चुनाव आयोग ने मीडिया एवं संचार अधिकारियों के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं, AI और डीपफेक के बढ़ते खतरे से निपटने की रणनीति तैयार की। सम्मेलन में 16 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 260 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया।
देश में डिजिटल माध्यमों के तेजी से बढ़ते प्रभाव और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी उद्देश्य से भारत निर्वाचन आयोग ने मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए दूसरे एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें देश के 16 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से आए 260 से अधिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
इस सम्मेलन में मीडिया नोडल अधिकारी (MNO), सोशल मीडिया नोडल अधिकारी (SMNO), विभिन्न जिलों के जिला मीडिया नोडल अधिकारी एवं जिला जनसंपर्क अधिकारी (DPRO) के साथ-साथ राज्यों के जनसंपर्क विभाग (DPR) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया के दौरान सही सूचना का प्रभावी प्रसार, फेक न्यूज़ पर नियंत्रण और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चुनाव आयोग की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करना था।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने पारदर्शिता और संविधान आधारित कार्यप्रणाली पर दिया जोर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग का प्रत्येक निर्णय और प्रत्येक कार्रवाई पूरी तरह भारत के संविधान, चुनावी कानूनों तथा समय-समय पर जारी लिखित दिशा-निर्देशों के अनुरूप और पूर्ण पारदर्शिता के साथ की जाती है।

उन्होंने अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि आज सोशल मीडिया पर कई बार तथ्यों से परे झूठे नैरेटिव और भ्रामक सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। ऐसे में मीडिया एवं संचार अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल सूचना जारी करना नहीं, बल्कि समय रहते सही तथ्यों के साथ सक्रिय संवाद स्थापित कर गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकना भी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी कहा कि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड स्तर का मतदान इस बात का प्रमाण है कि देश के मतदाताओं का भारतीय चुनाव प्रणाली पर गहरा विश्वास बना हुआ है।
सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने डिजिटल युग की नई चुनौतियों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीपफेक तकनीक, सिंथेटिक कंटेंट तथा जानबूझकर तैयार की जाने वाली भ्रामक सामग्री लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास करती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में मीडिया एवं संचार अधिकारियों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों को आयोग के नियमों, दिशा-निर्देशों और स्थापित प्रक्रियाओं के आधार पर हर प्रकार की भ्रामक सूचना का तथ्यात्मक और प्रभावी जवाब देना चाहिए।
डॉ. जोशी ने विशेष रूप से युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ELCs) के माध्यम से युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया, मतदान के महत्व और चुनावी व्यवस्था की सही जानकारी देना समय की आवश्यकता है।

सम्मेलन में चुनावी संचार रणनीति पर हुआ व्यापक मंथन
एक दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत चुनावी संचार रणनीति की विस्तृत प्रस्तुति के साथ हुई। इसमें चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों—मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान और मतगणना तक—संचार की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिभागियों को चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET, चुनाव से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों तथा मीडिया से संबंधित कानूनी पहलुओं की भी जानकारी दी गई।
सम्मेलन के दौरान कई व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें अधिकारियों को प्रेस नोट तैयार करने, मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं को प्रभावी ढंग से प्रसारित करने, फेक न्यूज़ एवं भ्रामक नैरेटिव का जवाब देने, युवा मतदाताओं से संवाद स्थापित करने तथा आयोग की विभिन्न पहलों को आम जनता तक पहुंचाने की रणनीतियों पर प्रशिक्षण दिया गया।
मतदाता सूची से मतगणना तक पूरी प्रक्रिया का कराया गया प्रदर्शन
सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि चुनावी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया।
अधिकारियों को समूहों में विभाजित कर मतदाता सूची तैयार करने, मतदान प्रक्रिया तथा मतगणना की संपूर्ण व्यवस्था का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिखाया गया। इसके बाद प्रतिभागियों को चुनाव आयोग द्वारा तैयार प्रदर्शनी (Exhibition) और मीडिया कॉर्नर का भी विस्तृत भ्रमण कराया गया, जिससे वे चुनावी प्रक्रियाओं को और बेहतर ढंग से समझ सकें।

हालिया चुनावों के अनुभवों से साझा हुई नई सीख
सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान भी था। जिन राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में हाल ही में चुनाव सम्पन्न हुए हैं, वहां के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और चुनावी संचार से जुड़ी सफल रणनीतियों तथा सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) की जानकारी अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ साझा की।
इससे भविष्य में चुनावी संचार व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में नई संभावनाओं पर चर्चा हुई।
प्रश्नोत्तर सत्र के साथ सम्मेलन का समापन
सम्मेलन के अंतिम चरण में चुनाव आयोग और प्रतिभागियों के बीच विस्तृत प्रश्नोत्तर (Q&A) सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विभिन्न राज्यों से आए अधिकारियों ने चुनावी संचार, सोशल मीडिया प्रबंधन, मीडिया समन्वय, फेक न्यूज़ नियंत्रण और डिजिटल चुनौतियों से जुड़े अनेक प्रश्न रखे, जिनका आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तार से उत्तर दिया।
डिजिटल दौर में चुनाव केवल मतदान तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि सूचना के सही और समयबद्ध प्रवाह की भी बड़ी जिम्मेदारी बन चुके हैं। ऐसे समय में निर्वाचन आयोग का यह सम्मेलन स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले चुनावों में केवल मतदान प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि सूचना की पारदर्शिता, फेक न्यूज़ पर नियंत्रण, AI और डीपफेक जैसी चुनौतियों से मुकाबला तथा मतदाताओं तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना भी आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
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