ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में इंटरनल स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (SIH) 2026 का सफल आयोजन किया गया। करीब 1,400 छात्रों और 244 से अधिक छह-सदस्यीय टीमों ने सामाजिक और तकनीकी समस्याओं के समाधान तैयार किए। दो दिनों की कड़ी जजिंग प्रक्रिया के बाद 50 टीमों का चयन राष्ट्रीय स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2026 के अगले चरण के लिए किया गया। चयनित टीमों में 23 हार्डवेयर, 22 सॉफ्टवेयर और 5 बैकअप टीमें शामिल हैं।
ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनल स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2026 ने शारदा यूनिवर्सिटी के छात्रों को सिर्फ प्रतियोगिता का मंच नहीं दिया, बल्कि उन्हें यह मौका भी दिया कि वे कक्षा में सीखे तकनीकी ज्ञान को जमीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान में इस्तेमाल कर सकें।
इस आयोजन में यूनिवर्सिटी के अलग-अलग स्कूलों के करीब 1,400 छात्रों ने हिस्सा लिया। छह प्रतिभागियों वाली 244 से अधिक टीमों ने अलग-अलग problem statements पर काम किया। इसके लिए छात्रों ने ब्रेनस्टॉर्मिंग, रिसर्च, कोडिंग, प्रोटोटाइपिंग, टीम वर्क और प्रेजेंटेशन जैसे कई चरणों से गुजरते हुए अपने आइडिया को समाधान में बदलने की कोशिश की।
यानी चुनौती सिर्फ एक आइडिया देने की नहीं थी। छात्रों को यह साबित करना था कि उनका समाधान व्यवहारिक है, उसे तकनीकी रूप से विकसित किया जा सकता है और भविष्य में उसका वास्तविक प्रभाव भी हो सकता है।
स्मार्ट ऑटोमेशन से लेकर स्पेस टेक्नोलॉजी तक
हैकाथॉन में समस्या-कथनों का दायरा भी काफी व्यापक रहा। छात्रों ने स्मार्ट ऑटोमेशन, आपदा प्रबंधन, मेडटेक, बायोटेक, हेल्थटेक, कृषि एवं ग्रामीण विकास, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में समाधान तैयार किए।
इसमें करीब 75 प्रतिशत प्रोजेक्ट सॉफ्टवेयर आधारित रहे। वहीं हार्डवेयर प्रोजेक्ट्स ने भी छात्रों की तकनीकी क्षमता और प्रोटोटाइप तैयार करने की क्षमता को सामने रखा।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अपने विचारों को लगातार बेहतर किया और जजिंग पैनल के सामने उनकी उपयोगिता, व्यवहार्यता और संभावित प्रभाव को प्रस्तुत किया। इससे उन्हें तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ समस्या की पहचान, टीम के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे और अपने समाधान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का व्यावहारिक अनुभव मिला।

हैकाथॉन की चयन प्रक्रिया भी आसान नहीं रही। पहले दिन 150 से अधिक जजों वाले 33 जजिंग पैनल ने प्रतिभागी टीमों का मूल्यांकन किया। इस प्रक्रिया के बाद 100 टीमों को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया।
दूसरे दिन मुकाबला और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया। शॉर्टलिस्ट की गई टीमों का मूल्यांकन दो अलग-अलग स्लॉट में किया गया। प्रत्येक स्लॉट में पांच जजिंग पैनल ने टीमों के प्रोजेक्ट और उनके समाधान का आकलन किया।
इस पूरी प्रक्रिया के बाद आखिरकार 50 टीमों का चयन राष्ट्रीय स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2026 में शारदा यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया गया।
इनमें 23 हार्डवेयर, 22 सॉफ्टवेयर और 5 बैकअप टीमें शामिल हैं।
कौन सी टीमें रहीं सबसे आगे?
हार्डवेयर श्रेणी में ZEIT v.1.0, EcoPlast Pioneers और ZEIT v.2.0 जैसी टीमों ने प्रमुख स्थान हासिल किया। वहीं सॉफ्टवेयर श्रेणी में Agentic Lab, BlueHorizon और TITANS प्रमुख टीमों में शामिल रहीं।
इन टीमों का चयन सिर्फ उनके आइडिया के आधार पर नहीं हुआ, बल्कि उनकी समस्या को समझने, समाधान की व्यवहारिकता, तकनीकी क्षमता और उसे प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया।
अब चुनी गई टीमें राष्ट्रीय स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के अगले चरणों में आगे बढ़ेंगी। ऐसे में यूनिवर्सिटी के भीतर शुरू हुई यह प्रतिस्पर्धा अब राष्ट्रीय स्तर के मंच तक पहुंचने की दिशा में बढ़ गई है।
VC ने कहा- युवाओं के उत्साह का प्रमाण है 1400 छात्रों की भागीदारी
शारदा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. सिबा राम खारा ने कहा कि 1,400 छात्रों की भागीदारी इनोवेशन और तकनीकी समाधान विकसित करने के प्रति युवाओं के उत्साह का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन ने छात्रों को असल दुनिया की चुनौतियों को समझने, उनके समाधान तैयार करने और राष्ट्रीय विकास में सार्थक योगदान देने की दिशा में अपने हुनर का इस्तेमाल करने का महत्वपूर्ण अवसर दिया।
वहीं डीन प्रो. (डॉ.) गीता गणेशन ने कहा कि SIH ने छात्रों को इनोवेशन की पूरी प्रक्रिया का अनुभव कराया। इसमें चुनौती की पहचान करने से लेकर विभिन्न विषयों के छात्रों के बीच सहयोग और सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक समाधान में बदलने तक की प्रक्रिया शामिल रही।
उन्होंने छात्रों को जिज्ञासा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास के साथ समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया।

हैकाथॉन की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल चयनित टीमों की सूची नहीं रही। इस पूरी प्रक्रिया ने छात्रों को टीमवर्क, नेतृत्व, समस्या विश्लेषण, समाधान तैयार करने, दृढ़ता और तकनीकी प्रेजेंटेशन जैसे कौशल विकसित करने का अवसर दिया।
इसी अनुभवात्मक शिक्षा के जरिए छात्रों को यह समझने का मौका मिला कि किसी तकनीकी समाधान को तैयार करने में सिर्फ कोड या मशीन पर्याप्त नहीं होती। उसके पीछे समस्या की सही पहचान, रिसर्च, टीमवर्क और समाधान के संभावित प्रभाव को समझना भी उतना ही जरूरी है।
कार्यक्रम में डीन डॉ. पल्लवी गुप्ता, एसोसिएट डीन प्रो. (डॉ.) सुदीप वार्ष्णेय, प्रो. (डॉ.) कृष्णन, डॉ. मोहित साहनी, डॉ. जयंत शेखर, डॉ. रजनीश कुमार सिंह, श्री आशीष कुमार, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. जितेंद्र सिंह, पवन, यशस्विनी, दीपक और सौरव समेत फैकल्टी सदस्य, अधिकारी, स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
SIH 2026 के आयोजन के साथ शारदा यूनिवर्सिटी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि विश्वविद्यालय की भूमिका केवल डिग्री और क्लासरूम तक सीमित नहीं है। असल चुनौती अब ऐसे युवाओं को तैयार करने की है, जो तकनीक को समझने के साथ उसका इस्तेमाल समाज और देश की वास्तविक समस्याओं को हल करने में कर सकें।
अब नजर उन 50 चयनित टीमों पर है, जो राष्ट्रीय स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के अगले चरण में शारदा यूनिवर्सिटी के इनोवेशन और तकनीकी प्रतिभा का प्रतिनिधित्व करेंगी।
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