ईरान ने इजरायल के हमले के जवाब में कतर के रास लाफान LNG केंद्र पर मिसाइल दागी, जिससे भारी नुकसान और आग लगी—ग्लोबल गैस सप्लाई पर मंडरा रहा खतरा।
मध्य पूर्व में जारी तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इजरायल और ईरान के बीच चल रही टकराव की आग अब खाड़ी देशों तक फैल गई है। इस संघर्ष के बीच कतर को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। ईरान ने इजरायल के हमले का जवाब देते हुए कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) केंद्र पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला कर दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है।
घटना 18 मार्च 2026 की है, जब ईरान ने कुल 5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइलों को बीच रास्ते में ही नष्ट कर दिया, लेकिन एक मिसाइल रास लाफान में जाकर गिरी। इस विस्फोट के बाद इलाके में भीषण आग लग गई और ऊर्जा सुविधा को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा।
रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी न केवल कतर बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG उत्पादन और निर्यात केंद्र माना जाता है। यहां से वैश्विक स्तर पर गैस की बड़ी सप्लाई होती है। ऐसे में इस हमले का असर सिर्फ कतर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
कतर एनर्जी कंपनी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल हमले के बाद तुरंत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों को मौके पर भेजा गया। आग पर काबू पाने की कोशिशें जारी हैं और स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राहत की बात यह रही कि इस हमले में अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इस हमले के पीछे की वजह भी बेहद अहम है। दरअसल, इजरायल ने इससे कुछ घंटे पहले ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र है, जो ईरान और कतर के बीच साझा है। इजरायली हमले में ईरान के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया गया, जिससे ईरान बुरी तरह भड़क गया।

हमले से पहले ईरान ने सऊदी अरब, यूएई और कतर को चेतावनी भी दी थी कि वे अपने ऊर्जा ठिकानों को खाली कर दें, अन्यथा उन्हें निशाना बनाया जाएगा। इसके बावजूद कतर पर हमला कर दिया गया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया है।
घटना के बाद कतर सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने इस हमले को “खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना कदम” करार दिया। साथ ही कतर ने ईरानी दूतावास के मिलिट्री और सिक्योरिटी अटैची समेत कई अधिकारियों को पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित कर दिया और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश जारी किया।
इसी बीच ईरान ने सऊदी अरब को भी निशाना बनाया। सऊदी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रियाद की ओर दागी गई 4 बैलिस्टिक मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया, हालांकि कुछ मलबा गिरने से 4 लोग घायल हो गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का हिस्सा है, जो अब एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमले से वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी आ सकती है।
रास लाफान में उत्पादन प्रभावित हुआ है, हालांकि कतर ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। इसके बावजूद LNG सप्लाई में संभावित रुकावट से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा सकता है। आने वाले दिनों में इस संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर साफ नजर आ सकता है।
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