लखनऊ के मोहनलालगंज में एलडीए ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ ग्रीन सिटी समेत पांच कथित अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाया। प्राधिकरण के मुताबिक करीब 70 बीघे में बिना स्वीकृत ले-आउट के प्लाटिंग की जा रही थी। न्यायालय के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद प्रवर्तन जोन-2 की टीम ने कार्रवाई की।
राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके में गुरुवार को अचानक उस वक्त हलचल बढ़ गई, जब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की प्रवर्तन टीम ने एक साथ पांच कथित अवैध प्लाटिंग स्थलों पर बुलडोजर चला दिया। कार्रवाई की जद में चर्चित लखनऊ ग्रीन सिटी भी आई। एलडीए के मुताबिक, करीब 70 बीघा क्षेत्रफल में बिना स्वीकृत ले-आउट के प्लाटिंग की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान मौके पर किए गए अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया।
यह कार्रवाई एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर प्रवर्तन जोन-2 की टीम ने की। प्राधिकरण की इस कार्रवाई ने उन लोगों के लिए भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जो बिना प्राधिकरण की मंजूरी के विकसित की जा रही कॉलोनियों और प्लॉटिंग में निवेश कर रहे हैं।
मोहनलालगंज के मऊ और अतरौली में चला अभियान
एलडीए के प्रवर्तन जोन-2 के जोनल अधिकारी देवांश त्रिवेदी के अनुसार, गुरुवार को मोहनलालगंज क्षेत्र के ग्राम मऊ और अतरौली में विशेष अभियान चलाया गया। टीम ने यहां अलग-अलग स्थानों पर की जा रही पांच अवैध प्लाटिंग के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
प्राधिकरण के मुताबिक, इन प्लाटिंग से जुड़े लोगों में प्रवीण त्रिपाठी, अमित सिंह (लखनऊ ग्रीन सिटी), अरुण कुमार, कैप्टन अशोक सिंह, हरेंद्र सिंह, एस.के. त्रिपाठी समेत अन्य लोग शामिल हैं।
एलडीए का कहना है कि इन लोगों द्वारा लगभग 70 बीघा क्षेत्रफल में प्लाटिंग की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद ऐसे निर्माणों को भी ध्वस्त किया गया, जिन्हें प्राधिकरण ने अनधिकृत माना था।
आखिर क्यों हुई कार्रवाई?
इस पूरी कार्रवाई का सबसे अहम पहलू यह है कि एलडीए के अनुसार संबंधित प्लाटिंग के लिए प्राधिकरण से ले-आउट स्वीकृत नहीं कराया गया था। यानी जिस जमीन पर प्लॉट काटकर कॉलोनी विकसित करने का काम किया जा रहा था, उसके लिए निर्धारित विकास योजना की मंजूरी प्राधिकरण से नहीं ली गई थी।
ले-आउट स्वीकृति का उद्देश्य केवल नक्शा पास करना नहीं होता, बल्कि प्रस्तावित कॉलोनी में सड़क, रास्ते, पार्क, जल निकासी, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का नियोजन भी इसी प्रक्रिया से जुड़ा होता है। ऐसे में बिना स्वीकृत ले-आउट के विकसित की जा रही प्लाटिंग भविष्य में खरीदारों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
हालांकि, किसी प्लॉट या निर्माण को लेकर अंतिम वैधानिक स्थिति संबंधित अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी के आदेशों पर निर्भर करती है। इस मामले में एलडीए ने अपनी कार्रवाई को न्यायालयीय आदेश से जुड़ा बताया है।

एलडीए के जोनल अधिकारी देवांश त्रिवेदी के मुताबिक, इन सभी मामलों में विहित न्यायालय में वाद योजित किए गए थे। सुनवाई के बाद न्यायालय द्वारा संबंधित अवैध प्लाटिंग के खिलाफ ध्वस्तीकरण के आदेश पारित किए गए।
इन्हीं आदेशों के अनुपालन में गुरुवार को प्रवर्तन जोन-2 की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। इस तरह यह कार्रवाई केवल मौके पर अचानक लिया गया फैसला नहीं थी, बल्कि एलडीए के अनुसार इसके पीछे पहले से चली न्यायिक प्रक्रिया और पारित ध्वस्तीकरण आदेश मौजूद थे।
लखनऊ ग्रीन सिटी भी कार्रवाई की चपेट में
इस अभियान का एक प्रमुख नाम लखनऊ ग्रीन सिटी रहा। एलडीए की ओर से दी गई जानकारी में अमित सिंह का नाम लखनऊ ग्रीन सिटी से जोड़ा गया है। प्राधिकरण के मुताबिक यह भी उन पांच प्लाटिंग स्थलों में शामिल थी, जिन्हें बिना स्वीकृत ले-आउट के विकसित किए जाने का आरोप था।
बुलडोजर कार्रवाई के बाद सवाल यह भी उठता है कि आखिर इतने बड़े क्षेत्रफल में प्लाटिंग का काम शुरू होने से पहले संबंधित प्राधिकरण की स्वीकृति क्यों नहीं ली गई और यदि जमीन पर निर्माण एवं प्लॉट विकसित किए जा रहे थे तो इसकी निगरानी किस स्तर पर हुई।
खरीदारों के लिए भी बड़ा संदेश
एलडीए की इस कार्रवाई को केवल अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इसका सीधा संबंध उन लोगों से भी है, जो सस्ती जमीन या बेहतर कॉलोनी के नाम पर प्लॉट खरीदने का फैसला लेते हैं।
अक्सर प्लॉट खरीदते समय लोग केवल जमीन की कीमत, सड़क और लोकेशन देखते हैं, लेकिन यह जांचना भी जरूरी है कि संबंधित ले-आउट सक्षम प्राधिकरण से स्वीकृत है या नहीं। बिना स्वीकृत ले-आउट वाली कॉलोनी में निवेश करने से भविष्य में निर्माण अनुमति, सड़क, जल निकासी, बिजली, सीवर और अन्य नागरिक सुविधाओं को लेकर दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
अब आगे क्या?
गुरुवार की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एलडीए की प्रवर्तन कार्रवाई केवल इन पांच स्थानों तक सीमित रहेगी या मोहनलालगंज और आसपास के इलाकों में चल रही अन्य कथित अनधिकृत प्लाटिंग भी जांच के दायरे में आएगी।
करीब 70 बीघा क्षेत्रफल से जुड़े इस अभियान ने यह जरूर स्पष्ट किया है कि एलडीए अब बिना स्वीकृत ले-आउट के विकसित की जा रही प्लाटिंग के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता अपना रहा है। फिलहाल प्राधिकरण की ओर से जिन पांच स्थलों पर कार्रवाई की गई है, वहां मौजूद अनधिकृत निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया है।
राजधानी में जमीन और प्लॉटिंग से जुड़े मामलों में यह कार्रवाई उन लोगों के लिए चेतावनी भी है, जो नियमों की अनदेखी कर कॉलोनी विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं संभावित खरीदारों के लिए भी संदेश साफ है—प्लॉट खरीदने से पहले कागज और ले-आउट की वैधता जांचना जरूरी है, वरना निवेश के बाद बुलडोजर की कार्रवाई का जोखिम बना रह सकता है।
COMMENTS