उत्तर प्रदेश STF ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बाराबंकी के हैदरगढ़ क्षेत्र में 260 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई गई है। STF ने मामले में अयोध्या निवासी दो अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। गांजे की खेप उड़ीसा से ट्रक के जरिए लखनऊ भेजी जा रही थी। पुलिस पूछताछ में 50 हजार रुपये के बदले गांजा लखनऊ पहुंचाने की बात सामने आई है।
नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ उत्तर प्रदेश STF को बड़ी सफलता मिली है। STF ने बाराबंकी के हैदरगढ़ इलाके में एक ऐसे कथित अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो ट्रक के जरिए उड़ीसा से गांजे की खेप उत्तर प्रदेश ला रहा था। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए 260 किलोग्राम गांजा बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई गई है।
मामले में STF ने दो कथित अंतरराज्यीय तस्करों विकास कुमार और सिकंदर अली को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से गांजे के अलावा एक ट्रक, दो मोबाइल फोन, एक आधार कार्ड और एक पैन कार्ड भी बरामद किया गया है।
लेकिन इस कार्रवाई की सबसे अहम बात यह है कि जिस ट्रक से गांजा लाया जा रहा था, उसमें ऊपर से सामान्य माल की आवाजाही दिखाई जा रही थी। पूछताछ में सामने आया कि इसी ट्रक के जरिए गांजे की खेप लखनऊ पहुंचाई जानी थी।
6 अगस्त को अयोध्या से निकला था ट्रक, उड़ीसा पहुंचकर बदला खेल
STF के अनुसार गिरफ्तार आरोपी विकास कुमार पुत्र राम फेर, निवासी ग्राम नजीरपुर मसौदा, थाना पूराकलंदर, जनपद अयोध्या, ने पूछताछ में पूरी यात्रा के बारे में जानकारी दी।
विकास ने बताया कि वह 6 अगस्त 2026 को अयोध्या से उड़ीसा के बोध के लिए रवाना हुआ था।
वहां पहुंचने के बाद ट्रक में गोरखपुर के लिए मसाला और चावल लोड किया गया।
यहीं से कथित तौर पर कहानी में नया मोड़ आया।
पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान गिरोह से जुड़े मुकेश कुमार और सूरज नाम के लोग विकास से मिले। आरोप है कि सूरज ने उसे गांजा लखनऊ पहुंचाने के बदले 50 हजार रुपये देने की बात तय की।
इसके बाद ट्रक में कथित तौर पर गांजे की खेप लोड की गई और विकास उड़ीसा से लखनऊ के लिए रवाना हो गया।
STF को मिली थी गुप्त सूचना, रास्ते में घेराबंदी
STF उत्तर प्रदेश को पिछले काफी समय से मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों के सक्रिय होने की सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद STF की विभिन्न इकाइयों और टीमों को लगातार अभिसूचना जुटाने और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
इसी क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक STF लखनऊ अमित कुमार नागर के पर्यवेक्षण में सूचना संकलन का काम चल रहा था।
STF मुख्यालय की एक टीम में उपनिरीक्षक राजेश मौर्य, उपनिरीक्षक अशोक गुप्ता, मुख्य आरक्षी रूद्र नारायण उपाध्याय, मुख्य आरक्षी कौशलेन्द्र प्रताप सिंह, रवि वर्मा और मुख्य आरक्षी चालक नेपाल सिंह शामिल थे।
टीम बाराबंकी में भ्रमणशील थी।
इसी दौरान STF को सूचना मिली कि उड़ीसा के बोध से ट्रक संख्या UP 42 CT 7522 में अवैध गांजे की खेप छिपाकर लखनऊ भेजी जा रही है।
सूचना मिलते ही टीम सक्रिय हो गई।
हैदरगढ़-बछरावां रोड पर रोका गया ट्रक
STF ने NDPS एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए समीर सिंह, क्षेत्राधिकारी हैदरगढ़, जनपद बाराबंकी को साथ लिया।
इसके बाद संदिग्ध ट्रक की तलाश शुरू की गई।
ट्रक नंबर था—
UP 42 CT 7522
तलाशी के दौरान पुलिस को ट्रक से बड़ी मात्रा में अवैध गांजा बरामद हुआ।
