उत्तर प्रदेश STF की नोएडा फील्ड यूनिट ने 24 अगस्त 2026 की रात ट्रॉनिका सिटी, लोनी, गाजियाबाद में कार्रवाई करते हुए बिहार के कथित अंतरराज्यीय गांजा तस्करी गिरोह ‘रौनक गैंग’ के सक्रिय सदस्य प्रिंस कुमार समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 23 पैकेट में करीब 150 किलोग्राम गांजा, जिसकी अनुमानित कीमत 37.50 लाख रुपये बताई गई है, और फर्जी नंबर प्लेट लगी दो सफेद कारें बरामद हुईं। पूछताछ में ओडिशा से बिहार के रास्ते दिल्ली-NCR और मेरठ तक गांजा पहुंचाने के नेटवर्क की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।
गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी इलाके में सोमवार रात एक ऐसी कार्रवाई हुई, जिसने दिल्ली-NCR में सक्रिय कथित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
समय था करीब रात 9 बजकर 24 मिनट।
जगह थी ट्रॉनिका सिटी, लोनी, गाजियाबाद।
उत्तर प्रदेश STF की नोएडा फील्ड यूनिट को सूचना मिली थी कि दिल्ली-NCR में संगठित तरीके से गांजे की तस्करी और बिक्री करने वाले गिरोह के सदस्य इलाके में मौजूद हैं।
इसके बाद STF ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की और पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
तलाशी में जो बरामद हुआ, उसने कार्रवाई को और गंभीर बना दिया।
23 पैकेट में करीब 150 किलोग्राम गांजा।
पुलिस के मुताबिक इसकी अनुमानित कीमत करीब 37 लाख 50 हजार रुपये है।
इसके अलावा आरोपियों के कब्जे से फर्जी नंबर प्लेट लगी दो सफेद कारें भी बरामद की गईं। इनमें एक स्विफ्ट डिजायर और दूसरी हुंडई ऑरा बताई गई है।
लेकिन असली कहानी बरामदगी के बाद शुरू हुई।

STF के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
1. प्रिंस कुमार पुत्र रामजी प्रसाद, निवासी रामपुर डेयरा, थाना मनेर, पटना, बिहार; वर्तमान पता नासरी गंज, थाना राजीव नगर, दानापुर, पटना।
2. आशीष कुमार पुत्र मनोज शाह, निवासी बीहियां, भोजपुर, बिहार।
3. सोनू कुमार पुत्र स्वर्गीय सुरेन्द्र प्रसाद, निवासी रामपहर, थाना बढ़ाया, भोजपुर, बिहार।
4. राजा कुमार पुत्र अनुल साहनी, निवासी इस्लामगंज, थाना मनेर, पटना, बिहार।
5. रोहित कुमार पुत्र शिवाधर राय, निवासी दूधमा, थाना मुफसिल, भोजपुर, बिहार।
STF के अनुसार इन सभी को 24 अगस्त की रात ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
उत्तर प्रदेश STF को NCR क्षेत्र में संगठित तरीके से चरस, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों के सक्रिय होने की सूचनाएं मिल रही थीं।
इसी आधार पर STF की अलग-अलग टीमों को अभिसूचना जुटाने और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
पूरे अभियान की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक राज कुमार मिश्रा, STF फील्ड यूनिट नोएडा के पर्यवेक्षण में की गई।
वहीं पुलिस उपाधीक्षक नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई। कार्रवाई में STF फील्ड यूनिट नोएडा के उप निरीक्षक केशव शांडिल्य और उनकी टीम शामिल रही।
सूचना विकसित होने के बाद टीम को पता चला कि कथित अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य ट्रॉनिका सिटी, लोनी में मौजूद हैं।
इसके बाद स्थानीय पुलिस के सहयोग से घेराबंदी कर कार्रवाई की गई।

पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी प्रिंस ने STF को कथित तौर पर बताया कि वह मूल रूप से मनेर, पटना का रहने वाला है और करीब दो साल से गांजे की तस्करी और बिक्री में शामिल है।
उसके अनुसार, फरवरी 2026 में वह रौनक नाम के व्यक्ति के संपर्क में आया।
इसके बाद ओडिशा से गांजा लाकर उसकी सप्लाई और बिक्री शुरू करने की बात उसने पूछताछ में बताई।
STF के मुताबिक आरोपी ने बताया कि गांजा ओडिशा के फुलवानी, सम्बलपुर और कटक से लिया जाता था।
इसके बाद इसे बिहार के रास्ते दिल्ली-NCR और मेरठ तक पहुंचाया जाता था।
यानी कथित नेटवर्क का रास्ता कई राज्यों से होकर गुजरता था।
तस्करी का तरीका भी बताया
पूछताछ में आरोपी ने तस्करी का एक खास तरीका इस्तेमाल करने की बात बताई।
STF के मुताबिक, आरोपी ने बताया कि वे लोग गांजा लेकर दो अलग-अलग गाड़ियों में चलते थे।
दोनों गाड़ियों में माल थोड़ा-थोड़ा रखा जाता था।
दोनों वाहन एक-दूसरे से कुछ दूरी बनाकर आगे-पीछे चलते थे।
इसके पीछे कथित रणनीति यह थी कि अगर एक गाड़ी पुलिस की पकड़ में आ जाए तो दूसरी गाड़ी माल लेकर निकल सके।
यानी तस्करी के दौरान जोखिम को कम करने के लिए दो वाहनों का इस्तेमाल किया जाता था।
इस मामले में बरामद दोनों गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट लगी होने की बात भी पुलिस ने कही है।
महीने में 7-8 बार दिल्ली-NCR सप्लाई का दावा
पूछताछ में प्रिंस ने कथित तौर पर बताया कि दिल्ली-NCR में गांजा सोनू उर्फ रोहित नाम के व्यक्ति के माध्यम से बेचा जाता था।
STF के अनुसार, इस काम के लिए आरोपियों को एक बार में करीब 30 से 40 हजार रुपये मिलते थे।
इतना ही नहीं, आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वे लोग महीने में कम से कम 7 से 8 बार दिल्ली-NCR में गांजे की सप्लाई करते थे।
अगर पूछताछ में सामने आई यह जानकारी जांच में पुष्ट होती है, तो इससे दिल्ली-NCR तक मादक पदार्थों की नियमित सप्लाई के एक बड़े नेटवर्क की तस्वीर सामने आ सकती है।
कौन है कथित गैंग सरगना?
