Tuesday, July 21, 2026

यूपी में कारोबार के नियमों में होने जा रहा बड़ा बदलाव! 'डीरेग्युलेशन 2.0' की समीक्षा में केंद्र-राज्य ने तय किया नया रोडमैप

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने विभागों को दिए स्पष्ट निर्देश—अनुमोदन प्रक्रिया हो तेज, सरल और पारदर्शी; उद्योग संगठनों के सुझावों के साथ निवेशक-अनुकूल व्यवस्था को मिलेगा नया स्वरूप।

Bahrampur , Latest Updated On - Jul 17 2026 | 21:06:00 PM
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उत्तर प्रदेश में कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) को नई गति देने के लिए 'कम्प्लायंस रिडक्शन एवं डीरेग्युलेशन 2.0' की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लखनऊ में आयोजित हुई। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने सभी विभागों को नियमों को सरल बनाने और अनावश्यक अनुपालनों को समाप्त करने के निर्देश दिए। बैठक में केंद्र सरकार, नीति आयोग, इन्वेस्ट यूपी और प्रमुख उद्योग संगठनों ने भी भाग लिया।

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उत्तर प्रदेश में निवेश, उद्योग और कारोबार को नई गति देने के लिए राज्य सरकार ने नियामकीय सुधारों की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को लखनऊ के लोक भवन में 'कम्प्लायंस रिडक्शन एवं डीरेग्युलेशन 2.0' को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने की, जबकि भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत हरबंसलाल खेरा सहित केंद्र और राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारी इसमें शामिल हुए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में व्यवसाय करने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाना, अनावश्यक सरकारी औपचारिकताओं को समाप्त करना तथा निवेशकों और उद्यमियों के लिए एक अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करना था। समीक्षा के दौरान यह भी आकलन किया गया कि विभिन्न विभागों द्वारा डीरेग्युलेशन 2.0 के तहत अब तक कितनी प्रगति हुई है और आगे किन सुधारों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाना है।

23 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सुधारों की समीक्षा

बैठक के दौरान राज्य सरकार ने उन 23 प्रमुख क्षेत्रों की विस्तृत समीक्षा की, जहां नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अनुपालनों के बोझ को कम करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इनमें राजस्व, स्वास्थ्य, चिकित्सा, पर्यटन, ऊर्जा, अग्निशमन, शहरी विकास, पर्यावरण, श्रम तथा औद्योगिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल रहे।

अधिकारियों ने इन क्षेत्रों में मौजूद प्रक्रियागत बाधाओं को समाप्त करने, अनुमोदन प्रणाली को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने तथा उद्योगों और आम नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी, डिजिटल और समयबद्ध बनाने के लिए विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने दिए स्पष्ट निर्देश

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने कहा कि डीरेग्युलेशन 2.0 केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की निवेश नीति को और अधिक प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि चिन्हित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में तेजी से कार्य किया जाए और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए। साथ ही उन्होंने अनावश्यक अनुपालनों (Compliances) को समाप्त करने तथा सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' केवल नीतिगत सुधारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ निवेशकों, उद्योगों और आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।

पहले चरण में यूपी ने हासिल किया था देश में पहला स्थान

बैठक में यह भी बताया गया कि कम्प्लायंस रिडक्शन एवं डीरेग्युलेशन के पहले चरण में उत्तर प्रदेश ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया था। राज्य सरकार ने अनुमोदन संबंधी कई जटिल प्रक्रियाओं को समाप्त करते हुए उद्योगों के लिए बेहतर कारोबारी माहौल तैयार किया था।

अब डीरेग्युलेशन 2.0 उसी अभियान का विस्तारित संस्करण है, जिसके माध्यम से शेष जटिल प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विभागों ने प्रस्तुत की प्रगति रिपोर्ट

समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों ने अपने-अपने स्तर पर किए गए सुधारों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। साथ ही शेष प्रस्तावित सुधारों को लागू करने के लिए समय-सीमा भी साझा की गई।

बताया गया कि इस पहल के तहत भूमि प्रशासन, भवन निर्माण स्वीकृतियां, श्रम कानून, उपयोगिता सेवाओं तथा अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इन सुधारों से सरकारी अनुपालनों की संख्या कम हुई है, प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण बढ़ा है और निवेशकों के लिए सुविधा तंत्र पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ है।

लोक भवन में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति) अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) अमित कुमार घोष, प्रमुख सचिव (श्रम एवं सेवायोजन) शनमुग सुंदरम तथा यूपीनेडा के निदेशक रवीन्द्र सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

उद्योग संगठनों के साथ भी हुई अहम बैठक

लोक भवन में समीक्षा बैठक समाप्त होने के बाद इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में कम्प्लायंस रिडक्शन एवं डीरेग्युलेशन 2.0 पर उद्योग संगठनों के साथ एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत हरबंसलाल खेरा ने की। इसमें भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय के अपर सचिव राहुल शर्मा, एमएसएमई मंत्रालय, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), नीति आयोग, इन्वेस्ट यूपी तथा कई प्रमुख औद्योगिक संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

ASSOCHAM, FICCI, CII सहित कई उद्योग संगठनों ने दिए सुझाव

बैठक में ASSOCHAM, FICCI, CII, PHD Chamber, IIA, लघु उद्योग भारती तथा DICCI के प्रतिनिधियों ने उद्योग जगत की ओर से महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

उद्योग संगठनों ने नियामकीय प्रक्रियाओं को और सरल बनाने, सरकारी अनुमोदनों में लगने वाले समय को कम करने, अनुपालनों के बोझ को घटाने तथा उत्तर प्रदेश को अधिक निवेशक-अनुकूल राज्य बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव साझा किए।

इन प्रमुख सुधार क्षेत्रों पर रहा विशेष फोकस

बैठक में भारत सरकार की कम्प्लायंस रिडक्शन एवं डीरेग्युलेशन 2.0 टास्क फोर्स द्वारा चिन्हित प्रमुख सुधार क्षेत्रों की भी समीक्षा की गई। इनमें—

  • अग्नि सुरक्षा स्वीकृतियों को सरल बनाना।
  • विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना।
  • भूमि प्रबंधन प्रणाली में सुधार।
  • तकनीक आधारित सरल नियामकीय व्यवस्था विकसित करना।
  • औद्योगिक उपयोग के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना।

प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि उद्योगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सहयोगात्मक, समयबद्ध और प्रभावी सुधारों को तेजी से लागू किया जाना चाहिए, ताकि उत्तर प्रदेश में कारोबार सुगमता को और अधिक मजबूती मिल सके।

इन वरिष्ठ अधिकारियों की रही उपस्थिति

बैठक में एमएसएमई मंत्रालय के निदेशक अंकित अग्रवाल, डीपीआईआईटी के उप सचिव राजेश कुमार सिन्हा, नीति आयोग की यंग प्रोफेशनल दीक्षा बिस्वास, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद तथा अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में केंद्र और राज्य सरकार ने यह संदेश दिया कि दोनों सरकारें मिलकर ऐसी नियामकीय व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो पारदर्शी, दक्ष, डिजिटल, निवेशक-अनुकूल और उद्योगों के विकास के लिए अधिक सक्षम हो। डीरेग्युलेशन 2.0 के माध्यम से उत्तर प्रदेश का लक्ष्य केवल नियमों को आसान बनाना नहीं, बल्कि निवेशकों का विश्वास बढ़ाना, रोजगार सृजन को गति देना और राज्य को देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में शामिल करना भी है।

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