ग्रेटर नोएडा के आईआईएलएम विश्वविद्यालय में पीएमएस स्कीम पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हुई, जिसमें 150 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों को सरकारी खरीद, जीईएम पोर्टल, विक्रेता पंजीकरण, डिजिटल मार्केटिंग, निर्यात और बाजार विस्तार की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने उद्यमियों से बड़ा सोचने, निर्यात बढ़ाने और रोजगार सृजन में योगदान देने का आह्वान किया।
गौतमबुद्धनगर के एमएसएमई उद्यमियों के लिए सरकारी खरीद, नए बाजारों और निर्यात के रास्ते खोलने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। ग्रेटर नोएडा स्थित आईआईएलएम विश्वविद्यालय में बुधवार को “वन डे नेशनल वर्कशॉप ऑन प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (पीएमएस) स्कीम” का आयोजन किया गया। कार्यशाला में 150 से अधिक उद्यमियों ने हिस्सा लिया और उन्हें सरकारी खरीद प्रक्रिया से लेकर जीईएम पोर्टल, विक्रेता पंजीकरण, निर्यात संवर्धन और बाजार विस्तार तक की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यशाला का आयोजन गौतमबुद्धनगर की औद्योगिक संस्था इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (आईबीए) की पहल पर भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय (डीएफओ), ओखला, नई दिल्ली तथा आईआईएलएम विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी ने फीता काटकर और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। शुरुआत से ही कार्यशाला का फोकस इस बात पर रहा कि स्थानीय एमएसएमई केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि सरकारी खरीद व्यवस्था, डिजिटल प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी सीधे जुड़ें।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि गौतमबुद्धनगर आज औद्योगिक विकास, परिधान उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स और निवेश के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की ओर से निवेशकों के लिए अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करने और अधिक से अधिक उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य केवल औद्योगिक इकाइयों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है।
जिलाधिकारी ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं उद्यमियों को सरकारी योजनाओं, सरकारी खरीद, विपणन सहायता और निर्यात के नए अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने उद्यमियों से अपील की कि वे अपने कारोबार को स्थानीय बाजार तक सीमित न रखें और अपने उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास करें।
“बड़ा सोचें, रोजगार भी बढ़ाएं”
जिलाधिकारी ने उद्यमियों से बड़ा सपना देखने का आह्वान करते हुए कहा कि उद्योगों का विस्तार केवल कारोबारी लाभ तक सीमित नहीं होना चाहिए। उद्यमियों को निर्यात बढ़ाने के साथ रोजगार सृजन में भी योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक उद्यमी को अपने उद्योग के विकास के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समझना चाहिए। उद्योगों के माध्यम से लोगों को रोजगार देना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना उद्यमिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने उद्यमियों से समाज को वापस देने की भावना के साथ काम करने का भी आह्वान किया।

जिलाधिकारी ने इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन द्वारा उद्योग हित में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आईबीए उद्योग जगत और सरकार के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में काम कर रही है।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार के संयुक्त आयोजन एमएसएमई क्षेत्र को नई दिशा देंगे और अधिक से अधिक उद्यमियों को केंद्र तथा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में मदद करेंगे।
कार्यशाला में एमएसएमई मंत्रालय की ओर से डॉ. आर. के. भारती, स्टेट डायरेक्टर सुनील कुमार, डिप्टी डायरेक्टर एमएसएमई-डीएफओ, ओखला तथा डिप्टी डायरेक्टर एमएसएमई ओ.पी. सिंह सहित विभिन्न विशेषज्ञ अधिकारियों ने उद्यमियों को संबोधित किया।
केंद्रीय मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी संस्थानों के खरीद प्रमुखों एवं विशेषज्ञ अधिकारियों ने सरकारी खरीद की प्रक्रिया, जीईएम पोर्टल, खरीद एवं विपणन सहायता यानी पीएमएस योजना, विक्रेता विकास, निर्यात संवर्धन और बाजार से जुड़ाव जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
उद्यमियों को यह भी बताया गया कि सरकारी विभागों में विक्रेता के रूप में पंजीकरण कैसे कराया जा सकता है और उपलब्ध अवसरों का इस्तेमाल करके कारोबार को किस तरह आगे बढ़ाया जा सकता है।
कार्यशाला में केवल सरकारी खरीद तक ही चर्चा सीमित नहीं रही। उद्यमियों को विपणन के अवसरों, निर्यात संवर्धन, डिजिटल मार्केटिंग, गुणवत्ता प्रमाणन और एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने उद्यमियों से उपलब्ध सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। साथ ही उद्योगों के विस्तार, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और देश की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय और उद्योग जगत की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में आईआईएलएम विश्वविद्यालय की ओर से वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) नील राय, प्रो वाइस चांसलर राजे मोहन और सीनियर मैनेजर राजकुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं शिक्षाविद मौजूद रहे।

वहीं इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय, महासचिव सुनील दत्त शर्मा, उपाध्यक्ष नरेश चौहान, उपाध्यक्ष राजेश खन्ना, उपाध्यक्ष सुधीर त्यागी तथा कार्यकारिणी के सदस्य और बड़ी संख्या में उद्यमियों ने सहभागिता की।
आगे भी जारी रखने पर जोर
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों और प्रतिभागी उद्यमियों ने राष्ट्रीय कार्यशाला को उद्योग जगत के लिए उपयोगी बताया। उद्यमियों का कहना था कि ऐसे आयोजनों से उन्हें केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी ही नहीं मिलती, बल्कि सरकारी खरीद व्यवस्था और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का व्यावहारिक मार्गदर्शन भी मिलता है।
कार्यशाला में भविष्य में भी इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन, एमएसएमई मंत्रालय और आईआईएलएम विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने पर जोर दिया गया।
अब देखना यह होगा कि कार्यशाला में मिली जानकारी गौतमबुद्धनगर के एमएसएमई कारोबारियों के लिए कितने नए अवसरों में बदलती है। सरकारी खरीद और निर्यात के बड़े बाजार में स्थानीय उद्यमियों की हिस्सेदारी बढ़ती है या नहीं, यह आने वाला समय तय करेगा।
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