STF के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी प्रिंस ने खुद को बिहार के कथित ‘रौनक गैंग’ का सदस्य बताया।
उसने गैंग के सरगना के तौर पर रोशन कुमार सिंह, निवासी जैतपुर, लखीसराय, बिहार का नाम बताया है।
STF के अनुसार, रोशन कुमार सिंह कथित तौर पर अंतरराज्यीय गांजा तस्करी नेटवर्क चलाता है।
बताया गया है कि इस कथित नेटवर्क का विस्तार बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक होने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका क्या है और कथित सरगना सहित अन्य संदिग्धों की वास्तविक भूमिका क्या है, यह आगे की जांच का विषय है।
37.50 लाख का गांजा और दो कारें बरामद
इस कार्रवाई में STF ने कुल—
-
23 पैकेट गांजा
-
करीब 150 किलोग्राम वजन
-
अनुमानित कीमत करीब 37.50 लाख रुपये
-
फर्जी नंबर प्लेट लगी दो सफेद कारें
-
एक स्विफ्ट डिजायर
-
एक हुंडई ऑरा
बरामद करने की जानकारी दी है।
इतनी बड़ी मात्रा में गांजे की बरामदगी से यह भी सवाल उठ रहा है कि इस खेप को कहां पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।
इन सवालों का जवाब आगे की पुलिस जांच में सामने आ सकता है।
किस मामले में दर्ज हुआ मुकदमा?
गिरफ्तार आरोपियों को थाना ट्रॉनिका सिटी, कमिश्नरेट गाजियाबाद में दर्ज मुकदमा संख्या 314/26 में दाखिल किया गया है।
पुलिस के अनुसार मुकदमे में धारा 8/20बी(2) सी तथा 318(4)/345(3) बीएनएस के तहत कार्रवाई की गई है।
आगे की वैधानिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
STF ने यह भी बताया है कि गिरफ्तार आरोपियों की अन्य गतिविधियों और उनके नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।
अब जांच की अगली कड़ी क्या होगी?
इस कार्रवाई के बाद जांच का दायरा सिर्फ गिरफ्तार पांच लोगों तक सीमित नहीं रहने वाला है।
पुलिस के सामने अब कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—
ओडिशा से गांजा कौन उपलब्ध कराता था?
बिहार में इसकी सप्लाई चेन किसके जरिए चलती थी?
दिल्ली-NCR और मेरठ में गांजा किन लोगों तक पहुंचाया जाता था?
सोनू उर्फ रोहित की भूमिका क्या थी?
कथित सरगना रोशन कुमार सिंह का नेटवर्क कितना बड़ा है?
फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या गिरफ्तार पांच लोगों के अलावा इस नेटवर्क में और भी लोग सक्रिय हैं?
STF और स्थानीय पुलिस की आगे की जांच इन सवालों के जवाब तलाशेगी।
गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी में हुई यह कार्रवाई केवल 150 किलो गांजा बरामद होने की घटना नहीं है। STF के अनुसार पूछताछ में सामने आई जानकारी ने ओडिशा से बिहार होते हुए दिल्ली-NCR और मेरठ तक कथित गांजा सप्लाई के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क की ओर इशारा किया है।
फिलहाल पांच आरोपी गिरफ्तार हैं, 23 पैकेट गांजा और दो फर्जी नंबर प्लेट वाली कारें बरामद हुई हैं।
लेकिन कहानी का सबसे अहम हिस्सा अभी जांच के बाकी चरणों में छिपा है।
क्या यह पूरा नेटवर्क सिर्फ इन पांच आरोपियों तक सीमित है, या इसके पीछे और बड़े नाम और ठिकाने हैं?
अब STF और गाजियाबाद पुलिस की जांच इसी सवाल का जवाब तलाशने में जुटी है।
COMMENTS