केंद्र सरकार की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने लखनऊ में कौशल विकास कार्यक्रमों की समीक्षा की और यूपी के स्किल मॉडल को देश के लिए उदाहरण बताया।
उत्तर प्रदेश में कौशल विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार की सचिव, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता देबाश्री मुखर्जी ने गुरुवार को लखनऊ दौरे के दौरान राज्य में संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों और स्किल इको-सिस्टम की व्यापक समीक्षा की।
लखनऊ पहुंचने पर उनका स्वागत प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, निदेशक (प्रशिक्षण) अभिषेक सिंह और मिशन निदेशक पुलकित खरे द्वारा किया गया। इस दौरान अधिकारियों ने उन्हें राज्य में चल रहे विभिन्न कौशल विकास अभियानों की जानकारी दी।
अपने दौरे के दौरान सचिव देबाश्री मुखर्जी ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मुख्यालय और राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), अलीगंज का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रधानाचार्य कक्ष में संस्थान में संचालित विभिन्न ट्रेड्स और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने रेमण्ड टेलरिंग सेंटर का भी अवलोकन किया, जहां प्रशिक्षार्थियों से सीधा संवाद कर प्रशिक्षण की गुणवत्ता और उपयोगिता पर फीडबैक लिया। प्रशिक्षार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण मिल रहा है।
सचिव मुखर्जी ने टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से स्थापित अत्याधुनिक लैब्स और कार्यशालाओं का भी निरीक्षण किया। यहां उपलब्ध आधुनिक मशीनरी और प्रशिक्षण प्रणाली की उन्होंने सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के तकनीकी संसाधन युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने में बेहद महत्वपूर्ण हैं।

इसके साथ ही उन्होंने रॉयल एनफील्ड और मारुति सुजुकी के सहयोग से संचालित वर्कशॉप का भी दौरा किया। उन्होंने इन वर्कशॉप्स में उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए जा रहे युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ऑटोकैड लैब के निरीक्षण के दौरान सचिव ने प्रशिक्षार्थियों द्वारा तैयार की जा रही तकनीकी ड्रॉइंग की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने टर्नर वर्कशॉप का भी दौरा किया और वहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों से बातचीत कर उनके अनुभवों को जाना।
इस अवसर पर एचसीएल फाउंडेशन समर्थित ग्रे सिम लर्निंग फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘स्किल रथ’ का भी अवलोकन किया गया। सचिव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम है।
समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रदेश में चल रहे नवाचारों, अप्रेंटिसशिप योजनाओं, स्वरोजगार कार्यक्रमों और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। सचिव देबाश्री मुखर्जी ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का स्किल मॉडल अब देश के लिए एक उदाहरण बनता जा रहा है।
इस दौरान प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम और मिशन निदेशक पुलकित खरे ने मिशन की उपलब्धियों पर आधारित ‘कौशल दीप’ कॉफी टेबल बुक सचिव को भेंट की।
सचिव मुखर्जी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक उद्योग आधारित और रोजगारपरक बनाया जाए, ताकि युवाओं को बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि युवाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक संसाधनों से लैस करना और गुणवत्ता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त निदेशक मानपाल सिंह, राजेंद्र प्रसाद, निदेशक (प्राविधिक) डी.के. सिंह, संयुक्त निदेशक अनिल वर्मा और महिला आईटीआई की प्रधानाचार्य शिवानी पंकज सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
यह दौरा न केवल उत्तर प्रदेश के कौशल विकास तंत्र की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि राज्य देश के स्किल हब के रूप में तेजी से उभर रहा है।
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