उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में निर्माणाधीन पुल का हिस्सा अचानक ढहने से बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में 6 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 11 घंटे तक मलबे में फंसे तीन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हादसे के बाद SDRF, प्रशासन और टेक्निकल टीम युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में शुक्रवार तड़के हुआ पुल हादसा पूरे प्रदेश को झकझोर गया। बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे वहां काम कर रहे और नीचे आराम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में अब तक 6 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 11 घंटे तक पिलर के पास मलबे में फंसे तीन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
यह हादसा हमीरपुर जिले के कुरारा क्षेत्र में मोरकंदर परसानी से नैथी गांव के बीच बन रहे पुल पर हुआ। बताया जा रहा है कि यह पुल करीब 92 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा था। पुल निर्माण का जिम्मा कानपुर की “द सेल्टर कंपनी” के पास था। भीषण गर्मी को देखते हुए मजदूरों से रात की शिफ्ट में काम कराया जा रहा था। श्रमिक रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक काम करते थे ताकि दिन की तेज गर्मी से बचा जा सके।
प्राथमिक जानकारी के मुताबिक शुक्रवार तड़के करीब 1 बजे अचानक तेज आंधी और तूफान आया। मौसम के अचानक बदले मिजाज के बीच पुल का भारी-भरकम स्लैब और पिलर अचानक गिर पड़ा। हादसे के वक्त कई मजदूर पुल के नीचे मौजूद थे। कुछ मजदूर काम के बाद वहीं आराम कर रहे थे, तभी देखते ही देखते पूरा ढांचा भरभराकर गिर गया और मजदूर उसके नीचे दब गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और SDRF की टीमें मौके पर पहुंच गईं। अंधेरे और खराब मौसम के बीच राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। मलबा इतना भारी था कि रेस्क्यू टीमों को मजदूरों तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई घंटों तक गैस कटर, क्रेन और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम चलता रहा।
करीब 11 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पिलर के पास फंसे तीन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जिन मजदूरों को जिंदा निकाला गया, उनमें अवधेश निषाद निवासी भूरागढ़ बांदा, कल्लू यादव निवासी भूरागढ़ बांदा और राजेश निषाद निवासी नरैनी बांदा शामिल हैं। तीनों को गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
इस दर्दनाक हादसे में जिन मजदूरों की मौत हुई है, उनमें बांदा और हमीरपुर जनपद के श्रमिक शामिल बताए जा रहे हैं। मृतकों की पहचान लोकेन्द्र पुत्र राधेश्याम निषाद निवासी थाना चिल्ला जनपद बांदा, सावंत यादव निवासी भूरागढ़ बांदा, सभाजीत निवासी भूरागढ़ बांदा, पुष्पेंद्र सिंह चौहान पुत्र राजेंद्र सिंह निवासी स्वासा खुर्द हमीरपुर और राजेश पाल पुत्र सभाजीत निवासी अचपुरा हमीरपुर के रूप में हुई है। प्रशासन अन्य मृतकों की पहचान और परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।

हादसे के बाद मौके पर भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। मृतकों और घायलों के परिजन बदहवास हालत में घटनास्थल और अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। कई परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल था। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में प्रशासन का सहयोग किया।
इस हादसे ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि हादसे की असली वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन प्राथमिक तौर पर तेज आंधी-तूफान को इसका कारण माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों और कुछ मजदूरों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण मजबूत होता तो तेज हवा और बारिश में पुल इस तरह नहीं गिरता।
घटना की गंभीरता को देखते हुए टेक्निकल टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। विशेषज्ञ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पुल का हिस्सा तकनीकी खामी, निर्माण में लापरवाही या मौसम की वजह से गिरा। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमीरपुर पुल हादसे का तत्काल संज्ञान लेते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, जबकि घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।
गौरतलब है कि यह पुल राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के प्रयासों से बनाया जा रहा था और इसके पूरा होने के बाद क्षेत्र के कई गांवों को सीधा संपर्क मार्ग मिलने वाला था। लेकिन निर्माण के दौरान हुए इस हादसे ने विकास कार्यों की सुरक्षा और गुणवत्ता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अब प्रशासन की प्राथमिकता हादसे के कारणों की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई पर टिकी हुई है। वहीं मजदूरों के परिवार इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि आखिर उनकी जिंदगी इतनी सस्ती क्यों साबित हुई।
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