शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज़ में आयोजित सत्र में दंत चिकित्सा के छात्रों को नए करियर अवसरों, AI और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बारे में जानकारी दी गई।
दंत चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों और नए करियर अवसरों को लेकर Sharda University के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज़ द्वारा एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया।
डेंटल एजुकेशन यूनिट के अंतर्गत एसएमएसआर में आयोजित इस सत्र का विषय था—
“डेंटिस्ट्री बियॉन्ड द क्लिनिक: करियर्स, सिस्टम्स एंड द फ्यूचर ऑफ प्रैक्टिस इन इंडिया”
इस कार्यक्रम में छात्रों और संकाय सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिसने इसे एक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक मंच बना दिया।
पारंपरिक क्लिनिक से आगे बढ़ने पर जोर
सत्र का मुख्य उद्देश्य दंत चिकित्सा के विद्यार्थियों और पेशेवरों को यह समझाना था कि अब यह क्षेत्र केवल क्लिनिकल प्रैक्टिस तक सीमित नहीं रहा है।
कार्यक्रम में बताया गया कि आज के समय में डेंटिस्ट्री में कई नए और उभरते करियर विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें शोध, कॉर्पोरेट हेल्थकेयर, पब्लिक हेल्थ, और हेल्थ मैनेजमेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

विशेषज्ञता और नॉन-क्लिनिकल अवसरों पर चर्चा
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित Dr. Vimal Arora ने बीडीएस के बाद उपलब्ध करियर विकल्पों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने विभिन्न स्पेशलाइजेशन, उच्च शिक्षा के अवसर और नॉन-क्लिनिकल भूमिकाओं जैसे हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन, रिसर्च और इंडस्ट्री आधारित जॉब्स पर भी प्रकाश डाला।
उनका कहना था कि आज के समय में एक डेंटल प्रोफेशनल को केवल क्लिनिकल स्किल्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
AI और डिजिटल तकनीक का बढ़ता प्रभाव
सत्र में आधुनिक दंत चिकित्सा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया।
डॉ. अरोड़ा ने बताया कि कैसे डिजिटल डायग्नोस्टिक्स, रोबोटिक असिस्टेड ट्रीटमेंट और डेटा-ड्रिवन हेल्थ सिस्टम्स भविष्य की डेंटल प्रैक्टिस को पूरी तरह बदल रहे हैं।
उन्होंने छात्रों को इन नई तकनीकों को अपनाने और खुद को अपडेट रखने की सलाह दी।

कॉर्पोरेट और संगठित दंत चिकित्सा का विस्तार
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कॉर्पोरेट सेक्टर में संगठित दंत चिकित्सा का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
आज बड़ी हेल्थकेयर कंपनियां और चेन क्लीनिक्स डेंटल सेवाओं को एक नए स्तर पर ले जा रही हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
सैन्य दंत चिकित्सा से सीख
डॉ. अरोड़ा ने अपने अनुभव साझा करते हुए सैन्य दंत चिकित्सा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि सेना में कार्य करने से न केवल पेशेवर दक्षता बढ़ती है, बल्कि नेतृत्व, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का भी विकास होता है।
ये गुण हर डेंटल प्रोफेशनल के लिए आवश्यक हैं।

डीन का दृष्टिकोण
Dr. Hemant Sahni, प्रोफेसर एवं डीन, स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज़ ने कहा कि यह सत्र छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी रहा।
उन्होंने बताया कि आज के समय में केवल क्लिनिकल स्किल्स पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि तकनीकी ज्ञान और नेतृत्व क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार, ऐसे कार्यक्रम छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं और उनके पेशेवर विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
व्यापक सहभागिता
इस सत्र में डॉ. आशीष, डॉ. भार्गव, डॉ. आयुष, डॉ. महिंदर, डॉ. रोहित, डॉ. पल्लवी सहित सभी विभागों के डीन, फैकल्टी मेंबर्स, स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विशेषज्ञों से अपने सवालों के जवाब भी प्राप्त किए।
शारदा विश्वविद्यालय में आयोजित यह सत्र केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दंत चिकित्सा के भविष्य की दिशा को समझने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
इसने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में डेंटिस्ट्री का क्षेत्र और अधिक व्यापक और तकनीकी रूप से उन्नत होने वाला है।
अब छात्रों के सामने चुनौती है—
क्या वे पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर इन नए अवसरों को अपनाने के लिए तैयार हैं?
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