उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ है। करीब 3.53 लाख आबादी प्रभावित है। 17,544 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 4,847 लोग बाढ़ शरणालयों में रह रहे हैं। चित्रकूट और गाजीपुर में बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में नदियों का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़ का असर जारी है और करीब 3.53 लाख आबादी इससे प्रभावित बताई जा रही है। हालात पर शासन स्तर से लगातार नजर रखी जा रही है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासनिक अमला राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि 4,847 लोग बाढ़ शरणालयों में रह रहे हैं।

प्रदेश में कुल 1,312 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। राहत और बचाव के लिए 1,634 बाढ़ चौकियां, 1,697 नाव-मोटरबोट और 1,068 मेडिकल टीमें सक्रिय हैं।
बाढ़ से प्रभावित चित्रकूट में प्रशासन ने राहत अभियान तेज कर दिया है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर 29 अगस्त को 135.20 मीटर के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था। अब जलस्तर घटकर 128.00 मीटर पर आ गया है।
जलस्तर में कमी जरूर आई है, लेकिन प्रशासन ने निगरानी में कोई ढिलाई नहीं बरती है। अब तक 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। राहत की बात यह है कि जिले में अभी तक किसी तरह की जन या पशुहानि की सूचना नहीं है।
रेस्क्यू अभियान के लिए NDRF के 30 सदस्य और SDRF की दो टीमों के 27 सदस्य तैनात हैं। स्थानीय प्रशासन की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं।

मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से कर्वी के रामघाट समेत 19 गांव, राजापुर के 7 गांव और मानिकपुर के 10 गांव प्रभावित हुए। यानी कुल 36 गांवों के 13,906 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
इन लोगों तक प्रशासन की ओर से भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई गई हैं।
तत्काल भोजन की व्यवस्था के तहत कर्वी में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 लंच पैकेट बांटे गए। इस तरह कुल 28,803 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।
इसके अलावा प्रभावित परिवारों को जरूरी सामान देने के लिए 2,065 राहत किट बांटी गई हैं। इनमें कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 राहत किट शामिल हैं।
चित्रकूट में प्रभावित लोगों के लिए 18 बाढ़ शरणालय भी क्रियाशील हैं।
बाढ़ के कारण चित्रकूट में अब तक 653 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से 188 मामलों में 7.52 लाख रुपये की सहायता राशि लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है।
वहीं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए एक मकान के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता दी गई है। बाकी मामलों में भुगतान की प्रक्रिया जारी है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन अलर्ट है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और जरूरी दवाओं के साथ तैनात हैं। ये टीमें लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ दवाओं का वितरण कर रही हैं। फसल को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे भी कराया जा रहा है।

बाढ़ के बीच गाजीपुर से रेस्क्यू की एक अहम तस्वीर सामने आई। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण डूहिया सरैया के पास नदी के एक टापू पर 12 चरवाहे और दो हजार से अधिक भेड़ें फंस गई थीं।
सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने करीब छह घंटे तक अभियान चलाकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।
इस रेस्क्यू में नाइट विजन ड्रोन की मदद से फंसे लोगों और भेड़ों की लोकेशन चिन्हित की गई। देर रात सूचना मिलने के बाद संयुक्त टीम ददरी घाट पहुंची।
इसके बाद फ्लड कंपनी PAC, पुलिस, प्रशासनिक टीम और स्थानीय नाविकों ने मिलकर रेस्क्यू अभियान चलाया। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 72,897 बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट और 3,67,551 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।
पशुओं के लिए 5 हजार क्विंटल से अधिक भूसा उपलब्ध कराया गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5.52 लाख से ज्यादा क्लोरीन टैबलेट और 1.87 लाख से अधिक ORS पैकेट बांटे गए हैं।

बाढ़ से प्रदेश में 45 हजार से अधिक पशु प्रभावित हुए हैं, हालांकि अब तक किसी पशु की मृत्यु की सूचना नहीं है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता यही है कि पानी से घिरे हर गांव और हर प्रभावित परिवार तक राहत पहुंचाई जाए और किसी तरह की जनहानि न हो।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी में बाढ़ का असर दर्ज किया गया है।
फिलहाल राहत और बचाव का अभियान लगातार जारी है। नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है और प्रशासन को प्रभावित इलाकों में हर जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थिति में सुधार के संकेत जरूर मिल रहे हैं, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में जलस्तर और मौसम की स्थिति पर सबकी नजर रहेगी।
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