इसके बाद ट्रक में मौजूद दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी 13 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 58 मिनट पर हैदरगढ़-बछरावां रोड स्थित चीनी मिल नहर पुलिया मोड़ से बारा टोल जाने वाले रास्ते पर की गई।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
STF के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
1. विकास कुमार पुत्र राम फेर
निवासी ग्राम नजीरपुर मसौदा, थाना पूराकलंदर, जनपद अयोध्या।
2. सिकंदर अली पुत्र अबरार
निवासी ग्राम धन्नीपुर बुधौलिया, थाना रौनाही, जनपद अयोध्या।
दोनों को कथित अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से जुड़ा बताया गया है।

STF की कार्रवाई में कुल—
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260 किलोग्राम गांजा
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ट्रक संख्या UP 42 CT 7522
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2 मोबाइल फोन
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1 आधार कार्ड
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1 पैन कार्ड
बरामद किए गए हैं।
बरामद गांजे की अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई गई है।
पूछताछ में विकास के कथित बयान ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
उसने STF को बताया कि उसे गांजे की खेप लखनऊ पहुंचाने के एवज में 50 हजार रुपये मिलने थे।
पुलिस के मुताबिक उड़ीसा में उससे संपर्क करने वाले मुकेश कुमार और सूरज ने गांजा लखनऊ पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की थी।
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
मुकेश कुमार और सूरज कौन हैं?
गांजा उड़ीसा में किससे लिया गया था?
लखनऊ में इसे किसके हवाले किया जाना था?
और 260 किलो गांजे की इस खेप के पीछे आखिर कितने लोग जुड़े हुए हैं?
लखनऊ पहुंचने से पहले ही STF ने रोक दिया कथित नेटवर्क
अगर STF को मिली सूचना समय पर कार्रवाई में नहीं बदलती, तो संभव था कि गांजे की यह खेप लखनऊ पहुंच जाती और वहां से आगे अलग-अलग जगहों पर सप्लाई की जाती।
लेकिन हैदरगढ़ में हुई इस कार्रवाई ने कथित नेटवर्क की एक बड़ी खेप को रास्ते में ही रोक दिया।
अब जांच सिर्फ गिरफ्तार दोनों आरोपियों तक सीमित नहीं है।
पुलिस उन लोगों की तलाश में भी जुट सकती है, जिन्होंने गांजे की व्यवस्था की, ट्रक में उसे लोड कराया और लखनऊ में उसकी डिलीवरी तय की थी।
NDPS Act के तहत मुकदमा दर्ज
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ थाना हैदरगढ़, जनपद बाराबंकी में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मामले में मु0अ0सं0 271/2026 के तहत धारा 8/20/29/60 NDPS Act में अभियोग पंजीकृत किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों को संबंधित थाने में दाखिल कर दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई थाना स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
अब जांच का फोकस सप्लायर और लखनऊ कनेक्शन पर
STF की इस कार्रवाई में 260 किलो गांजे की बरामदगी निश्चित तौर पर बड़ी सफलता मानी जा रही है, लेकिन इस केस की असली तस्वीर आगे की जांच में सामने आएगी।
क्योंकि सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि ट्रक में 260 किलो गांजा किसके पास मिला?
सवाल यह भी है कि—
गांजा आया कहां से?
किसने ट्रक में छिपाया?
लखनऊ में किसे सप्लाई होना था?
मुकेश और सूरज की भूमिका क्या है?
और क्या इस नेटवर्क में उड़ीसा से लेकर उत्तर प्रदेश तक और भी लोग शामिल हैं?
फिलहाल STF ने एक बड़ी खेप और दो कथित तस्करों को पकड़कर नेटवर्क की एक कड़ी जरूर तोड़ी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आगे की जांच इस कथित अंतरराज्यीय तस्करी के कितने चेहरों को बेनकाब करती है।
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