बरसात के दौरान सेक्टर-150 से 162 तक जलभराव की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। नोएडा प्राधिकरण ने 31.39 करोड़ रुपये की ड्रेनेज परियोजना को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत बरसाती पानी को हिंडन नदी तक पहुंचाने के लिए नया आरसीसी नाला और रेगुलेटर बनाया जाएगा। प्राधिकरण का दावा है कि इससे जलभराव, पेड़ों को नुकसान और जलजनित बीमारियों की समस्या में कमी आएगी।
हर साल मानसून के दौरान सेक्टर-150 से 162 तक जलभराव की समस्या स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। एक्सप्रेस-वे के समानांतर ग्रीन बेल्ट, आंतरिक नालों और कई स्थानों पर पानी भरने से न केवल लोगों का आवागमन प्रभावित होता है, बल्कि पेड़ों को नुकसान पहुंचता है और जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। अब इस लंबे समय से चली आ रही समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है।
नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-10 के अंतर्गत सेक्टर-150 से 162 तक बरसाती पानी की समुचित निकासी की परियोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब 31.39 करोड़ रुपये (₹3139.65 लाख) खर्च किए जाएंगे। परियोजना का उद्देश्य मानसून के दौरान होने वाले जलभराव को रोकना और पूरे क्षेत्र की ड्रेनेज व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
क्या है पूरी परियोजना?
प्राधिकरण के अनुसार, सेक्टर-150 से 162 तक जमा होने वाले बरसाती पानी को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे के समानांतर बने मुख्य नाले के माध्यम से हिंडन नदी में प्रवाहित किया जाएगा।
इसके लिए सेक्टर-150 स्थित एटीएस प्रिस्टीन सोसाइटी के सामने पुस्ता रोड पर एक रेगुलेटर बनाया जाएगा। साथ ही डूब क्षेत्र में मजबूत आरसीसी (Reinforced Cement Concrete) नाले का निर्माण किया जाएगा, जिससे भारी वर्षा के दौरान भी पानी का बहाव बाधित न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती है तो सेक्टर-150, 151, 152, 153, 154, 155, 156, 157, 158, 159, 160, 161 और 162 के निवासियों को हर वर्ष होने वाली जलभराव की समस्या से काफी राहत मिल सकती है।
क्यों जरूरी थी यह योजना?
पिछले कुछ वर्षों में सेक्टर-150 और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हाईराइज सोसाइटियों का निर्माण हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ-साथ वर्षा जल निकासी की मौजूदा व्यवस्था पर दबाव भी बढ़ा है।
बरसात के दौरान कई स्थानों पर पानी लंबे समय तक जमा रहने से—
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ग्रीन बेल्ट में लगे पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंचता है।
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आंतरिक नालों में पानी भरने से दुर्गंध और गंदगी फैलती है।
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सोसाइटियों के आसपास जलभराव के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है।
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मच्छरों के पनपने से डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए प्राधिकरण ने विस्तृत तकनीकी अध्ययन के बाद इस परियोजना को तैयार किया है।
नोएडा प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के बीच हुआ एमओयू
इस परियोजना को लागू करने के लिए नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के बीच एमओयू (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
एमओयू के तहत परियोजना का निर्माण कार्य सिंचाई विभाग द्वारा कराया जाएगा, जबकि वित्तीय सहयोग नोएडा प्राधिकरण उपलब्ध कराएगा।
पहली किस्त पहले ही जारी
परियोजना की कुल लागत ₹3139.65 लाख निर्धारित की गई है।
समझौते के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण ने 27 मई 2026 को परियोजना की पहली किस्त के रूप में ₹1098.88 लाख (35 प्रतिशत राशि) उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को जारी कर दी है।
इससे स्पष्ट है कि परियोजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए वित्तीय प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है।
अब क्या है वर्तमान स्थिति?
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्राधिकरण के अनुसार निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। यदि कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा होता है तो आगामी वर्षों में इस क्षेत्र की ड्रेनेज व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।
क्या वास्तव में खत्म होगी जलभराव की समस्या?
यह परियोजना निश्चित रूप से राहत की बड़ी उम्मीद लेकर आई है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण सवाल अभी भी बने हुए हैं—
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क्या निर्माण कार्य समय पर पूरा होगा?
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क्या परियोजना की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी रखी जाएगी?
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क्या भविष्य की आबादी और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर इसकी क्षमता तय की गई है?
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क्या बरसात से पहले कार्य पूरा कर लोगों को राहत मिल पाएगी?
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क्या अन्य जलभराव प्रभावित सेक्टरों के लिए भी इसी तरह की स्थायी योजनाएं बनाई जाएंगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में परियोजना की प्रगति तय करेगी।
राहत की उम्मीद, लेकिन निगरानी भी जरूरी
नोएडा में जलभराव केवल असुविधा का विषय नहीं, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण और शहरी नियोजन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। सेक्टर-150 से 162 तक की यह नई ड्रेनेज परियोजना यदि समय पर और निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी होती है, तो यह भविष्य में नोएडा के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। फिलहाल स्थानीय निवासी इस योजना को राहत की उम्मीद के रूप में देख रहे हैं, लेकिन उनकी निगाह अब निर्माण कार्य की गति और गुणवत्ता पर भी रहेगी।
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