शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में राष्ट्रीय खेल दिवस और ‘मेरा युवा भारत’ पहल के तहत ‘खेलो इंडिया संवाद – खेल की बात PM के साथ’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। युवा खिलाड़ियों ने विद्यार्थियों से खेल और फिटनेस पर संवाद किया, पीएम मोदी के लाइव कार्यक्रम का प्रसारण हुआ और नशा मुक्ति जागरूकता के जरिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।
राष्ट्रीय खेल दिवस और ‘मेरा युवा भारत’ पहल के तहत ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय में युवाओं के बीच खेल, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर एक खास पहल देखने को मिली। विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की ओर से ‘खेलो इंडिया संवाद – खेल की बात PM के साथ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें खेलों से जुड़े युवा खिलाड़ियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया। कार्यक्रम का संदेश केवल मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नशे से दूरी और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की अपील तक पहुंचा।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह समझाने की कोशिश की गई कि खेल सिर्फ प्रतियोगिता में जीतने या पदक हासिल करने का माध्यम नहीं हैं। खेल व्यक्ति के भीतर अनुशासन, आत्मविश्वास, मानसिक मजबूती, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना जैसे गुण विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी सोच के साथ कार्यक्रम में युवाओं को नियमित रूप से खेल और फिटनेस गतिविधियों से जुड़ने का संकल्प दिलाया गया।
जब खिलाड़ियों ने बताया सफलता का असली मंत्र
कार्यक्रम में विभिन्न खेलों से जुड़े युवा खिलाड़ियों ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। रेसलिंग खिलाड़ी आर्यन ने खेल में अनुशासन, फिटनेस और मानसिक मजबूती की अहमियत पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि किसी भी खेल में आगे बढ़ने के लिए केवल शारीरिक क्षमता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि लगातार अभ्यास और मानसिक दृढ़ता भी जरूरी होती है।

वहीं, गौतम बुद्ध नगर की फुटबॉल खिलाड़ी समृद्धि त्रिपाठी ने खेल के दौरान टीमवर्क, नेतृत्व और आत्मविश्वास को सफलता के महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा। फुटबॉल जैसे टीम गेम में व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ-साथ पूरी टीम के साथ तालमेल और जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी होता है।
फेंसिंग खिलाड़ी प्रकृति शर्मा ने विद्यार्थियों से फोकस, लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास के महत्व पर बात की। उन्होंने खेल में सफलता के लिए धैर्य के साथ अभ्यास करते रहने को जरूरी बताया।
इन खिलाड़ियों के अनुभवों ने विद्यार्थियों को यह समझने का मौका दिया कि खेल की दुनिया में सफलता अचानक नहीं मिलती। इसके पीछे नियमित मेहनत, अनुशासन और खुद पर विश्वास की लंबी प्रक्रिया होती है।
PM मोदी का लाइव संवाद बना कार्यक्रम का अहम हिस्सा
कार्यक्रम के दौरान ‘खेल की बात PM के साथ’ के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाइव संवाद का प्रसारण भी किया गया। विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री का संवाद सुना, जिसमें युवाओं को खेलों से जुड़ने और फिटनेस को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रधानमंत्री के संदेश में खेल को केवल पदक जीतने की प्रतिस्पर्धा के तौर पर देखने के बजाय इसे व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया। खेलों के जरिए अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक सोच को मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों के लिए यह संवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि खेल और फिटनेस को लेकर युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ इसे दैनिक जीवन की आदत बनाने का संदेश दिया गया।
खिलाड़ियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान रेसलिंग खिलाड़ी आर्यन, फुटबॉल खिलाड़ी समृद्धि त्रिपाठी और फेंसिंग खिलाड़ी प्रकृति शर्मा को उनकी खेल उपलब्धियों और युवाओं को प्रेरित करने में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इन खिलाड़ियों का सम्मान केवल उनकी उपलब्धियों की सराहना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के सामने उन्हें प्रेरणास्रोत के रूप में भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले युवा अपने साथियों को भी स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू नशा मुक्ति जागरूकता सत्र भी रहा। इसमें विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई।
युवाओं को बताया गया कि नशे की आदत व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसकी पढ़ाई, करियर, परिवार और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर सकती है। इसके विकल्प के तौर पर विद्यार्थियों को खेल, फिटनेस और अन्य सकारात्मक गतिविधियों से जुड़े रहने का संदेश दिया गया।
यानी कार्यक्रम में एक तरफ युवाओं को मैदान की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया, तो दूसरी तरफ उन्हें उन आदतों से दूर रहने की अपील की गई जो उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं।
‘खेल केवल फिटनेस नहीं, व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम’
शारदा विश्वविद्यालय के डीन, स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि युवाओं के लिए खेल केवल शारीरिक फिटनेस का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये उन्हें अनुशासन, जिम्मेदारी और टीम के साथ काम करना भी सिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी क्षमता पहचानने और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देते हैं। उन्होंने नशे से दूर रहकर स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने को आज के युवाओं के लिए बेहद जरूरी बताया।
डॉ. प्रमोद कुमार ने यह भी कहा कि NSS के माध्यम से विद्यार्थियों को खेल और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी से जोड़ने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय परिवार की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रमुख, डीन, फैकल्टी सदस्य, स्टाफ और विद्यार्थी मौजूद रहे। NSS Cell की कोऑर्डिनेटर डॉ. शांति नारायण, डॉ. सुमन लता धर और स्पोर्ट्स ऑफिसर रिशांक अग्रवाल सहित विश्वविद्यालय के कई अधिकारी और सदस्य कार्यक्रम का हिस्सा बने।
कार्यक्रम के दौरान खेलों से जुड़े अनुभव, प्रधानमंत्री का लाइव संवाद, खिलाड़ियों का सम्मान और नशा मुक्ति जागरूकता—इन सभी पहलुओं ने इसे केवल एक औपचारिक आयोजन के बजाय युवाओं को सकारात्मक दिशा देने वाला मंच बना दिया।
दरअसल, आज के दौर में युवाओं के सामने पढ़ाई और करियर की चुनौतियों के साथ स्वस्थ रहने और सकारात्मक माहौल बनाए रखने की चुनौती भी है। ऐसे में शारदा विश्वविद्यालय का यह आयोजन एक स्पष्ट संदेश देता नजर आया—मैदान में उतरिए, फिट रहिए, अनुशासन अपनाइए और नशे जैसी बुरी आदतों से खुद को दूर रखिए।
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