राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने AIIMS नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन 2026 में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। सम्मेलन में GIMS के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने बड़े सरकारी अस्पतालों में रोगी सुरक्षा की चुनौतियों और तकनीक आधारित समाधान पर संस्थान का अनुभव साझा किया। वहीं सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के CEO डॉ. राहुल सिंह ने मेडिकल इनोवेशन सेंटर का मॉडल प्रस्तुत किया, जिसे राष्ट्रीय मंच पर विशेष चर्चा मिली।
स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक की चर्चा अक्सर AI, रोबोटिक्स और आधुनिक मशीनों तक सीमित रह जाती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या तकनीक वास्तव में मरीज की समस्या को आसान बना रही है? इसी सवाल को केंद्र में रखते हुए ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी GIMS ने राष्ट्रीय मंच पर अपने मेडिकल इनोवेशन मॉडल को प्रस्तुत किया।
सितंबर 2026 में AIIMS नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन में GIMS ने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। देशभर के प्रतिष्ठित एम्स और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ, चिकित्सक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि इस सम्मेलन में शामिल हुए।
सम्मेलन का फोकस रोगी सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के बीच बेहतर तालमेल पर रहा। इसी क्रम में “सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रौद्योगिकी एवं नवाचार: चिकित्सा उपकरणों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर क्लिनिकल इनोवेशन तक” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया।
GIMS निदेशक ने साझा किया सरकारी अस्पतालों का अनुभव
इस विशेष सत्र में GIMS ग्रेटर नोएडा के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता को विषय विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया।
उन्होंने उच्च रोगी भार वाले सरकारी अस्पतालों में रोगी सुरक्षा के सामने आने वाली चुनौतियों, बेहतर कार्यप्रणालियों और तकनीक एवं नवाचार की जरूरत पर GIMS का अनुभव साझा किया।
डॉ. राकेश गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि बड़े सरकारी अस्पतालों के लिए तकनीकी समाधान केवल अत्याधुनिक होना पर्याप्त नहीं है। ऐसे समाधान व्यावहारिक, किफायती, सुरक्षित और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले होने चाहिए।
यानी तकनीक का लक्ष्य सिर्फ अस्पताल को आधुनिक दिखाना नहीं, बल्कि मरीज की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता को वास्तविक रूप से बेहतर बनाना होना चाहिए।
मेडिकल इनोवेशन सेंटर ने खींचा राष्ट्रीय ध्यान
निदेशक की प्रस्तुति के बाद डॉ. राहुल सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI), GIMS ने संस्थान के मेडिकल इनोवेशन सेंटर पर केस प्रस्तुति दी।
इस प्रस्तुति में बताया गया कि GIMS का मेडिकल इनोवेशन सेंटर डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध करा रहा है।
इसका उद्देश्य अस्पताल में रोज सामने आने वाली वास्तविक चिकित्सा समस्याओं की पहचान करना और उनके लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करना है।
यही पहल सम्मेलन में चर्चा का प्रमुख विषय बनी। मेडिकल इनोवेशन सेंटर से जुड़ी कुछ तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन भी किया गया। इनका उद्देश्य रोगी देखभाल को बेहतर बनाना, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में मौजूद अंतर को कम करना और मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित, प्रभावी एवं सुलभ उपचार व्यवस्था विकसित करना है।

GIMS के मेडिकल इनोवेशन मॉडल की खासियत इसका “क्लिनिकल आवश्यकता से नवाचार और नवाचार से रोगी लाभ” वाला दृष्टिकोण है।
इसके तहत प्रक्रिया अस्पताल में मौजूद किसी वास्तविक समस्या की पहचान से शुरू होती है। इसके बाद उसके लिए तकनीकी समाधान तैयार करने, प्रोटोटाइप विकसित करने, नियामकीय मार्गदर्शन लेने, क्लिनिकल परीक्षण और सत्यापन से लेकर आगे उपयोग एवं व्यावसायीकरण तक की प्रक्रिया को एकीकृत करने का प्रयास किया जाता है।
इस मॉडल में नई तकनीक को केवल प्रयोगशाला या सैद्धांतिक स्तर पर विकसित करने के बजाय वास्तविक अस्पताल और क्लिनिकल वातावरण की जरूरतों के हिसाब से विकसित और परखने पर जोर है।
इससे ऐसे मेडिकल समाधान तैयार करने की संभावना बढ़ती है जो वास्तव में डॉक्टरों, अस्पतालों और मरीजों की जरूरतों से जुड़े हों।
AI से मेडिकल डिवाइस तक, कई क्षेत्रों पर फोकस
मेडिकल इनोवेशन सेंटर के माध्यम से मेडिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ और अन्य उभरती स्वास्थ्य तकनीकों को क्लिनिकल जरूरतों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
GIMS का लक्ष्य डॉक्टर, इंजीनियर, शोधकर्ता, स्टार्टअप और उद्योग को एक साझा मंच पर लाकर स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों के समाधान विकसित करना है।
दीर्घकालिक स्तर पर संस्थान का उद्देश्य भारत में विकसित तकनीकों को क्लिनिकल उपयोग तक पहुंचाना और मरीजों के लिए किफायती, सुलभ तथा सुरक्षित स्वास्थ्य समाधान तैयार करना है।
उत्तर प्रदेश के मेडिकल इनोवेशन को राष्ट्रीय मंच
राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन में GIMS की प्रस्तुति सिर्फ एक संस्थान की उपलब्धि के रूप में नहीं देखी जा रही, बल्कि इससे उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे मेडिकल इनोवेशन और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को भी राष्ट्रीय मंच मिला।
GIMS यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सरकारी मेडिकल संस्थान की भूमिका केवल मरीजों के इलाज, मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अस्पताल स्वयं ऐसी जगह बन सकता है जहां मरीजों की वास्तविक समस्याओं की पहचान हो, तकनीकी समाधान विकसित हों और फिर उन्हीं समाधानों को क्लिनिकल उपयोग तक पहुंचाया जाए।
अब असली परीक्षा मरीज तक पहुंचने की
AI और हेल्थटेक की चर्चा के बीच सबसे अहम सवाल यही रहता है कि नई तकनीक का फायदा आखिर मरीज तक कितनी जल्दी और कितनी आसानी से पहुंचेगा। GIMS का मेडिकल इनोवेशन मॉडल इसी अंतर को कम करने की दिशा में प्रयास करता दिखाई देता है।
राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन में संस्थान की सहभागिता ने रोगी सुरक्षा को मेडिकल इनोवेशन के साथ जोड़ने की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को सामने रखा। सम्मेलन से यह भी संदेश गया कि तकनीक तभी सार्थक है, जब वह अस्पताल की वास्तविक जरूरत को समझे और अंततः मरीज की सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाए।
GIMS का मूल संदेश भी इसी सोच पर आधारित है—क्लिनिकल आवश्यकता से नवाचार और नवाचार से बेहतर रोगी देखभाल। सुरक्षित, सुलभ, किफायती और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संस्थान इसी दिशा में लगातार काम करने की प्रतिबद्धता जता रहा है।
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