद्ध नगर का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग एक्शन मोड में है।
विभाग की टीम लगातार मिठाई की दुकानों, निर्माणशालाओं और दूसरे खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच कर रही है। इसी अभियान के तहत 23 और 24 अगस्त 2026 को जिले के अलग-अलग इलाकों में चेकिंग और सैंपलिंग की गई।
इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाली तस्वीर नोएडा के सेक्टर-72 सरफाबाद से सामने आई, जहां रसगुल्ला निर्माणशाला में करीब 100 किलो रसगुल्ले प्रदूषित अवस्था में मिले। अधिकारियों के मुताबिक, इन रसगुल्लों पर मक्खी-मच्छर पड़े हुए थे। इसके बाद विभाग ने पूरे बचे हुए रसगुल्ले को नष्ट करा दिया।
लेकिन सवाल यह है कि अगर खाद्य विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंचती तो क्या यही रसगुल्ले बाजार और फिर लोगों के घरों तक पहुंच जाते?
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई सिर्फ मिठाई की दुकानों तक सीमित नहीं रही। 23 अगस्त की रात जेवर टोल प्लाजा पर भी विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया।
सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सर्वेश मिश्रा के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी ओपी सिंह और रविन्द्र नाथ वर्मा की टीम ने चेकिंग के दौरान दिल्ली सप्लाई के लिए जा रहे पनीर की जांच की।
पहले मामले में चौधरी डेरी, पिसावा जलालपुर, अलीगढ़ से दिल्ली सप्लाई के लिए इको गाड़ी संख्या UP 16 MT 2839 से ले जाए जा रहे पनीर का एक नमूना लिया गया।
इसके बाद बाजना, मथुरा की भीमसेन डेरी से गाड़ी संख्या UP 85 FT 1028 के जरिए दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई के लिए ले जाए जा रहे पनीर के दो नमूने लिए गए।
यानी सिर्फ मिठाई की दुकान पर तैयार उत्पाद की जांच नहीं हो रही, बल्कि बाहर से आने वाले दूध उत्पादों की सप्लाई चेन पर भी नजर रखी जा रही है।
24 अगस्त को खाद्य सुरक्षा विभाग की एक अन्य टीम ने सेक्टर-134 स्थित बीएस बीकानेर स्वीट्स की जांच की।
यहां खाद्य सुरक्षा टीम ने घेवर का एक नमूना लिया।
घेवर रक्षाबंधन के दौरान सबसे ज्यादा मांग वाले पारंपरिक व्यंजनों में से एक है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
सैंपल को प्रयोगशाला भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों मुकेश कुमार और विजय बहादुर पटेल की टीम ने इकोटेक-2 स्थित प्लॉट नंबर 66 पर शगुन स्वीट की निर्माणशाला का निरीक्षण किया।
यहां से टीम ने—
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खोया का एक नमूना
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घेवर का एक नमूना
संग्रहित किया।
दोनों नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।
खोया और घेवर दोनों ही त्योहारी सीजन में बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में इनकी गुणवत्ता पर निगरानी रखना खाद्य सुरक्षा अभियान का अहम हिस्सा है।
अब आते हैं इस पूरी कार्रवाई के सबसे अहम हिस्से पर।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी विशाल गुप्ता और रितु सक्सेना की टीम ने सरफाबाद, सेक्टर-72, नोएडा स्थित प्रदीप कुमार की रसगुल्ला निर्माणशाला की जांच की।
यहां टीम ने रसगुल्ले का एक नमूना लिया।
लेकिन निरीक्षण के दौरान वहां रखे बाकी रसगुल्लों की स्थिति को लेकर गंभीर समस्या सामने आई।
विभाग के अनुसार, करीब 100 किलोग्राम रसगुल्ले प्रदूषित अवस्था में पाए गए और उन पर मक्खी-मच्छर पड़े हुए थे।

