उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने दिल्ली किशनगंज रेलवे स्टेशन पर 34 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग आधारित सिग्नलिंग प्रणाली लागू कर दी है। इस आधुनिकीकरण से ट्रेन संचालन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और दक्षता में बड़ा सुधार होगा। 5 मई से 13 मई तक चले इस बड़े तकनीकी अपग्रेड को भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
उत्तर रेलवे का दिल्ली मंडल लगातार अपने रेल बुनियादी ढांचे को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है। इसी क्रम में दिल्ली किशनगंज रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी आधुनिकीकरण परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना के तहत स्टेशन पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग आधारित सिग्नलिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे अब यहां ट्रेन संचालन पहले से अधिक सुरक्षित, तेज और सुगम हो गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह महत्वपूर्ण कार्य 5 मई 2026 से शुरू होकर 13 मई 2026 तक चला। 13 मई को नई इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग प्रणाली का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया गया। इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 34 करोड़ रुपये की लागत आई है।
आधुनिक तकनीक से लैस हुआ स्टेशन
दिल्ली किशनगंज स्टेशन पर लागू की गई नई इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली रेलवे की नवीनतम तकनीकों में से एक मानी जाती है। इस प्रणाली के जरिए ट्रेन संचालन में मानवीय त्रुटियों की संभावना बेहद कम हो जाती है और ट्रेनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित की जा सकती है।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम में आधुनिक फेल-सेफ तकनीक और बेहतर मॉनिटरिंग व्यवस्था को शामिल किया गया है। इसके कारण किसी भी तकनीकी गड़बड़ी या खतरे की स्थिति में तुरंत अलर्ट मिल सकेगा और दुर्घटनाओं की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
सुरक्षा और परिचालन दक्षता में होगा बड़ा सुधार
नई प्रणाली लागू होने के बाद स्टेशन पर ट्रेनों की मूवमेंट पहले से अधिक सुचारू हो जाएगी। इससे न केवल यात्री ट्रेनों बल्कि मालगाड़ियों के संचालन में भी तेजी आएगी। रेलवे का मानना है कि इस तकनीकी बदलाव से सेक्शन में ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित और समयबद्ध हो सकेगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली रेलवे नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती है। यह ट्रेनों के लिए सुरक्षित रूट तय करने, सिग्नल कंट्रोल करने और प्वाइंट्स को ऑटोमैटिक तरीके से संचालित करने में मदद करती है। इसके चलते ट्रेन संचालन में देरी और तकनीकी बाधाएं कम होती हैं।

यार्ड रीमॉडलिंग भी परियोजना का हिस्सा
इस आधुनिकीकरण परियोजना के तहत केवल सिग्नलिंग सिस्टम ही नहीं बदला गया, बल्कि स्टेशन यार्ड का भी रीमॉडलिंग कार्य किया गया। यार्ड के ट्रैक लेआउट और परिचालन ढांचे को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है ताकि ट्रेनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित और तेज हो सके।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस रीमॉडलिंग से भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने की स्थिति में भी स्टेशन पर परिचालन क्षमता प्रभावित नहीं होगी।
यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ
इस तकनीकी उन्नयन का सीधा फायदा यात्रियों को मिलने वाला है। नई प्रणाली लागू होने से ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा और सिग्नल फेल जैसी समस्याएं कम होंगी। इसके अलावा ट्रेनों की मूवमेंट अधिक सुरक्षित होने से यात्रियों का सफर भी पहले से अधिक भरोसेमंद बनेगा।

रेलवे का कहना है कि दिल्ली मंडल देश के सबसे व्यस्त रेल सेक्शनों में शामिल है। ऐसे में यहां आधुनिक तकनीक का उपयोग रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बेहद अहम कदम माना जा रहा है।
भारतीय रेलवे की आधुनिकीकरण नीति का हिस्सा
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली किशनगंज स्टेशन पर यह उपलब्धि भारतीय रेलवे की व्यापक आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है। रेलवे लगातार अपने नेटवर्क में नई तकनीकों को शामिल कर रहा है ताकि यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और बेहतर ट्रेन संचालन उपलब्ध कराया जा सके।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में दिल्ली मंडल के अन्य स्टेशनों और रेल सेक्शनों में भी इसी तरह के तकनीकी उन्नयन किए जाएंगे।
टीमवर्क से मिली सफलता
इस पूरे प्रोजेक्ट को सफल बनाने में दिल्ली मंडल और रेलवे मुख्यालय की परियोजना टीमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रेलवे अधिकारियों ने इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और परियोजना टीमों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर इतनी बड़ी परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करना एक बड़ी उपलब्धि है।
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