लक्ष्मी नगर में पिता को पिस्टल दिखाकर लूटा, 24 घंटे में पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
राजधानी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों की बुनियाद को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। यहां 10 लाख रुपये की लूट की वारदात को अंजाम देने वाला कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि पीड़ित का अपना ही बेटा निकला। इस सनसनीखेज मामले का खुलासा दिल्ली पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर कर दिया।
31 मार्च को हुई थी वारदात
यह घटना 31 मार्च 2026 की है, जब पुलिस को एक PCR कॉल के जरिए सूचना मिली कि लक्ष्मी नगर इलाके में दो अज्ञात हमलावरों ने चेहरे ढककर गोलीबारी करते हुए 10 लाख रुपये लूट लिए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और लक्ष्मी नगर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।
वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया, जिसे हर पहलू से मामले की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
200 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले
जांच टीम ने तेजी से काम करते हुए इलाके के 200 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन डेटा और स्थानीय मुखबिरों से मिली जानकारी को भी जांच में शामिल किया गया।
लगातार जांच के दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध सुराग मिले, जिन्होंने पूरे मामले को एक अलग दिशा में मोड़ दिया। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक ऐसा खुलासा हुआ जिसने सभी को हैरान कर दिया।
बेटा ही निकला मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरी लूट की साजिश का मास्टरमाइंड खुद पीड़ित का बेटा तवलीन उर्फ राहत था। यह खुलासा होते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे मुखर्जी नगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया, जब वह भागने की कोशिश कर रहा था।
पूछताछ के दौरान तवलीन ने अपने दो साथियों के नाम बताए—मोहित कुमार तिवारी और पंकज। उसने खुलासा किया कि वारदात के बाद दोनों आरोपी आनंद विहार से बस पकड़कर बिहार भागने की कोशिश कर रहे थे।

लखनऊ टोल प्लाजा पर पकड़े गए साथी
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत बस का पीछा किया और उत्तर प्रदेश के लखनऊ टोल प्लाजा पर बस को रोककर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस त्वरित कार्रवाई ने पुलिस की मुस्तैदी को एक बार फिर साबित किया।
तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पुलिस ने आगे की पूछताछ शुरू की, जिसमें कई अहम खुलासे हुए।
पहले से बनाई गई थी पूरी योजना
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इस लूट की पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी। मोहित कुमार तिवारी ने बिहार के मुंगेर से करीब 45 हजार रुपये में पिस्टल खरीदी थी। वारदात के दौरान तवलीन स्कूटी चला रहा था, जबकि मोहित पीछे बैठकर गोली चला रहा था। पंकज भी इस पूरी साजिश में बराबर का भागीदार था।
तीनों ने चेहरे ढककर वारदात को अंजाम दिया, ताकि उनकी पहचान न हो सके।
बरामद हुई लूटी गई रकम और स्कूटी
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई पूरी रकम बरामद कर ली है। इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल की गई सफेद रंग की एक्टिवा स्कूटी भी जब्त कर ली गई है।
हालांकि, पुलिस अभी भी घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार की तलाश में जुटी हुई है और उसके जल्द बरामद होने की संभावना जताई जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि तीनों आरोपियों का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। मुख्य आरोपी तवलीन अपने पिता के प्रिंटिंग व्यवसाय में हाथ बंटाता था, जबकि उसके दोनों साथी बेरोजगार थे।
पुलिस के अनुसार, जल्दी पैसा कमाने और आलीशान जिंदगी जीने की चाहत ने इन युवकों को इस अपराध की ओर धकेल दिया।
रिश्तों पर सवाल
यह मामला केवल एक लूट की वारदात नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों के टूटते भरोसे की भी एक भयावह तस्वीर पेश करता है। जिस बेटे पर पिता ने भरोसा किया, उसी ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।
दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक, सतर्कता और टीमवर्क के दम पर बड़े से बड़े अपराध को भी कम समय में सुलझाया जा सकता है। 24 घंटे के भीतर मामले का खुलासा और आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ जारी है, ताकि इस घटना से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सके।
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