उत्तर प्रदेश STF की साइबर टीम ने सोशल मीडिया पर विदेशी नागरिकों की फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय युवक-युवतियों को प्रेमजाल में फंसाने वाले एक नाइजीरियन गिरोह के सदस्य को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी महंगे गिफ्ट, डॉलर-पाउंड भेजने और भारत आने का झांसा देकर बाद में कस्टम ड्यूटी, इनकम टैक्स और जीएसटी के नाम पर ठगी करता था। लखनऊ के एक युवक से इसी नेटवर्क ने करीब ₹68 लाख की ठगी की थी। आरोपी के पास से 11 मोबाइल फोन, पासपोर्ट, चार एटीएम कार्ड, लैपटॉप और 34 अहम स्क्रीनशॉट बरामद किए गए हैं।
सोशल मीडिया पर शुरू हुई एक दोस्ती, विदेशी नागरिक का नाम, महंगे तोहफों का वादा और फिर अचानक एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों के नाम से फोन—यह कहानी सुनने में भले ही किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगे, लेकिन उत्तर प्रदेश STF की जांच में सामने आया साइबर ठगी का एक नेटवर्क इसी तरीके से लोगों को अपना शिकार बना रहा था।
Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर नाइजीरियन गिरोह के सदस्य अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाते थे। इन प्रोफाइल के जरिए भारतीय युवक-युवतियों से दोस्ती की जाती, कई मामलों में भावनात्मक या प्रेम संबंध जैसा भरोसा पैदा किया जाता और फिर महंगे गिफ्ट, डॉलर या पाउंड भेजकर भारत आने का झांसा दिया जाता।
इसके बाद शुरू होता था ठगी का असली खेल।
पीड़ित को बताया जाता कि विदेशी व्यक्ति का कीमती सामान, डॉलर या पाउंड एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों ने पकड़ लिया है। फिर कथित कस्टम अधिकारी, इनकम टैक्स अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी बनकर फोन किया जाता और कहा जाता कि सामान छुड़ाने के लिए कस्टम ड्यूटी, इनकम टैक्स, जीएसटी या किसी अन्य शुल्क के नाम पर तत्काल पैसा जमा करना होगा।
घबराया हुआ पीड़ित धीरे-धीरे ठगों की मांग पूरी करता जाता और इसी प्रक्रिया में लाखों रुपये गंवा देता।
उत्तर प्रदेश STF ने अब इसी गिरोह के एक सदस्य को दिल्ली से गिरफ्तार किया है।
11 अगस्त को दिल्ली में हुई गिरफ्तारी
STF के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान NWOGU OBED OSINACHI, पुत्र ROWLAN MINOGU, निवासी Egbu Road, Okri, Imo State, Nigeria के रूप में हुई है। उसका वर्तमान ठिकाना श्री ललित भट्ट का मकान, ए ब्लॉक, गली नंबर 14, कमल बिहार, थाना बुराड़ी, दिल्ली बताया गया है।
आरोपी की उम्र 37 वर्ष है और उसकी शिक्षा हाईस्कूल तक है।
STF ने उसे 11 अगस्त 2026 को दोपहर 1:50 बजे दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी से पहले STF की साइबर टीम काफी समय से इस नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही थी।
लखनऊ की 68 लाख की ठगी से खुली बड़ी कड़ी
इस मामले की अहम कड़ी लखनऊ के डालीगंज निवासी एक युवक से जुड़ी है।
STF को जांच के दौरान जानकारी मिली कि पीड़ित से फेसबुक पर “डोरिस विलियम” के नाम से एक फर्जी प्रोफाइल बनाकर दोस्ती की गई थी। प्रोफाइल को इंग्लैंड की महिला के रूप में पेश किया गया।
धीरे-धीरे पीड़ित को भावनात्मक रूप से जोड़ा गया। इसके बाद उसे बताया गया कि महंगे गिफ्ट, डॉलर और पाउंड लेकर भारत आने की तैयारी की जा रही है।
फिर कहानी अचानक बदल गई।
पीड़ित को बताया गया कि एयरपोर्ट पर महंगे गिफ्ट और विदेशी मुद्रा पकड़ी गई है और इसे छुड़ाने के लिए कस्टम चार्ज, इनकम टैक्स और जीएसटी समेत विभिन्न भुगतान करने होंगे।
STF के अनुसार इस तरह अलग-अलग मदों में पीड़ित से करीब ₹68 लाख की ठगी की गई।
ठगी के दौरान उसे भरोसा दिलाने के लिए यूनाइटेड किंगडम, इंग्लैंड के नाम से फर्जी RBS सर्टिफिकेट भी भेजा गया।
इस मामले में पीड़ित ने थाना मदेयगंज, कमिश्नरेट लखनऊ में मुकदमा दर्ज कराया था। FIR में मु0अ0सं0 33/2026 दर्ज हुआ।
