यूपी में राज्यसभा चुनाव के बीच अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर आमने-सामने हैं। अखिलेश के बीजेपी, चुनाव आयोग और INDIA ब्लॉक को लेकर बयान के बाद राजभर ने PDA, रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी को लेकर सपा पर तीखा हमला बोला।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी और सुभासपा के बीच जुबानी टकराव तेज हो गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले किए हैं। विवाद की शुरुआत राज्यसभा चुनाव, INDIA ब्लॉक और चुनाव आयोग को लेकर अखिलेश यादव के बयानों से हुई, जिसके बाद राजभर ने सपा के PDA फॉर्मूले को ही अपने निशाने पर ले लिया।
दरअसल, उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। समाजवादी पार्टी ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया। तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी राजनीतिक चर्चा बनी हुई है।
अखिलेश ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर साधा निशाना
ओम प्रकाश राजभर के INDIA ब्लॉक में जाने से जुड़े सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग सपा के वोट से जीतकर गए हैं, वे बीजेपी के वोट से कैसे जीतेंगे। अखिलेश ने INDIA ब्लॉक की बैठक के दौरान अपने बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए जाने का भी जिक्र किया।
अखिलेश ने कहा कि तस्वीर अपना बैकग्राउंड बता देती है और सवाल किया कि क्या ये होर्डिंग बीजेपी ने लगवाए होंगे। इसी क्रम में उन्होंने बीजेपी के बड़े कार्यालयों पर भी तंज कसा। अखिलेश ने कहा कि बीजेपी को इतने बड़े कार्यालय बनाने की क्या जरूरत थी, एक फ्लोर चुनाव आयोग के लिए ही ले लेते।
उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या इससे पहले आयोग ने उनके साथ न्याय किया था। अखिलेश ने यह भी कहा कि बीजेपी बदलेगी तो लोकतंत्र आएगा। उनके इन बयानों के बीच चुनाव आयोग, विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच चल रही राजनीतिक बहस भी चर्चा में रही।
राजभर ने बदल दिया PDA का मतलब
अखिलेश यादव के बयान के बाद ओम प्रकाश राजभर ने सपा के PDA फॉर्मूले पर निशाना साधा। राजभर ने तंज कसते हुए PDA की नई व्याख्या करते हुए इसे 'परिवार, दौलतमंद और अपराधी' बताया।
राजभर के मुताबिक, P से परिवार में प्रोफेसर रामगोपाल यादव और D से दौलतमंद के तौर पर धनराज नथवानी आ गए हैं। उन्होंने कहा कि अब अगर तीसरे उम्मीदवार के तौर पर किसी अपराधी को उम्मीदवार बनाया जाता है तो उनका बताया हुआ PDA पूरा हो जाएगा।
यह टिप्पणी उस समय आई है जब सपा की ओर से रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया जा चुका है। नथवानी कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े हैं और रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। उनके पिता परिमल नाथवानी झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।
राजभर ने पूछा- PDA में पंडित, पिछड़ा, दलित और मुसलमान कहां?
राजभर यहीं नहीं रुके। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सपा PDA की राजनीति की बात करती है तो उसमें ब्राह्मण, पिछड़ा, दलित और मुसलमान कहां हैं।
उन्होंने खास तौर पर 'P से पंडित' को लेकर सवाल खड़ा किया और कहा कि एक पंडित को भी राज्यसभा भेजा जा सकता था। राजभर का तर्क था कि जिस सामाजिक समीकरण की बात सपा करती है, राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में उसका प्रतिबिंब दिखाई नहीं दे रहा है।
PDA का मूल राजनीतिक अर्थ सपा की ओर से 'पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक' के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। पिछले कुछ समय में विरोधी दलों और नेताओं ने इसी संक्षिप्त रूप को अलग-अलग अर्थों में इस्तेमाल कर सपा पर राजनीतिक हमला किया है।
मुस्लिम नेताओं को लेकर भी राजभर का सवाल
ओम प्रकाश राजभर ने सपा के मुस्लिम नेताओं को भी अपने बयान में निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल किया कि सपा में मौजूद मुस्लिम सांसद, विधायक और नेता अखिलेश यादव से राज्यसभा टिकट को लेकर सवाल क्यों नहीं करते।
राजभर के मुताबिक, इन नेताओं को यह सवाल उठाना चाहिए था कि रामगोपाल यादव उनके वोट के समर्थन से राज्यसभा जाते हैं और सपा के विधायक भी उन्हीं सामाजिक समूहों के समर्थन से चुनाव जीतते हैं, इसलिए राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का दावा उनका भी होना चाहिए।
हालांकि, ये राजभर की राजनीतिक टिप्पणी और दावा है। इसे सपा या उसके संबंधित नेताओं की आधिकारिक प्रतिक्रिया के रूप में नहीं देखा जा सकता।
डिंपल यादव के निर्विरोध चुनाव पर भी सवाल
राजभर ने मैनपुरी सांसद डिंपल यादव के निर्विरोध चुनाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि कन्नौज-मैनपुरी से जुड़ी सीट पर डिंपल यादव निर्विरोध कैसे चुनी गईं।
राजभर ने आरोप लगाया कि पर्चा भरने वाले लोगों पर दबाव बनाया गया और जबरदस्ती नामांकन वापस कराया गया, जिसके बाद डिंपल यादव निर्विरोध चुनी गईं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
यही वजह है कि राजभर के इस बयान को फिलहाल राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। संबंधित चुनाव प्रक्रिया और नामांकन से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड ही इन दावों की पुष्टि या खंडन कर सकते हैं।
राज्यसभा चुनाव ने बढ़ाई सियासी गर्मी
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव ने पहले ही सियासी समीकरणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सपा ने अपने दो उम्मीदवारों के तौर पर रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी को मैदान में उतारा है, जबकि तीसरे उम्मीदवार को लेकर अटकलें जारी हैं। एक राज्यसभा सीट के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत बताई जा रही है।
ऐसे में उम्मीदवारों के चयन से लेकर सामाजिक समीकरण और INDIA ब्लॉक की राजनीति तक, हर मुद्दा विपक्षी दलों के बीच बहस का हिस्सा बन रहा है।
फिलहाल अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर के बीच यह ताजा जुबानी जंग केवल दो नेताओं के बयानों तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में राज्यसभा चुनाव, सपा का PDA सामाजिक समीकरण, उम्मीदवारों का चयन, INDIA ब्लॉक और चुनाव आयोग को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं।
अब देखना यह है कि इस सियासी तकरार का अगला जवाब किस तरफ से आता है और राज्यसभा चुनाव के बीच यूपी की राजनीति में यह बयानबाजी आगे किस मोड़ पर पहुंचती है।
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