उत्तर प्रदेश STF ने प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से जुड़े एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह Rolexpanel.win वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी संचालित करता था। आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, टैबलेट, 13 से अधिक मोबाइल फोन, बड़ी संख्या में सिम कार्ड, QR कोड, बैंकिंग कार्ड, आधार कार्ड, रजिस्टर और 23 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
इंटरनेट की दुनिया में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी का कारोबार लगातार नए तरीकों से फैल रहा है। मोबाइल फोन और डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल ने जहां लेनदेन को आसान बनाया है, वहीं इसी तकनीक का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश STF ने ऐसे ही एक कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।
11 अगस्त 2026 को STF उत्तर प्रदेश ने बताया कि प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में कूटरचित दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर Rolexpanel.win वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी संचालित करने वाले संगठित गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।
यह कार्रवाई STF की प्रयागराज फील्ड यूनिट ने की।
मुर्गी फार्म के पास से हुई गिरफ्तारी
STF के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों को 10 अगस्त 2026 की रात करीब 10 बजे प्रयागराज के मेजा थाना क्षेत्र में ग्राम मिश्रपुर स्थित बृजेश कुमार सिंह उर्फ टीटू के मुर्गी फार्म के पूर्वी हिस्से से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान—
बृजेश कुमार सिंह उर्फ टीटू, उम्र 26 वर्ष, निवासी ग्राम शम्भूचक, थाना मेजा, प्रयागराज,
अभिपेक कुमार, उम्र 20 वर्ष, निवासी दिलबहार कॉलोनी, थाना डीएलडब्ल्यू, वाराणसी,
प्रिन्स कुमार उर्फ गौतम, उम्र 20 वर्ष, निवासी ग्राम उरूवा, थाना मेजा, प्रयागराज,
और
मितेश प्रधान, उम्र 26 वर्ष, निवासी गौटिया पारा तरड़ा, थाना कुसौर, जनपद रायगढ़, छत्तीसगढ़,
के रूप में हुई है।
लैपटॉप-मोबाइल से लेकर QR कोड तक, क्या-क्या मिला?
STF की कार्रवाई में बरामद सामान की सूची काफी लंबी है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, एक टैबलेट और कई स्मार्ट मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।
इसके अलावा—
- 24 पैक्ड सिम कार्ड
- 4 खुले हुए सिम कार्ड
- कागज की पर्चियों में लिपटे 5 सिम कार्ड
- 10 UPI QR कोड स्टीकर
- स्टैंड सहित एक QR कोड
- 5 QR कोड साउंड बॉक्स
- 13 डेबिट/क्रेडिट कार्ड
- 3 आधार कार्ड
- एक ऑप्टिकल फिंगर स्कैनर
- एक जियो एयर फाइबर सेट
- 3 रजिस्टर
- 23 हजार रुपये नकद
भी बरामद किए गए।
STF के अनुसार ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से संबंधित 32 पन्नों के स्क्रीनशॉट भी मिले हैं।
बरामदगी में पांच अतिरिक्त स्मार्ट मोबाइल फोन का भी उल्लेख किया गया है। इससे जांच एजेंसियों को कथित ऑनलाइन लेनदेन और डिजिटल गतिविधियों की कड़ियां खंगालने में मदद मिल सकती है।
ऐसे चलता था कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी का खेल
STF के अनुसार पूछताछ में मुख्य आरोपी बृजेश कुमार सिंह उर्फ टीटू ने बताया कि वह ग्राम मिश्रपुर में मकान बनाकर परिवार के साथ रहता है। वहीं उसने मुर्गी फार्म भी बनवाया था।
हालांकि पुलिस के मुताबिक मुर्गी पालन के बजाय वह अपने साथियों के साथ मिलकर Rolexpanel.win के माध्यम से ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी का काम कर रहा था।
पुलिस का दावा है कि गिरोह बड़ी संख्या में सिम कार्ड खरीदता था और कथित तौर पर दूसरे लोगों के दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए कागजात का इस्तेमाल कर इन्हें सक्रिय करता था।
इसके बाद इन सिम कार्ड के माध्यम से Airtel Payment Bank में खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों से UPI ID और MPIN तैयार कर ऑनलाइन लेनदेन किया जाता था।
जब किसी मोबाइल नंबर से अत्यधिक लेनदेन होने के कारण वह नंबर ब्लॉक या बंद हो जाता था, तो कथित तौर पर गिरोह दूसरा सिम सक्रिय कर देता था।
