उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश और रोजगार को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 70 करोड़ रुपये की 9 नई परियोजनाओं को संस्तुति मिली है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने का प्रभावी माध्यम बनेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को कृषि आधारित उद्योगों का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने, किसानों की आय में वृद्धि करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इस दौरान करीब 70 करोड़ रुपये की लागत वाली 9 परियोजनाओं को सशर्त स्वीकृति के लिए संस्तुत किया गया।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग केवल कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उनका कहना था कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य तभी मिलेगा जब कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण होगा और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित होगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत" के संकल्प को साकार करने में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उत्तर प्रदेश सरकार इसी सोच के साथ निवेश, नवाचार और रोजगार को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर कार्य कर रही है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास के साथ-साथ हरित ऊर्जा को भी समान महत्व दे रही है। उन्होंने सौर ऊर्जा आधारित औद्योगिक मॉडल को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे उद्योगों की उत्पादन लागत कम होगी, ऊर्जा की बचत होगी और उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती देगा।
उन्होंने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत उपलब्ध सभी प्रोत्साहन, अनुदान और निवेश संबंधी सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक उद्यमी प्रदेश में निवेश के लिए आगे आएं।
70 करोड़ की 9 परियोजनाओं को मिली संस्तुति
इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में गठित एप्रेजल समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुल 11 निवेश प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की गई, जिनमें से 9 प्रस्तावों को निर्धारित शर्तों के साथ स्वीकृति के लिए राज्य स्तरीय समिति (SLEC) के समक्ष भेजने की संस्तुति की गई।
इन परियोजनाओं में लगभग 70 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। जिन जिलों से प्रस्तावों को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया गया उनमें बरेली से दो, गोरखपुर से दो, कानपुर नगर, ललितपुर, बदायूं, लखनऊ और हापुड़ से एक-एक परियोजना शामिल है।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद कृषि आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

PMFME योजना में यूपी बना देश का नंबर-1 राज्य
बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग (PMFME) योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने 99 प्रतिशत लोन डिस्बर्समेंट के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।
उन्होंने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत लेटर ऑफ कम्फर्ट औसतन 20 दिनों में जारी किए जा रहे हैं, जबकि स्वीकृत औद्योगिक इकाइयां अब औसतन 200 दिनों में शुरू हो रही हैं, जबकि पहले यही प्रक्रिया लगभग 500 दिन लेती थी। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने निवेश प्रक्रियाओं को पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सरल बनाया है।
31 हजार परियोजनाओं का लक्ष्य
बैठक में बैंकर्स के साथ PMFME योजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने जुलाई माह के अंत तक 31 हजार स्वीकृत परियोजनाओं का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि विभिन्न बैंकों में अभी भी 6208 आवेदन स्वीकृति के लिए लंबित हैं। इनमें सर्वाधिक आवेदन भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, कैनरा बैंक, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, आईडीबीआई, पंजाब एंड सिंध बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में लंबित हैं।
बैठक में मौजूद बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लंबित सभी आवेदनों का जल्द से जल्द निस्तारण सुनिश्चित किया जाए ताकि निवेशकों और उद्यमियों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।

बैठक के दौरान 4 जुलाई 2026 को आयोजित आम (मैंगो) क्रेता-विक्रेता गोष्ठी में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सीआईएसएच (CISH) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक गुप्ता तथा भानु प्रताप सिंह, अध्यक्ष बीएमएस एफपीओ, सीतापुर को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों की सक्रिय भागीदारी से कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है।
गोरखपुर की कंपनी ने रचा नया इतिहास
बैठक के दौरान गोरखपुर की क्रेजी स्नैक्स लिमिटेड के निवेशक नवीन अग्रवाल ने जानकारी दी कि कंपनी ने 3 जुलाई 2026 को मुंबई के अंधेरी स्थित लेमन ट्री होटल में अपना आईपीओ लॉन्च किया। यह पूर्वांचल के औद्योगिक और व्यापारिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
उन्होंने बताया कि कंपनी का आईपीओ लॉन्च समारोह बीएसई से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित हुआ। इस उपलब्धि पर समिति ने नवीन अग्रवाल को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित भी किया।
निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
बैठक के अंत में समिति ने निर्देश दिए कि भविष्य में राज्य स्तरीय समिति के समक्ष किसी भी निवेश प्रस्ताव को भेजने से पहले संबंधित निवेशकों से 100 रुपये के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर शपथ-पत्र प्राप्त किया जाए, जिससे निवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बन सके।
सरकार का मानना है कि तेज स्वीकृति प्रक्रिया, आसान ऋण उपलब्धता और निवेशकों के अनुकूल नीतियां उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख खाद्य प्रसंस्करण राज्यों में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि यही गति बनी रही तो आने वाले वर्षों में प्रदेश किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्योगों को मजबूत करने और लाखों युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने की दिशा में नई पहचान बना सकता है।
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