Friday, May 29, 2026

स्मार्ट पुलिस’ का नया मॉडल तैयार करेगा यूपी! ड्रोन, AI और साइबर ट्रेनिंग से बदलेगी पुलिस की पूरी तस्वीर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव के दिए निर्देश, संवेदनशील व्यवहार, तकनीकी दक्षता और जनसंवाद पर रहेगा विशेष फोकस

Bahrampur , Latest Updated On - May 29 2026 | 12:50:00 PM
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उत्तर प्रदेश में पुलिसिंग को आधुनिक, संवेदनशील और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि यूपी पुलिस को ड्रोन, साइबर फॉरेंसिक, AI, सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण और संवाद कौशल से लैस किया जाए, ताकि वह देश की सबसे प्रोफेशनल और जनविश्वास वाली पुलिस बन सके।

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उत्तर प्रदेश में पुलिसिंग की तस्वीर अब तेजी से बदलने जा रही है। आने वाले समय में यूपी पुलिस केवल अपराधियों पर कार्रवाई करने वाली फोर्स नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, संवेदनशील व्यवहार, साइबर दक्षता और प्रोफेशनल संवाद क्षमता से लैस एक स्मार्ट पुलिस बल के रूप में दिखाई देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में साफ संकेत दिए कि बदलते दौर में पुलिसिंग का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है और अब पुलिस को नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को पूरी तरह परिणामोन्मुख, तकनीक आधारित, व्यवहारिक और समयानुकूल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आज की पुलिसिंग केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है। साइबर अपराध, डिजिटल फ्रॉड, फॉरेंसिक जांच, जनसंवाद, संवेदनशील व्यवहार और तनावपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित निर्णय लेने जैसी क्षमताएं अब पुलिस की मूल आवश्यकता बन चुकी हैं।

बैठक में मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार ही पुलिस की असली पहचान बनता है। उन्होंने कहा कि जनता के साथ संवाद और मानवीय व्यवहार को प्रशिक्षण का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। इसी दिशा में जनता से दुर्व्यवहार की शिकायत वाले 5,816 पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर उनके लिए विशेष संवाद कौशल एवं सौम्य व्यवहार प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

सरकार ने इसके लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई की भी मदद ली है। फरवरी 2026 में TISS द्वारा 37 पुलिसकर्मियों को व्यवहार, ऑपरेशनल सॉफ्ट स्किल्स और केसलेट्स का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इतना ही नहीं, प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन करने के लिए इम्पैक्ट असेसमेंट सिस्टम भी लागू किया गया है, जिसमें महिला सम्मान, तनाव प्रबंधन, आत्मनियंत्रण, संवाद क्षमता, नेतृत्व और संवेदनशील व्यवहार जैसे 18 प्रमुख बिंदुओं पर मूल्यांकन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी निर्देश दिए कि प्रशिक्षण व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग हो और प्रशिक्षण संस्थानों का नियमित मूल्यांकन भी किया जाए।


बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय के अंतर्गत पुलिस अकादमी मुरादाबाद, 11 प्रशिक्षण संस्थान, 6 पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, 2 आर्म्ड पुलिस ट्रेनिंग संस्थान, 62 अस्थायी और 31 स्थायी रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। राज्य में 112 RTC पर एक साथ प्रशिक्षण प्रारंभ कर अंतिम परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया गया और एक साथ परिणाम घोषित किए गए।

सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि प्रदेश की प्रशिक्षण क्षमता को 18 हजार से बढ़ाकर 60,244 तक पहुंचा दिया गया है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से अपडेट किया गया है। यूपी पुलिस ट्रेनिंग पोर्टल के जरिए प्रशिक्षकों और प्रशिक्षुओं को डिजिटल प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है और अब तक 5,000 विशेषज्ञ प्रशिक्षक तैयार किए जा चुके हैं।

बैठक में मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT पोर्टल पर यूपी पुलिस की उपलब्धियों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि 27 मई 2026 तक 3 लाख 90 हजार 799 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि 59 लाख 2 हजार 703 कोर्स पूरे किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि देश में सबसे अधिक मानी जा रही है।

20 मार्च 2026 को यूपी पुलिस की 149 इकाइयों को iGOT पोर्टल से जोड़ा गया, जिससे जनपद और इकाई स्तर पर प्रशिक्षण की निगरानी और अधिक प्रभावी हो गई। 2 अप्रैल से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित साधना सप्ताह में यूपी पुलिस ने देशभर की राज्य पुलिस और केंद्रीय पुलिस बलों में पहला स्थान हासिल किया। अकेले यूपी पुलिस ने 28 लाख से अधिक कोर्स पूरे किए, जो कई राज्यों के संयुक्त प्रदर्शन से भी ज्यादा रहा।


बैठक में बताया गया कि अब पुलिस प्रशिक्षण में अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया जा रहा है। इसके तहत ड्रोन प्रशिक्षण, साइबर फॉरेंसिक लैब, आधुनिक फॉरेंसिक लैब, ड्राइविंग सिम्युलेटर और फायरिंग सिम्युलेटर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।

आने वाले समय में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण प्रस्तावित है। इसमें 4,253 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस, 15,131 आरक्षी पीएसी एवं सशस्त्र पुलिस, 2,282 महिला पीएसी आरक्षी, 10,469 आरक्षी नागरिक पुलिस और 1,341 यूपीएसएसएफ आरक्षियों का आधारभूत प्रशिक्षण शामिल है। साथ ही 4,500 उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडरों के प्रशिक्षण की विस्तृत तैयारी भी की जा रही है।

प्रशिक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए 11 नए संवेदनशीलता मॉड्यूल भी जोड़े गए हैं। ATS, STF, NDRF, SDRF, RAF, यूपी-112, विमेन पावरलाइन, चाइल्डलाइन, BDS और फायर सर्विसेज जैसी एजेंसियों द्वारा ऑपरेशनल मॉक ड्रिल और कैप्सूल कोर्स संचालित किए जाएंगे।

बैठक में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई कि पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी मुरादाबाद में मालदीव पुलिस सेवा के उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित इस योजना को गृह मंत्रालय के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे भारत और पड़ोसी देशों के बीच सुरक्षा सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंत में कहा कि पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था में लगातार नवाचार, जवाबदेही और आधुनिकता सुनिश्चित की जाए ताकि उत्तर प्रदेश पुलिस हर चुनौती का सामना अधिक दक्षता, संवेदनशीलता और प्रोफेशनल क्षमता के साथ कर सके। साफ है कि आने वाले समय में यूपी पुलिस की पहचान केवल सख्ती नहीं, बल्कि तकनीक, संवाद और संवेदनशीलता से भी होगी।

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