एक खाते में पैसा नहीं, कई खातों में होता था लेनदेन
STF के मुताबिक गिरोह ऑनलाइन सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को सीधे अपने खातों में मंगाने से बचता था।
आरोपियों के कथित तरीके के अनुसार अलग-अलग मोबाइल फोन का इस्तेमाल अलग-अलग खातों के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता था।
किसी लेनदेन के सफल होने के बाद उसका स्क्रीनशॉट संबंधित ऑनलाइन गेमिंग एडमिन चेकर के व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजे जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई है।
STF के अनुसार यदि ऑनलाइन गेम वेबसाइट के अकाउंट पर कुछ समय तक गतिविधि दिखाई नहीं देती थी, तो मुख्य एडमिन चेकर को संदेह हो जाता था। इसके बाद लॉगिन अकाउंट को लॉगआउट या सस्पेंड करने और संबंधित व्हाट्सऐप ग्रुप को डिलीट करने की कार्रवाई किए जाने की बात आरोपियों ने बताई।
गेम ऑफ चांस के जरिए कमाई का आरोप
पुलिस के अनुसार आरोपी Rolexpanel पर गेम ऑफ चांस श्रेणी के गेम के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी करते थे।
पूछताछ में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से कमाई गई रकम को आरोपी आपस में बांट लेते थे। कुछ रकम कथित तौर पर व्यक्तिगत जरूरतों और खर्च के लिए अलग रखी जाती थी।
STF के अनुसार आरोपी ऑनलाइन गेमिंग के जरिए सट्टेबाजी करने वाले लोगों के साथ धोखाधड़ी कर धन अर्जित करने की बात भी सामने आई है।
इन आरोपों की पुष्टि अब आगे की कानूनी जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के परीक्षण से होगी।
सूचना से गिरफ्तारी तक कैसे पहुंची STF?
STF को लगातार ऐसी सूचनाएं मिल रही थीं कि संगठित गिरोह ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग की वेबसाइट बनाकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अवैध गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
इसी के तहत STF की अलग-अलग टीमों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
प्रयागराज में यह अभियान पुलिस उपाधीक्षक शैलेश प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण में और निरीक्षक जय प्रकाश राय के नेतृत्व में चलाया गया।
टीम ने स्थानीय अभिसूचना तंत्र को सक्रिय किया और तकनीकी माध्यमों से मिली जानकारी का विश्लेषण किया।
इसके बाद 10 अगस्त को कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
मामला दर्ज, आगे की जांच जारी
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ थाना कोतवाली मेजा, प्रयागराज में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
पुलिस के अनुसार मु0अ0सं0 421/2026 में धारा 3(5), 61(2), 112(2), 318(4), 319(2), 336(3) BNS तथा धारा 66C और 66D IT Act के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है।
फिलहाल स्थानीय पुलिस द्वारा अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
अब जांच की अगली कड़ी क्या होगी?
चार गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं।
Rolexpanel.win से कथित तौर पर कितने लोग जुड़े थे?
इन सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल किन-किन लोगों के नाम पर हुआ?
कितनी रकम का ऑनलाइन लेनदेन किया गया?
बरामद 13 से अधिक मोबाइल फोन में कौन-कौन से डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं?
32 पन्नों के स्क्रीनशॉट किन गतिविधियों से जुड़े हैं?
और क्या इस नेटवर्क के पीछे सिर्फ प्रयागराज में बैठे ये चार लोग थे या इसके तार दूसरे जिलों और राज्यों तक भी फैले हुए हैं?
इन सभी सवालों का जवाब आगे की जांच में सामने आ सकता है।
फिलहाल STF की कार्रवाई ने प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में चल रहे कथित ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा कसा है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सिम कार्ड, QR कोड, बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल स्क्रीनशॉट की बरामदगी इस मामले को और गंभीर बनाती है।
अब जांच का फोकस सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे डिजिटल और वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर होगा।
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