Friday, July 10, 2026

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च के लिए तैयार! जींद–सोनीपत रूट से शुरू होगी ग्रीन रेल क्रांति, जानिए कब, कैसे और क्यों है यह ऐतिहासिक

17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने की संभावना; 10 कोच, 2400 किलोवाट की क्षमता, जीरो कार्बन उत्सर्जन, जींद में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट और अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ भारतीय रेलवे रचने जा रहा है नया इतिहास।

New Delhi , Latest Updated On - Jul 10 2026 | 00:00:00 AM
विज्ञापन

भारतीय रेलवे जल्द ही देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन शुरू करने जा रहा है। हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड पर चलने वाली यह 10 कोच की आधुनिक ट्रेन ग्रीन हाइड्रोजन से संचालित होगी और इसके संचालन के दौरान केवल जलवाष्प का उत्सर्जन होगा। जानिए इस ऐतिहासिक परियोजना से जुड़ी हर बड़ी जानकारी।

विज्ञापन

भारतीय रेलवे स्वच्छ, आधुनिक और ऊर्जा दक्ष परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। लंबे समय से चर्चा में रही देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन अब लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है। यदि प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार सब कुछ होता है, तो 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। इसके साथ ही भारत रेल परिवहन में हाइड्रोजन तकनीक का उपयोग करने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा।

यह परियोजना केवल एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारतीय रेलवे के हरित भविष्य, स्वच्छ ऊर्जा और नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।


जींद–सोनीपत रेलखंड क्यों चुना गया?

भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड को इस परियोजना के लिए पायलट कॉरिडोर के रूप में चुना है। यह लगभग 90 किलोमीटर लंबा रेलमार्ग है, जहां पहली बार हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन का नियमित परिचालन किया जाएगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस रूट का चयन तकनीकी परीक्षण, परिचालन क्षमता और हाइड्रोजन अवसंरचना विकसित करने की दृष्टि से किया गया है। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेलमार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें संचालित की जा सकती हैं।


क्या है हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक?

हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन से बिल्कुल अलग तकनीक पर काम करती है। इसमें डीजल या कोयले की जगह हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया जाता है।

ट्रेन में लगे फ्यूल सेल के भीतर हाइड्रोजन और वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन के बीच रासायनिक अभिक्रिया होती है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रैक्शन मोटर को चलाती है और ट्रेन आगे बढ़ती है।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड, धुआं या अन्य प्रदूषक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता। ट्रेन से केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, इसलिए इसे लगभग शून्य प्रदूषण वाली तकनीक माना जाता है।


दुनिया की सबसे शक्तिशाली ब्रॉड गेज हाइड्रोजन ट्रेन होने का दावा

भारतीय रेलवे द्वारा तैयार किए गए इस ट्रेन-सेट में कुल 10 कोच हैं। इनमें 2 ड्राइविंग पावर कार और 8 यात्री कोच शामिल हैं।

प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार की क्षमता 1200 किलोवाट है। दोनों को मिलाकर ट्रेन की कुल क्षमता 2400 किलोवाट होती है। रेलवे के अनुसार यह ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर विकसित दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक है।


गति और यात्री क्षमता

ट्रेन की डिजाइन अधिकतम लगभग 110 किलोमीटर प्रति घंटा की गति के अनुरूप तैयार की गई है। हालांकि जींद–सोनीपत रेलखंड पर इसकी परिचालन गति लगभग 75 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।

पिछले कुछ महीनों में इस ट्रेन का विभिन्न परिस्थितियों में सफल परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान 75 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति पर इसकी कार्यक्षमता और सुरक्षा की जांच की गई।

इस ट्रेन में लगभग 682 सीटें उपलब्ध होंगी, जबकि कुल मिलाकर करीब 2600 यात्रियों के सफर करने की क्षमता होगी।


जींद में तैयार हुआ ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और रीफ्यूलिंग केंद्र

हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए हरियाणा के जींद में अत्याधुनिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन एवं रीफ्यूलिंग सुविधा विकसित की गई है।

इस संयंत्र में इलेक्ट्रोलाइसिस तकनीक के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जाएगी। यही हाइड्रोजन ट्रेन में भरी जाएगी।

