गाजियाबाद में एक महिला का मकान कथित तौर पर धोखाधड़ी से कब्जा लिए जाने का मामला सामने आया। जनता दर्शन में जिलाधिकारी से गुहार लगाने के बाद प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए महिला को उसका मकान वापस दिलाया। भावुक महिला ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया।
गाजियाबाद में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने यह संदेश दिया है कि यदि शिकायतों पर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई हो तो पीड़ितों को न्याय मिल सकता है। वर्षों से अपने ही मकान के लिए संघर्ष कर रही एक महिला को तब राहत मिली, जब उसकी फरियाद सीधे जिलाधिकारी के जनता दर्शन तक पहुंची। जांच हुई, प्रशासन हरकत में आया और आखिरकार महिला को उसका मकान वापस दिला दिया गया।
यह पूरा मामला विजय नगर क्षेत्र की रहने वाली श्रीमती चंचल का है, जिन्होंने 29 मई 2026 को जनता दर्शन कार्यक्रम में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ के समक्ष अपनी पीड़ा रखी थी।
आंखों में आंसू लेकर पहुंची थीं जिलाधिकारी के पास
श्रीमती चंचल, जो बी-26, सेक्टर-11 विजय नगर की निवासी हैं, ने जिलाधिकारी को बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले ताज मोहम्मद नामक व्यक्ति से मात्र 1 लाख 50 हजार रुपये उधार लिए थे। आरोप है कि इस ऋण के बदले उनके मकान के मूल दस्तावेज गिरवी रख लिए गए।
महिला का आरोप था कि बाद में ताज मोहम्मद ने ब्याज की राशि को बढ़ाकर लगभग 7 लाख रुपये बता दिया और उनके मकान पर कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं, कुछ समय बाद उक्त मकान का कब्जा मोमीन नामक व्यक्ति को भी दे दिया गया।

पीड़िता ने बताया कि उन्होंने इस मामले में कई बार पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। निराश और परेशान महिला ने जनता दर्शन में जिलाधिकारी से कहा कि अब उन्हें सिर्फ प्रशासन से ही न्याय की उम्मीद है।
जिलाधिकारी ने तुरंत लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने उपजिलाधिकारी सदर और संबंधित पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में एक संयुक्त जांच टीम गठित कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने के आदेश दिए।
प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर तथ्यों की जांच की और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया। जांच के दौरान पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
उपजिलाधिकारी सदर अरुण दीक्षित द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि शिकायत में तथ्य हैं और ताज मोहम्मद का नाम पहले भी भूमि कब्जे से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। रिपोर्ट के अनुसार वह ऐसे ही एक मामले में जेल भी जा चुका है।
प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर दिलाया कब्जा
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 1 जून 2026 को मौके पर पहुंचकर पीड़िता को उसके मकान का पुनः कब्जा दिलाया।
इस दौरान पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। जैसे ही महिला को अपने मकान का कब्जा मिला, उसकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

लंबे समय से चल रहा संघर्ष आखिरकार समाप्त हुआ और उसे अपना घर वापस मिल गया।
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना की और इसे आम लोगों के लिए सकारात्मक संदेश बताया।
भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
मौके पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप किसी भी गरीब, कमजोर, बेसहारा या जरूरतमंद व्यक्ति का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर जेल भी भेजा जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य पीड़ितों को न्याय दिलाना है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
भावुक हुईं पीड़िता, मुख्यमंत्री और डीएम का जताया आभार
अपना मकान वापस मिलने के बाद श्रीमती चंचल भावुक हो गईं। उन्होंने नम आंखों से मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ सुना था कि जिलाधिकारी लोगों की मदद करते हैं, लेकिन आज उन्होंने इसे अपनी आंखों से देख लिया।

महिला ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं था कि उनकी शिकायत पर इतनी जल्दी कार्रवाई होगी और उन्हें न्याय मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि वह जीवन भर प्रशासन की इस मदद को याद रखेंगी।
जनता दर्शन बना उम्मीद की किरण
गाजियाबाद में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम लगातार लोगों की समस्याओं के समाधान का माध्यम बनता जा रहा है। जिलाधिकारी प्रतिदिन सुबह जनता की शिकायतें सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश देते हैं।
श्रीमती चंचल का मामला भी इसी व्यवस्था की एक ऐसी मिसाल बनकर सामने आया है, जहां एक पीड़ित महिला की फरियाद सीधे प्रशासन तक पहुंची और उसे न्याय मिला।
यह घटना न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता का उदाहरण है, बल्कि उन लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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