गौतमबुद्धनगर पुलिस द्वारा संचालित 'ऑपरेशन अपराजेय (Operation Invictus)' के तहत दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के हितों की रक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं का लाभ घर-घर तक पहुंचाने के लिए पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह की अध्यक्षता में सेक्टर-108 स्थित पुलिस आयुक्त कार्यालय में महत्वपूर्ण अंतरविभागीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, NIEPID और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की।
विशेष आवश्यकता (Special Needs) वाले बच्चों, विशेष रूप से ऑटिज्म (Autism) और बौद्धिक दिव्यांगता (Intellectual Disability) से प्रभावित बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करने की दिशा में गौतमबुद्धनगर पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को पुलिस आयुक्त कार्यालय, सेक्टर-108 में पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह की अध्यक्षता में "ऑपरेशन अपराजेय (Operation Invictus)" के तहत एक उच्चस्तरीय अंतरविभागीय गोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस बैठक का उद्देश्य केवल प्रशासनिक समीक्षा करना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि जनपद का कोई भी दिव्यांग बच्चा सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास के अधिकार से वंचित न रहे। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर एक समन्वित एवं प्रभावी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।
9 जून से चल रहा है 'ऑपरेशन अपराजेय'
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में 9 जून 2026 से गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट में "ऑपरेशन अपराजेय (Operation Invictus)" संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों एवं उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं, आवश्यक सेवाओं और उनके कानूनी अधिकारों से जोड़ते हुए उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी वातावरण उपलब्ध कराना है।

पुलिस का मानना है कि दिव्यांग बच्चों का विकास केवल सरकारी सहायता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी से उन्हें आत्मनिर्भर और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
कई विभागों और संस्थाओं ने मिलकर बनाई रणनीति
बैठक में अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था), पुलिस उपायुक्त (महिला सुरक्षा), जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, NIEPID (National Institute for the Empowerment of Persons with Intellectual Disabilities) के सहायक प्राचार्य तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सभी विभागों ने आपसी समन्वय को और मजबूत बनाने तथा दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास के लिए साझा कार्ययोजना तैयार करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
ऑपरेशन अपराजेय की प्रगति की हुई समीक्षा
गोष्ठी के दौरान अभियान की अब तक की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। साथ ही भविष्य की कार्ययोजना को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में जनपद में दिव्यांग बच्चों की अनुमानित संख्या, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने की स्थिति, यूडीआईडी (Unique Disability ID - UDID) कार्ड की उपलब्धता तथा पात्र लाभार्थियों को दिव्यांग पेंशन योजना से जोड़ने की प्रगति की समीक्षा की गई।
इसके अलावा यह भी तय किया गया कि जिन बच्चों के पास अभी तक दिव्यांगता प्रमाण-पत्र या यूडीआईडी कार्ड नहीं है, उन्हें शीघ्र चिन्हित कर सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं और प्रारंभिक पहचान पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक में Early Diagnosis Programme तथा District Early Intervention Centre (DEIC) की सेवाओं को और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों ने माना कि यदि ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता या अन्य विकासात्मक समस्याओं की समय रहते पहचान हो जाए, तो बच्चों के पुनर्वास और उपचार की संभावनाएं काफी बेहतर हो जाती हैं।

इसी उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष चिकित्सा शिविर, दिव्यांगता प्रमाणन शिविर और स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
हर दिव्यांग बच्चे को मिले शिक्षा का अधिकार
बैठक में शिक्षा विभाग ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के विद्यालयों में नामांकन, समग्र शिक्षा अभियान, Inclusive Education तथा अन्य शैक्षणिक योजनाओं की प्रगति पर जानकारी दी।
इस दौरान यह भी चर्चा हुई कि ऐसे बच्चों को सामान्य शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए विद्यालयों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय विकसित किया जाए, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
सुरक्षा व्यवस्था को भी बनाया जाएगा और मजबूत
ऑपरेशन अपराजेय के तहत केवल सरकारी योजनाओं तक पहुंच ही नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
बैठक में Caregiver Verification, Beat Outreach Programme तथा Neighbourhood Security Scheme को और प्रभावी बनाने पर सहमति बनी।
इन योजनाओं के माध्यम से पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की देखभाल करने वाले व्यक्तियों का सत्यापन हो, बीट पुलिस नियमित रूप से ऐसे परिवारों के संपर्क में रहे और स्थानीय समुदाय भी उनकी सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाए।
RWAs और सामाजिक संस्थाओं की भी होगी भागीदारी
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs), विद्यालयों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
इस अभियान का उद्देश्य लोगों को ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता और अन्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के प्रति संवेदनशील बनाना तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना होगा।

सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे परिवारों तक पहुंचेगा
बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक पात्र परिवार तक केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचे।
इन योजनाओं में प्रमुख रूप से दिव्यांग पेंशन योजना, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, यूडीआईडी कार्ड, आयुष्मान भारत योजना, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK), समग्र शिक्षा, Inclusive Education तथा अन्य पुनर्वास एवं सशक्तिकरण योजनाएं शामिल हैं।
संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई पर जोर
गोष्ठी के अंत में सभी विभागों से अपेक्षा की गई कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों से जुड़े प्रत्येक मामले में पूरी संवेदनशीलता, आपसी समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने स्पष्ट किया कि "ऑपरेशन अपराजेय" केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के सम्मान, सुरक्षा, अधिकारों की रक्षा और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का एक जनकल्याणकारी मिशन है।
उन्होंने कहा कि गौतमबुद्धनगर पुलिस प्रत्येक दिव्यांग बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित विभागों, सामाजिक संस्थाओं और हितधारकों के साथ लगातार समन्वय स्थापित करते हुए इस अभियान को प्रभावी और सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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