ऐसी स्थिति में खाद्य पदार्थ को बाजार में जाने देना लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता था।
इसलिए विभाग ने मौके पर ही करीब 100 किलो रसगुल्ले नष्ट करा दिए।
यह कार्रवाई सिर्फ एक खाद्य उत्पाद को नष्ट करने तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठाती है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में तैयार मिठाई किस स्थिति में रखी जा रही थी और यदि इसकी समय पर जांच नहीं होती तो यह कितने लोगों की थाली तक पहुंच सकती थी?
23 और 24 अगस्त को हुई कार्रवाई में विभाग ने कुल 7 खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं।
इनमें—
पनीर के 3 नमूने, घेवर के 2 नमूने, खोया का 1 नमूना और रसगुल्ले का 1 नमूना शामिल है।
अब इन सभी नमूनों की लैब जांच के बाद वास्तविक गुणवत्ता की तस्वीर सामने आएगी।
यानी अभी किसी भी नमूने को मिलावटी घोषित करना जल्दबाजी होगी। अंतिम स्थिति प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
नोएडा में हुई यह कार्रवाई किसी एक शहर तक सीमित चिंता नहीं है।
त्योहारी सीजन शुरू होते ही देश के कई शहरों में खाद्य सुरक्षा विभाग सक्रिय हो जाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि त्योहारों में दूध, पनीर, खोया, मावा और मिठाइयों की मांग अचानक बढ़ जाती है।

मांग बढ़ने के साथ उत्पादन और सप्लाई का दबाव बढ़ता है और ऐसे समय में घटिया सामग्री, अस्वच्छ उत्पादन या मिलावट की संभावना को लेकर खाद्य सुरक्षा एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है।
चाहे नोएडा हो, गाजियाबाद हो, दिल्ली हो, लखनऊ हो, जयपुर हो, मुंबई हो या देश का कोई और शहर—त्योहारों के समय खाद्य सुरक्षा की चुनौती बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
त्योहार खुशियों के लिए होते हैं, लोगों की सेहत से खिलवाड़ के लिए नहीं।
मिठाई की मांग कितनी भी बढ़ जाए, उत्पादन कितना भी ज्यादा हो जाए, लेकिन आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सर्वेश मिश्रा ने बताया कि विभाग की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनपदवासियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप शुद्ध और सुरक्षित खाद्य एवं पेय पदार्थ उपलब्ध हों।
इसके लिए अलग-अलग खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी, नमूने लिए जाएंगे और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यानी 23 और 24 अगस्त की कार्रवाई को अभियान का अंत नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली निगरानी की एक कड़ी माना जा रहा है।
नोएडा में 100 किलो रसगुल्ले नष्ट हो चुके हैं।
जेवर टोल पर दिल्ली जा रहे पनीर के तीन नमूने जांच के लिए भेजे जा चुके हैं।

सेक्टर-134 से घेवर का नमूना लिया गया है।
इकोटेक-2 से खोया और घेवर की जांच शुरू हो चुकी है।
सेक्टर-72 से रसगुल्ले का नमूना भी प्रयोगशाला पहुंच रहा है।
अब सबसे महत्वपूर्ण इंतजार लैब रिपोर्ट का है।
क्या इन नमूनों में गुणवत्ता संबंधी कोई कमी सामने आती है?
क्या कहीं मिलावट की पुष्टि होती है?
क्या किसी खाद्य उत्पाद में निर्धारित मानकों का उल्लंघन मिला?
इन सवालों के जवाब प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद सामने आएंगे।
लेकिन एक बात फिलहाल साफ है—रक्षाबंधन की मिठास में मिलावट या अस्वच्छता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
क्योंकि त्योहार हर साल आते हैं, मिठाइयां हर साल बिकती हैं, लेकिन लोगों का स्वास्थ्य किसी भी कीमत पर दांव पर नहीं लगाया जा सकता।
और यही वजह है कि नोएडा ही नहीं, बल्कि देश के कई शहरों में त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा अभियान चरम पर पहुंच जाते हैं—ताकि त्योहार की थाली में मिठास हो, मिलावट और बीमारी का खतरा नहीं।
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