भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के 16वें दीक्षांत समारोह में छात्राओं का दबदबा देखने को मिला। कुल 48 मेधावियों को पदक प्रदान किए गए, जिनमें लगभग 60 प्रतिशत छात्राएं रहीं। एमपीए की छात्रा श्वेता गुप्ता ने अकेले 7 पदक जीतकर समारोह का आकर्षण बन गईं।
लखनऊ स्थित भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह में इस बार एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पूरे सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा दिया। मंच पर जब एक-एक कर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया जा रहा था, तब सबसे अधिक चर्चा उन बेटियों की रही जिन्होंने अपनी प्रतिभा से न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया।
विश्वविद्यालय के कला मण्डपम सभागार में आयोजित इस भव्य समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने 48 मेधावी विद्यार्थियों को 30 स्वर्ण, 9 रजत और 9 कांस्य पदक प्रदान किए। खास बात यह रही कि कुल पदक विजेताओं में लगभग 60 प्रतिशत छात्राएं रहीं, जिसने यह संदेश दिया कि भारतीय कला, संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में बेटियां लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।
दीक्षांत समारोह का सबसे यादगार क्षण तब आया, जब एमपीए की छात्रा कुंवारी श्वेता गुप्ता का नाम बार-बार मंच से पुकारा गया। उन्होंने अकेले 7 पदक जीतकर समारोह में नया इतिहास रच दिया। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे सभागार को गर्व से भर दिया।
श्वेता के अलावा स्पर्श कुमार कश्यप ने एमपीए (गायन) में 4 पदक, आलोक कुमार मिश्र ने बीपीए (तबला) में 4 पदक, प्रिया दूबे ने बीपीए (गायन) में 4 पदक तथा नेहा काजी ने गिटार में 5 पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
इसके अलावा रूनझुन सिंह, वल्लरी नारायण पाठक, तनिष्का सक्सेना, आकांक्षा राय, दीप्ति सिंह, सर्वेश मणि त्रिपाठी, प्रिया, गार्गीराज गंगा, जितेन्द्र कुमार शर्मा, खुशी तिवारी, अमन कुमार यादव, आर्यन रावत, शिया राय, प्रशांत पाण्डेय, नितीश श्रीवास्तव, सुनंदा सिंह, वैशाली आनंद और करतुम्म तरैया सहित कई विद्यार्थियों को विभिन्न विधाओं में सम्मानित किया गया।

समारोह में तीन शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई।
'2047 के विकसित भारत में बेटियों की होगी बड़ी भूमिका'
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि आज जिन विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया है, वे आने वाले समय में भारत को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं, विशेषकर बेटियों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महिलाओं और बेटियों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज उनके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं।
विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास और भविष्य की नई तैयारी
जयवीर सिंह ने विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1926 में स्थापित यह संस्थान पहले मैरिस कॉलेज ऑफ म्यूजिक, फिर भातखण्डे संगीत महाविद्यालय और बाद में वर्ष 2022 में राज्य विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हुआ।
उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय के लिए लखनऊ के काकराबाद क्षेत्र में 14 एकड़ भूमि पर नया आधुनिक परिसर बनाया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को और बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का केंद्र
मंत्री ने कहा कि भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि भारतीय कला और संस्कृति की अमूल्य धरोहर है।
यह संस्थान वर्षों से शास्त्रीय संगीत, गायन, वादन, लोकगीत, नृत्य, नाट्य और मानविकी जैसी विधाओं को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी भारतीय सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि डिग्री और पदक केवल उपलब्धि नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी हैं। भविष्य में उन्हें ज्ञान, संस्कार और कौशल के माध्यम से समाज और राष्ट्र की सेवा करनी होगी।

राज्यपाल का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया
समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के प्रतिनिधि एवं विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम. बोबड़े ने राज्यपाल का संदेश पढ़कर सुनाया।
उन्होंने पदक विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए विश्वविद्यालय से अपेक्षा की कि वह अपनी विकास यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाए और देश के अग्रणी सांस्कृतिक संस्थानों में अपनी पहचान और मजबूत करे।
उन्होंने हाल ही में विश्वविद्यालय के निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने और विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा एवं संस्कार देने पर भी बल दिया।
गांवों के विद्यार्थियों का भी बढ़ाया गया उत्साह
विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए कठिंगरा, बेलवा, शक्कर खेड़ा, मलिहाबाद, काकोरी और सरोसा-भरोसा गांवों के विद्यालयों में आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। इससे ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने का संदेश दिया गया।
संगीत और संस्कृति से जुड़े दिग्गज रहे मौजूद
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति मांडवी सिंह ने संस्थान की उपलब्धियों और शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि पद्मश्री पं. कुंवर बोस ने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से जुड़े रहने का आह्वान किया।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात, कुलसचिव एस.पी. सिंह, प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पं. साजन मिश्रा, सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी, विश्वविद्यालय के शिक्षक, कलाकार, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में अभिभावक भी उपस्थित रहे।
दीक्षांत समारोह केवल डिग्री और पदक वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, संगीत और नई पीढ़ी की प्रतिभा के उत्सव के रूप में यादगार बन गया।
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