SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने AAP और कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल पहले EVM को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे और अब SIR को मुद्दा बनाकर संवैधानिक संस्था की छवि प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रेस वार्ता में उन्होंने अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी, आपातकाल और चुनाव आयोग के पूर्व प्रमुखों से जुड़े पुराने राजनीतिक विवादों का भी जिक्र किया।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर देश में चल रही राजनीतिक बहस के बीच Special Intensive Revision यानी SIR अब दिल्ली की सियासत में भी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने सोमवार को विपक्षी दलों, खासकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस, पर चुनाव आयोग की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
प्रवेश वाही ने यह बातें एक प्रेस वार्ता के दौरान कहीं। इस दौरान दिल्ली की उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत भी मौजूद रहीं, जबकि दिल्ली भाजपा मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर ने प्रेस वार्ता का संचालन किया।
महापौर ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल पहले EVM के जरिए चुनाव में कथित गड़बड़ी के सवाल उठाकर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते रहे और अब SIR को लेकर इसी तरह का अभियान चलाया जा रहा है।
“EVM के बाद अब SIR को बनाया जा रहा हथियार”
प्रवेश वाही ने दावा किया कि पिछले करीब 12 वर्षों में पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम से लेकर राज्य विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों को हार का सामना करना पड़ा और इसके बाद उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
उनके मुताबिक, पहले EVM हैकिंग के आरोपों के जरिए चुनाव आयोग की छवि पर सवाल उठाने की कोशिश की गई और अब SIR को मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास सफल नहीं होंगे।
हालांकि, ये प्रवेश वाही के राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग की ओर से SIR को मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के रूप में संचालित किया जा रहा है। आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर SIR 2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं, दस्तावेज जमा करने और नाम खोजने की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
केजरीवाल और राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
महापौर प्रवेश वाही ने आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना इन नेताओं की राजनीति का हिस्सा रहा है।
AAP पर निशाना साधते हुए वाही ने दिल्ली नगर निगम का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, तब दिल्ली नगर निगम के फंड रोककर उसकी कार्यप्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2022 में दिल्ली नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन इसके बाद करीब दो साल तक निगम का संवैधानिक गठन नहीं होने दिया गया। वाही ने इसे दिल्ली नगर निगम की स्वायत्तता को प्रभावित करने वाला कदम बताया।
ये दावे भी भाजपा नेता द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें विपक्ष की प्रतिक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस से पूछा- आपातकाल से बड़ा लोकतंत्र पर हमला क्या?
प्रवेश वाही और उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत ने संयुक्त बयान में कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस SIR को लोकतंत्र के लिए खतरा बता रही है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व को पहले देश में लगाए गए आपातकाल के दौर पर जवाब देना चाहिए।
महापौर ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि क्या उससे बड़ा लोकतंत्र पर कोई हमला हो सकता है।
यहां भी बयान को महापौर और भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।
शकधर, गिल और टी.एन. शेषन का जिक्र
प्रवेश वाही ने अपने बयान में चुनाव आयोग के इतिहास से जुड़े पुराने प्रसंग भी उठाए।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अपने कार्यकाल में चुनाव आयोग के पद पर बैठे अधिकारियों का राजनीतिक इस्तेमाल किया और बाद में कुछ अधिकारियों को बड़े पदों से नवाजा।
उन्होंने विशेष रूप से एस.एल. शकधर, एम.एस. गिल और टी.एन. शेषन का नाम लिया।
चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक एस.एल. शकधर 1977 से 1982 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे, जबकि टी.एन. शेषन ने दिसंबर 1990 से दिसंबर 1996 तक CEC के रूप में कार्य किया और उनके बाद एम.एस. गिल ने दिसंबर 1996 में पद संभाला।
टी.एन. शेषन के कार्यकाल में चुनाव आयोग की शक्तियों और उसकी संरचना को लेकर केंद्र सरकार के साथ गंभीर संस्थागत टकराव भी हुआ था। 1993 में एम.एस. गिल और जी.वी.जी. कृष्णमूर्ति को चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने के बाद शेषन ने इस व्यवस्था को चुनौती दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग की व्यवस्था को बरकरार रखा।
प्रवेश वाही ने इसी ऐतिहासिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी ने एक ओर कुछ चुनाव आयुक्तों को पद दिए, वहीं दूसरी ओर टी.एन. शेषन को दबाव में रखने की कोशिश की।
SIR पर आगे भी जारी रह सकता है राजनीतिक टकराव
SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस जारी है। चुनाव आयोग की मौजूदा प्रक्रिया में मतदाता सूची की जांच, दस्तावेजों से संबंधित प्रक्रिया और दावों-आपत्तियों के लिए व्यवस्थाएं निर्धारित की गई हैं।
दिल्ली के महापौर का सोमवार का बयान इसी बहस को राजनीतिक रंग देने वाला एक और घटनाक्रम है।
एक तरफ भाजपा नेता SIR को चुनावी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की कवायद के रूप में देख रहे हैं, तो विपक्षी दल इसके तौर-तरीकों और संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। फिलहाल दिल्ली में प्रवेश वाही के बयान ने इस बहस को एक बार फिर EVM, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, आपातकाल और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता जैसे पुराने और संवेदनशील मुद्दों से जोड़ दिया है।
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