Tuesday, June 02, 2026

क्या विलुप्त होती लोककलाओं को मिलेगा नया जीवन? यूपी सरकार और विश्वविद्यालय के बीच हुआ बड़ा सांस्कृतिक समझौता

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय ने मिलाया हाथ, युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की बनेगी नई रणनीति

noida , Latest Updated On - Jun 02 2026 | 15:34:00 PM
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उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

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उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ और स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य प्रदेश की लोककलाओं, सांस्कृतिक परंपराओं, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और नाट्य विधाओं को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।

यह समझौता पर्यटन विभाग के सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक एवं निदेशक आशीष कुमार तथा दोनों संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

युवा पीढ़ी को विरासत से जोड़ना समय की मांग

समारोह को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि कला, संगीत, नृत्य और लोक परंपराओं के क्षेत्र में भी अत्यंत समृद्ध राज्य है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ कई लोककलाएं विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही हैं, ऐसे में उन्हें संरक्षित करना और युवा पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

मंत्री ने कहा कि यदि आज हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित नहीं रख पाए तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से कट जाएंगी। इसलिए शिक्षा संस्थानों और सांस्कृतिक संस्थाओं के बीच इस प्रकार का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।


पहले भी हो चुके हैं चार समझौते

जयवीर सिंह ने जानकारी दी कि स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के साथ इससे पहले भी चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह नया समझौता दोनों संस्थाओं के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा तथा कला, संस्कृति और अकादमिक अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि यह साझेदारी प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक साबित होगी।

लोककलाओं के संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस

इस एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, सेमिनारों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों का आयोजन करेंगे।

विशेष रूप से उन लोककलाओं और पारंपरिक विधाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जो धीरे-धीरे समाज से विलुप्त होती जा रही हैं। दोनों संस्थाएं मिलकर इन कला रूपों का दस्तावेजीकरण, अध्ययन और प्रचार-प्रसार करने का कार्य करेंगी।

इसके साथ ही छात्रों को प्रदेश की लोक संस्कृति, शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य और रंगमंच की परंपराओं से परिचित कराने के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

शिक्षा और अनुसंधान को मिलेगा नया आयाम

यह समझौता केवल सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

एमओयू के तहत दोनों संस्थाएं अकादमिक सहयोग, शोध कार्य, प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेषज्ञ व्याख्यान, सांस्कृतिक अध्ययन और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगी। इसके लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार किया जाएगा जो वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा देगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों को भारतीय कला और संस्कृति के विभिन्न आयामों को समझने और शोध के नए अवसर प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

दोनों संस्थाओं की साझा सोच

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लंबे समय से राज्य की कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य कर रही है। अकादमी द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संस्था का मुख्य उद्देश्य शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, नृत्य और नाट्य परंपराओं को बढ़ावा देना है।

वहीं स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय भी शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। विश्वविद्यालय विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों और समाज को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करता रहा है।

इसी साझा सोच और उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए दोनों संस्थाओं ने यह महत्वपूर्ण समझौता किया है।

इन गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा, फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के डीन प्रो. पिन्टू मिश्रा, परफॉर्मिंग आर्ट्स विभाग की अध्यक्ष प्रो. भावना ग्रोवर उपस्थित रहीं।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर, पर्यटन सलाहकार जेपी सिंह तथा अकादमी के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी समारोह में मौजूद रहे।

इस समझौते को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की कला और संस्कृति को नई ऊर्जा और पहचान मिलने की उम्मीद है।

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