मानसून के बीच लखनऊ में जलभराव रोकने की तैयारियों का जायजा लेने नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा स्वयं मैदान में उतरे। विश्वास खंड और विवेक खंड में नाला निर्माण, सफाई कार्य और निर्माणाधीन शक्ति उपवन का निरीक्षण करते हुए उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बारिश के दौरान किसी भी नागरिक को जलभराव या जल निकासी की समस्या का सामना न करना पड़े।
मानसून के मौसम में हर साल जलभराव की समस्या राजधानी लखनऊ के कई इलाकों में लोगों की परेशानी का कारण बनती रही है। ऐसे में इस बार सरकार पहले से ही सक्रिय नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने शुक्रवार को राजधानी के विश्वास खंड और विवेक खंड क्षेत्रों का दौरा कर नाला निर्माण और सफाई कार्यों की जमीनी हकीकत का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्षाकाल में नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने विश्वास खंड में निर्माणाधीन 600 मीटर लंबे नाले का विस्तृत जायजा लिया। अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि इस परियोजना के तहत अब तक 500 मीटर नाले का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष कार्य तेजी से कराया जा रहा है। इस पर मंत्री ने निर्माण कार्य की गति बनाए रखने के साथ-साथ गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि यह नाला पूरी तरह तैयार होने के बाद विश्वास खंड ही नहीं बल्कि आसपास के कई क्षेत्रों को भी जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान पानी की निकासी जितनी तेज और व्यवस्थित होगी, उतनी ही कम परेशानी आम नागरिकों को होगी। सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे लोगों को लंबे समय तक लाभ मिल सके।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने नाला सफाई अभियान का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने उन्हें चल रहे सफाई कार्यों की जानकारी दी, जिस पर मंत्री ने संतोष व्यक्त किया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल एक बार सफाई कर देना पर्याप्त नहीं है। वर्षा ऋतु के दौरान नालों की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि कहीं भी जल निकासी बाधित न हो।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर के सभी संवेदनशील और जलभराव संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाए। यदि किसी स्थान पर जल निकासी में बाधा आती है तो उसे तत्काल दूर किया जाए। साथ ही नागरिकों से मिलने वाली शिकायतों का भी त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मंत्री ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी परियोजना में गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास कार्य तभी सार्थक होंगे जब उनका लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंचे। नगर विकास विभाग का लक्ष्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि लोगों को बेहतर और सुरक्षित शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ए.के. शर्मा ने निर्माणाधीन शक्ति उपवन का भी दौरा किया। उन्होंने वहां चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि शक्ति उपवन में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराया जाए।

इसके साथ ही वहां ऐसे डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएं जिनके माध्यम से राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंच सके। उनका कहना था कि हरित वातावरण और जनजागरूकता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
मंत्री ने कहा कि शहरों का विकास केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं होना चाहिए। बेहतर जल निकासी, स्वच्छ वातावरण, हरित क्षेत्र और नागरिक सुविधाओं का विस्तार भी आधुनिक शहर की पहचान है। इसी सोच के साथ सरकार लगातार कार्य कर रही है ताकि राजधानी लखनऊ को बेहतर शहरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
मानसून को देखते हुए उन्होंने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि कहीं जलभराव की स्थिति बनती है तो संबंधित अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर समाधान सुनिश्चित करें। नागरिकों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से सभी विभागों को समन्वय बनाकर कार्य करना होगा।

मंत्री के निरीक्षण के दौरान लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त सहित नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने निर्माण और सफाई कार्यों की वर्तमान स्थिति से मंत्री को अवगत कराया तथा निर्धारित समय के भीतर शेष कार्य पूरा करने का भरोसा भी दिया।
राजधानी में लगातार हो रहे विकास कार्यों और मानसून से पहले प्रशासन की सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। हालांकि इसकी वास्तविक परीक्षा आने वाली तेज बारिश के दौरान ही होगी। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नागरिकों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
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