नोएडा प्राधिकरण ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। महाप्रबंधक (सिविल) आर.पी. सिंह ने वर्क सर्किल-3 के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया, जिसके दौरान सेक्टर-50 और सेक्टर-51 के बीच निर्माणाधीन आरसीसी नाले तथा सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बीच बन रहे फुटओवर ब्रिज में इस्तेमाल की गई स्टील की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए। इसके बाद स्टील के नमूनों की जांच कराने, भुगतान रोकने और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश जारी किए गए हैं।
नोएडा प्राधिकरण ने शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में 6 अगस्त 2026 को प्राधिकरण के महाप्रबंधक (सिविल) आर.पी. सिंह ने वर्क सर्किल-3 के अंतर्गत आने वाले विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।
इस दौरान उनके साथ वर्क सर्किल-3 के वरिष्ठ प्रबंधक आर.के. शर्मा, तकनीकी ऑडिट सेल के वरिष्ठ प्रबंधक राजकमल सिंह और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान जिन परियोजनाओं की समीक्षा की गई, उनमें सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बीच बन रहा फुटओवर ब्रिज तथा सेक्टर-50 और सेक्टर-51 के बीच बन रहा आरसीसी नाला प्रमुख रूप से शामिल थे।
स्टील की गुणवत्ता पर उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि आरसीसी नाले के निर्माण कार्य में यूरोथर्म (टीएमटी स्टील) और सेल (एसएआईएल) स्टील का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, फुटओवर ब्रिज के निर्माण में भी सेल स्टील का उपयोग किया गया है।
इसके बाद महाप्रबंधक ने तकनीकी ऑडिट सेल को दोनों स्थानों से स्टील के नमूने एकत्र करने और उनकी गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए।
अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली, आईआईटी रुड़की या श्रीराम इंस्टीट्यूट जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से जांच कराई जाए, ताकि निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से गुणवत्ता का आकलन किया जा सके।

प्राधिकरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक और बड़ा फैसला लिया है। जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
अधिकारियों का मानना है कि जब तक निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पूरी तरह से मानकों के अनुरूप साबित नहीं हो जाती, तब तक भुगतान करना उचित नहीं होगा।
प्राधिकरण की इस कार्रवाई को निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दोषी पाए जाने पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि यदि गुणवत्ता परीक्षण के दौरान स्टील निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इतना ही नहीं, जिन अधिकारियों की निगरानी में ये कार्य कराए जा रहे थे, उनसे भी जवाब मांगा गया है।
तीन कार्यदिवसों के भीतर संबंधित प्रबंधकों को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अन्य सर्किलों को भी जारी किए गए निर्देश
प्राधिकरण ने इस मामले को केवल वर्क सर्किल-3 तक सीमित नहीं रखा है। वर्क सर्किल-1 से लेकर वर्क सर्किल-5 तक के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उनके अधिकार क्षेत्र में चल रहे सभी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की जा रही स्टील, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्रियों की नियमित जांच कराई जाए।

निर्देशों के अनुसार, आईआईटी, श्रीराम इंस्टीट्यूट या अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों से परीक्षण कराने के बाद ही निर्माण कार्यों से संबंधित भुगतान जारी किए जाएंगे।
लापरवाही मिलने पर तय होगी जवाबदेही
प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक और सहायक प्रबंधक की जवाबदेही तय की जाएगी।
इसके अलावा निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्यों अहम है यह कार्रवाई?
नोएडा तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है। यहां प्रतिदिन नई सड़कें, पुल, नाले और अन्य बुनियादी ढांचों का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
इसी वजह से प्राधिकरण अब किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता। अधिकारियों का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री का उपयोग न केवल परियोजनाओं की मजबूती सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं और आर्थिक नुकसान को भी रोकेगा।
फिलहाल सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि परीक्षण के नतीजे क्या सामने आते हैं और प्राधिकरण आगे क्या कदम उठाता है।
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