यही मामला बाद में STF की जांच में इस बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की महत्वपूर्ण कड़ी बना।
पहले भी दो आरोपी पकड़े जा चुके हैं
STF की साइबर टीम ने तकनीकी जानकारी और मुखबिर तंत्र के आधार पर इस गिरोह के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की थी।
इसी मामले से जुड़े UCHENWA को 15 मई 2026 को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।
इसके बाद OBASE PROSPER नामक आरोपी को 18 जुलाई 2026 को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।
इन कार्रवाइयों के बावजूद इस नेटवर्क का एक अन्य सदस्य NWOGU OBED OSINACHI वांछित चल रहा था।
उसकी तलाश में STF साइबर टीम लखनऊ से दिल्ली पहुंची और स्थानीय मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि आरोपी कमल बिहार, बुराड़ी इलाके में मौजूद है।
सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने छापेमारी की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी में मिले डिजिटल सबूत
आरोपी के कब्जे से STF ने कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय सामान बरामद किए हैं।
बरामदगी में शामिल हैं—
11 मोबाइल फोन,
1 पासपोर्ट,
4 एटीएम कार्ड,
1 लैपटॉप,
और मोबाइल फोन से मिले 34 महत्वपूर्ण वर्क स्क्रीनशॉट।
STF के अनुसार इन स्क्रीनशॉट में विदेशी महिलाओं के फोटो और वीडियो तथा ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल तैयार करने और कस्टम ऑफिसर बनकर लोगों को ठगने की गतिविधियों का पता चलता है।
अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा।
इस परीक्षण से जांच एजेंसियों को गिरोह के संपर्कों, चैट, सोशल मीडिया खातों, संभावित पीड़ितों और पैसों के लेनदेन से जुड़ी और जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पूछताछ में आरोपी ने क्या बताया?
STF के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह मूल रूप से नाइजीरिया का रहने वाला है और 2022 में बिजनेस वीजा पर भारत आया था।
उसका वीजा उसी वर्ष समाप्त हो गया था, लेकिन इसके बाद भी वह दिल्ली में अवैध रूप से रह रहा था।
आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि दिल्ली में रहने वाले उसके देश के कुछ अन्य युवकों ने उसे इस साइबर ठगी के तरीके के बारे में बताया।
इसके बाद गिरोह के सदस्य मिलकर Facebook और Instagram पर USA और UK के नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल तैयार करते थे।
इन फर्जी प्रोफाइल के जरिए भारतीय युवक-युवतियों से दोस्ती की जाती थी।
फिर बातचीत को इस स्तर तक पहुंचाया जाता कि पीड़ित सामने वाले व्यक्ति पर भरोसा करने लगे।
इसके बाद महंगे गिफ्ट, डॉलर और पाउंड भारत भेजने की कहानी शुरू की जाती।
एयरपोर्ट और कस्टम अधिकारी वाला सबसे बड़ा जाल
गिरोह का कथित तरीका यहीं खत्म नहीं होता था।
पीड़ित को बताया जाता था कि विदेशी व्यक्ति का गिफ्ट या विदेशी मुद्रा भारत पहुंच गई है, लेकिन एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने उसे पकड़ लिया है।
इसके बाद आरोपी खुद को कस्टम अधिकारी या इनकम टैक्स अधिकारी बताते और कहते कि सामान में निर्धारित सीमा से अधिक नकदी या कीमती सामान है।
फिर उसे छुड़ाने के नाम पर कस्टम ड्यूटी, इनकम टैक्स या जीएसटी जमा कराने का दबाव बनाया जाता।
पीड़ित को लगातार यह विश्वास दिलाया जाता कि अगर उसने तुरंत पैसा नहीं जमा किया तो सामान जब्त हो जाएगा और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यहीं डर और भरोसे का इस्तेमाल करके पैसे की वसूली की जाती थी।
भारतीय बैंक खाते किराये पर लेने का भी खुलासा
जांच में सामने आया है कि गिरोह कथित तौर पर ठगी की रकम हासिल करने के लिए भारतीय नागरिकों के बैंक खाते किराये पर लेता था।
इस व्यवस्था के जरिए पैसे का सीधा संबंध आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता था और रकम अलग-अलग खातों के माध्यम से आगे भेजी जाती थी।