रेलवे ने यहां हाइड्रोजन कम्प्रेशन सिस्टम, बैकअप कम्प्रेसर और अत्याधुनिक रीफ्यूलिंग व्यवस्था भी स्थापित की है।


PESO से मिली सुरक्षा मंजूरी

हाइड्रोजन जैसी अत्यधिक ज्वलनशील गैस के सुरक्षित उपयोग को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने जींद स्थित हाइड्रोजन भंडारण और आपूर्ति प्रणाली को आवश्यक स्वीकृति प्रदान की है।

ट्रेन और रीफ्यूलिंग स्टेशन पर हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर, सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली और 24 घंटे मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। शुरुआती चरण में प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञ भी संचालन के दौरान मौजूद रहेंगे।



RDSO ने तैयार किए ऑपरेशन और मेंटेनेंस मानक

रेलवे के अनुसंधान, डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) ने इस परियोजना के लिए विशेष ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस मैनुअल तैयार किए हैं।

दिल्ली के शकूरबस्ती स्थित रखरखाव केंद्र में इस ट्रेन की नियमित जांच, सुरक्षा ऑडिट और निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार मेंटेनेंस किया जाएगा।


ग्रीन रेलवे और नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम

भारतीय रेलवे वर्ष 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

यह तकनीक न केवल प्रदूषण कम करेगी बल्कि डीजल पर निर्भरता घटाने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


भारत किन देशों की सूची में होगा शामिल?

हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक का उपयोग फिलहाल दुनिया के कुछ ही देशों में किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका शामिल हैं।

भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के परिचालन के साथ देश भी इस अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।


क्या होगा किराया?

हाइड्रोजन ट्रेन के किराए को लेकर अभी भारतीय रेलवे ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में शुरुआती किराया ₹5 से ₹25 के बीच होने की संभावना जताई गई है, लेकिन रेलवे की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए अंतिम किराया आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।


भविष्य की दिशा

भारतीय रेलवे इस परियोजना को फिलहाल पायलट आधार पर लागू कर रहा है। यदि यह सफल रहती है तो भविष्य में देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेलमार्गों पर भी हाइड्रोजन आधारित ट्रेनें चलाई जा सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक नई रेल सेवा नहीं बल्कि भारतीय रेलवे के तकनीकी परिवर्तन, आत्मनिर्भर भारत, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। जींद–सोनीपत रेलखंड से शुरू होने वाला यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में भारतीय रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण की नई राह खोल सकता है।

(Sources: Press Information Bureau (PIB), Ministry of Railways, Northern Railway)

विज्ञापन

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन | भारतीय रेलवे | हाइड्रोजन ट्रेन | जींद | सोनीपत | हरियाणा | ग्रीन हाइड्रोजन | हाइड्रोजन फ्यूल सेल | रेल मंत्रालय | अश्विनी वैष्णव | नरेंद्र मोदी | RDSO | PESO | ग्रीन मोबिलिटी | नेट जीरो | स्वच्छ ऊर्जा | रेल तकनीक | आत्मनिर्भर भारत | रेलवे समाचार | भारत की ग्रीन रेल क्रांति

Related News

विज्ञापन

Newsletter

For newsletter subscribe us

विज्ञापन
आपकी राय
भारत क्रिकेट टीम के सर्वश्रेष्ठ कप्तान का नाम कौन है?




COMMENTS
All Comments (11)
  • V
    vijaykumar
    vijaykumar@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    A
    arif
    arif@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    A
    ajaykumar
    ajaykumar@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    very intresting news
    A
    ankitankit
    ankitankit@pearlorganisation.com
    27/12/2023
    Good
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    29/12/2023
    good news
    R
    rahul+11
    rahul+11@pearlorganisation.com
    15/01/2024
    Nice
    R
    rahul+11
    rahul+11@pearlorganisation.com
    15/01/2024
    Bisarkh police station, during checking at Char Murti intersection, spotted an FZ MOSA carrying two persons towards Surajpur.
    R
    rahul
    rahul@pearlorganisation.com
    02/02/2024
    test
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    02/02/2024
    अच्छा
    R
    rahul
    rahul@pearlorganisation.com
    08/02/2024
    अच्छा