उत्तर प्रदेश की मातृभूमि योजना अब गांवों में आत्मनिर्भरता और प्रतिभा विकास का नया मॉडल बन रही है। उन्नाव के कमालपुर में खुले कला प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं, महिलाओं और बच्चों को कला एवं स्वरोजगार का प्रशिक्षण मिलेगा। इस पहल की सबसे बड़ी प्रेरणा बनीं दिव्यांग कलाकार शीला शर्मा, जिन्होंने अपने पैरों से जिंदगी की नई तस्वीर बनाई।
Uttar Pradesh के गांव अब सिर्फ खेती और पारंपरिक जीवन तक सीमित नहीं रह गए हैं। यहां अब आत्मनिर्भरता, हुनर और सपनों की नई कहानियां लिखी जा रही हैं। योगी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मातृभूमि योजना’ अब प्रदेश में ग्रामीण विकास का ऐसा मॉडल बनती जा रही है, जो न सिर्फ गांवों की तस्वीर बदल रही है, बल्कि वहां छिपी प्रतिभाओं को भी नई पहचान दे रही है।
इसी कड़ी में Unnao जिले की ग्राम पंचायत कमालपुर में एक अत्याधुनिक कला प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि उन ग्रामीण बच्चों, महिलाओं और युवाओं के सपनों का नया ठिकाना है, जो आर्थिक अभावों के कारण अपनी प्रतिभा को आगे नहीं बढ़ा पाते थे।
इस अनूठे केंद्र का उद्घाटन Om Prakash Rajbhar, यूपी ट्रांसफॉर्मेशन कमिशन के सीईओ Manoj Kumar Singh और मोहान विधायक Brijesh Kumar Rawat की मौजूदगी में हुआ। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों और विभागीय अधिकारियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

इस पूरी पहल की सबसे प्रेरणादायक कहानी जुड़ी है Sheela Sharma से। दोनों हाथ न होने के बावजूद पैरों की उंगलियों से कैनवास पर रंगों की दुनिया रचने वाली शीला शर्मा आज पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन चुकी हैं। उनकी कला सिर्फ पेंटिंग नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और जज्बे की कहानी बयां करती है।
कमालपुर में बना यह कला प्रशिक्षण केंद्र मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के उस विजन को जमीन पर उतारता नजर आता है, जिसमें हर गांव को आत्मनिर्भर और साधन-संपन्न बनाने की बात कही गई है। पंचायती राज विभाग की देखरेख में संचालित होने वाला यह केंद्र ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार करेगा।
यहां बच्चों और युवाओं को चित्रकला, हस्तशिल्प, सिलाई, वस्त्र डिजाइनिंग, संगीत और नृत्य जैसी कई विधाओं में प्रशिक्षण दिया जाएगा। खास बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुफ्त कला सामग्री और प्रोत्साहन भत्ता भी दिया जाएगा, ताकि गरीबी किसी की प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बन सके।

इस केंद्र की सबसे खास बात इसकी जनभागीदारी आधारित संरचना है। मुख्यमंत्री की जन-सहभागिता नीति से प्रेरित होकर इस परियोजना में 60 प्रतिशत योगदान स्वयं शीला शर्मा ने दिया है, जबकि बाकी 40 प्रतिशत राशि पंचायती राज विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई। एक दिव्यांग कलाकार द्वारा अपने गांव और वहां के बच्चों के भविष्य के लिए इतना बड़ा योगदान लोगों को भावुक भी कर रहा है और प्रेरित भी।
शीला शर्मा ने उद्घाटन के दौरान कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं होती, लेकिन सही मंच और अवसर न मिलने के कारण कई सपने अधूरे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि मातृभूमि योजना ने उनके वर्षों पुराने सपने को पूरा किया है और अब गांव का कोई बच्चा कला सीखने से वंचित नहीं रहेगा।
इस अवसर पर पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की पंचायतों का तेजी से कायाकल्प हो रहा है। उन्होंने कहा कि मातृभूमि योजना सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज और गांवों को जोड़ने वाला एक बड़ा अभियान है। यह योजना लोगों को अपनी मिट्टी और अपने गांव के विकास से जोड़ने का काम कर रही है।

राजभर ने कहा कि जब समाज और सरकार मिलकर काम करते हैं, तब विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने इस मॉडल को प्रदेश के अन्य गांवों में भी लागू करने की आवश्यकता बताई।
ग्रामीण विकास के विशेषज्ञ भी इस पहल को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर गांवों में इसी तरह कला, कौशल और स्वरोजगार आधारित केंद्र विकसित किए जाएं तो पलायन कम होगा और ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
कमालपुर का यह केंद्र अब आसपास के गांवों के लिए भी उम्मीद की नई किरण बन गया है। यहां आने वाले बच्चों की आंखों में अब सिर्फ सपने नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास भी दिखाई देने लगा है।
यह पहल यह भी साबित करती है कि दिव्यांगता किसी इंसान की कमजोरी नहीं होती, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने हर बाधा छोटी पड़ जाती है। शीला शर्मा की कहानी आज हजारों लोगों को यह संदेश दे रही है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर हौसला मजबूत हो तो इंसान खुद की ही नहीं, पूरे समाज की तस्वीर बदल सकता है।
उत्तर प्रदेश की मातृभूमि योजना अब सिर्फ विकास योजना नहीं, बल्कि गांवों में आत्मनिर्भरता, सामाजिक भागीदारी और नई उम्मीदों की पहचान बनती जा रही है।
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