STF अब उन बैंक खातों और वॉलेट की जांच कर रही है जिनका इस्तेमाल इस नेटवर्क में हुआ हो सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के प्रयास भी जारी हैं।
पूरे भारत में फैला हो सकता है नेटवर्क
अब तक की जांच और खुफिया जानकारी से संकेत मिला है कि इस गिरोह ने सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि भारत के विभिन्न राज्यों में भी ठगी की हो सकती है।
यानी मामला एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से कहीं बड़ा हो सकता है।
STF अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि देश के किन-किन हिस्सों में इस गिरोह ने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम की ठगी की गई।
इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह को फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के लिए विदेशी महिलाओं के फोटो और वीडियो कहां से मिलते थे और उनके पीछे कितने लोग काम कर रहे थे।
वीजा खत्म होने के बाद अवैध रूप से रहने का भी आरोप
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी का बिजनेस वीजा 2022 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन इसके बावजूद वह भारत में रह रहा था।
अब उसके भारत में रहने, पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल, संभावित सहयोगियों और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
यह पहलू भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर वीजा अवधि समाप्त होने के बाद वह लगातार दिल्ली में रह रहा था, तो उसे स्थानीय स्तर पर ठिकाना, आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं कौन उपलब्ध करा रहा था, यह भी जांच का विषय बन सकता है।
अब आगे की जांच में क्या सामने आएगा?
STF की जांच अब कई दिशाओं में आगे बढ़ रही है।
बरामद मोबाइल और लैपटॉप का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा। आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की जांच होगी। गिरोह के संभावित अन्य सदस्यों की पहचान की जाएगी और अलग-अलग राज्यों में इस नेटवर्क से जुड़ी शिकायतों का मिलान किया जाएगा।
लखनऊ के युवक से हुई ₹68 लाख की ठगी इस पूरे नेटवर्क की एक बड़ी कड़ी है, लेकिन एजेंसियों को आशंका है कि इसके अलावा और भी कई पीड़ित हो सकते हैं।
कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपी को थाना मदेयगंज, कमिश्नरेट लखनऊ के मु0अ0सं0 33/2026 में दाखिल किया गया है।
उसके खिलाफ धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) BNS और 66D IT Act के तहत कार्रवाई की जा रही है।
आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
सोशल मीडिया यूजर्स के लिए बड़ा सबक
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर किसी विदेशी नाम, आकर्षक तस्वीर या भावनात्मक बातचीत को देखकर तुरंत भरोसा करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
खासकर जब सामने वाला व्यक्ति कुछ दिनों की दोस्ती के बाद महंगे गिफ्ट, डॉलर या पाउंड भेजने की बात करे और फिर एयरपोर्ट, कस्टम, टैक्स या किसी अधिकारी के नाम पर पैसे मांगे, तो यह साइबर ठगी का बड़ा संकेत हो सकता है।
याद रखें—किसी विदेशी नागरिक से ऑनलाइन दोस्ती, महंगे गिफ्ट का वादा और अचानक कस्टम ड्यूटी या टैक्स के नाम पर भुगतान की मांग, एक खतरनाक साइबर फ्रॉड पैटर्न हो सकता है।
दिल्ली से हुई इस गिरफ्तारी ने फिलहाल एक आरोपी को कानून के सामने ला दिया है, लेकिन असली कहानी अभी बाकी है। 11 मोबाइल, एक लैपटॉप और 34 स्क्रीनशॉट में छिपे डिजिटल सबूत अब यह तय कर सकते हैं कि इस कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहुंच कितनी दूर तक है और कितने लोग इसकी जालसाजी का शिकार बने हैं।
जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आने की संभावना है।
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