गाजियाबाद कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी रविगाजियाबाद कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतें सुनीं। आरटीई के तहत पात्र बच्चों के 100 प्रतिशत दाखिले सुनिश्चित करने और प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण व समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।न्द्र कुमार मॉंदड़ ने विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतें सुनीं। आरटीई के तहत पात्र बच्चों के 100 प्रतिशत दाखिले सुनिश्चित करने और प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण व समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान किसी भी प्रशासन की कार्यशैली का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। इसी उद्देश्य के साथ गाजियाबाद कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित नियमित जनसुनवाई में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने स्वयं फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी शिकायत को औपचारिकता समझकर न लिया जाए। प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए ताकि आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
जनसुनवाई के दौरान राजस्व, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए), पुलिस, नगर निकाय, सामाजिक कल्याण तथा शिक्षा विभाग से जुड़े अनेक मामले जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए गए। प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

RTE दाखिलों पर प्रशासन की विशेष नजर
जनसुनवाई के दौरान शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत बच्चों के दाखिले से जुड़े कई मामले भी सामने आए। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए कि आरटीई के अंतर्गत पात्र सभी बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और किसी भी पात्र बच्चे को केवल प्रशासनिक लापरवाही या प्रक्रियागत बाधाओं के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहने दिया जा सकता। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि आरटीई के प्रावधानों का पूरी गंभीरता से पालन हो और सभी पात्र बच्चों को समय पर विद्यालयों में प्रवेश मिले।

जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं, समाधान का माध्यम बने
जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य केवल शिकायतें दर्ज करना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी समाधान करना है। यदि किसी नागरिक को एक ही समस्या के लिए बार-बार कार्यालय आना पड़ रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि शिकायतों का निस्तारण करते समय केवल कागजी कार्रवाई पूरी करने के बजाय वास्तविक समाधान सुनिश्चित किया जाए। शिकायतकर्ता को संतुष्टि मिले, यही प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

कई विभागों से जुड़े मामलों की हुई सुनवाई
मंगलवार की जनसुनवाई में विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें सामने आईं, जिनमें प्रमुख रूप से—
-
राजस्व विभाग से जुड़े भूमि विवाद
-
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) से संबंधित समस्याएं
-
पुलिस मामलों से जुड़ी शिकायतें
-
नगर निकाय संबंधी नागरिक सुविधाओं के मुद्दे
-
सामाजिक कल्याण योजनाओं से जुड़े प्रकरण
-
शिक्षा विभाग एवं आरटीई प्रवेश संबंधी शिकायतें
जिलाधिकारी ने प्रत्येक विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और निर्धारित समयसीमा के भीतर उनका समाधान सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन की जवाबदेही पर विशेष जोर
रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासन की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है, जब जनता को समय पर न्याय और राहत मिले। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि प्रत्येक प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाए तथा शिकायतकर्ता को उसके आवेदन की प्रगति से भी अवगत कराया जाए।
RTE व्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि पात्र बच्चों के प्रवेश में किसी प्रकार की बाधा आती है तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।

जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश इस दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि इससे जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शिक्षा को प्रमुख स्थान मिलने का संकेत मिलता है।
जनसुनवाई से बढ़ता है जनता का विश्वास
जनसुनवाई जैसी व्यवस्थाएं प्रशासन और आम नागरिकों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम होती हैं। जब वरिष्ठ अधिकारी स्वयं लोगों की समस्याएं सुनते हैं और तत्काल कार्रवाई के निर्देश देते हैं तो इससे आम जनता का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण लगातार सुनिश्चित किया जाए तो न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ती है बल्कि विभागों की जवाबदेही भी मजबूत होती है।
जनसुनवाई के दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति), सिटी मजिस्ट्रेट सहित विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुसार शिकायतों के त्वरित निस्तारण का भरोसा भी दिलाया।
मंगलवार को आयोजित यह जनसुनवाई केवल शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली का स्पष्ट संदेश भी लेकर आई। आरटीई के तहत पात्र बच्चों के शत-प्रतिशत दाखिले सुनिश्चित करने के निर्देश हों या प्रत्येक शिकायत के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण पर जोर—जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने साफ कर दिया कि गाजियाबाद में जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इन निर्देशों को कितनी गंभीरता से धरातल पर लागू करते हैं और आम नागरिकों को इसका वास्तविक लाभ कितनी शीघ्रता से मिलता है।
COMMENTS