ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) में 4 जुलाई को "डॉक्टर्स के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)" विषय पर एक दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित होगी। इस कार्यशाला में चिकित्सकों, मेडिकल शिक्षकों और शोधकर्ताओं को स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान में एआई के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र, कस्टम AI असिस्टेंट, NotebookLM नॉलेज नोटबुक और AI प्रॉम्प्ट लाइब्रेरी भी प्रदान की जाएगी।
चिकित्सा क्षेत्र तेजी से बदल रही तकनीकों के दौर से गुजर रहा है और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। इसी बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) ने चिकित्सकों और मेडिकल शिक्षकों को भविष्य की तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।
संस्थान द्वारा GIMS विद्या सेतु, GIMS सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन तथा GIMS AI स्टार्टअप क्लिनिक के संयुक्त तत्वावधान में 4 जुलाई 2025 को "डॉक्टर्स के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)" विषय पर एक दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों, मेडिकल फैकल्टी और शोधकर्ताओं को एआई के प्रभावी, सुरक्षित और व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना है, ताकि वे अपनी दैनिक चिकित्सा और शैक्षणिक गतिविधियों में नई तकनीकों का बेहतर उपयोग कर सकें।
स्वास्थ्य सेवाओं और AI के बीच की दूरी होगी कम
जीआईएमएस के अनुसार, इस कार्यशाला की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े पेशेवर केवल एआई के सिद्धांतों को ही न समझें, बल्कि उसे अपने रोजमर्रा के कार्यों में व्यावहारिक रूप से लागू भी कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ प्रतिभागियों को यह बताएंगे कि किस प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग मरीजों के रिकॉर्ड तैयार करने, क्लिनिकल डॉक्यूमेंटेशन को आसान बनाने, रिसर्च कार्यों को गति देने और चिकित्सा शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है।
यह प्रशिक्षण पूरी तरह इंटरैक्टिव होगा, जिसमें लाइव डेमोंस्ट्रेशन और वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से डॉक्टरों को आधुनिक एआई टूल्स का उपयोग सिखाया जाएगा।
इन विषयों पर मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। इनमें शामिल हैं—
-
एआई आधारित क्लिनिकल डॉक्यूमेंटेशन तैयार करना।
-
मेडिकल रिसर्च और साहित्य समीक्षा (Literature Review) को अधिक प्रभावी बनाना।
-
मेडिकल डेटा का विश्लेषण (Medical Data Analysis)।
-
चिकित्सा शिक्षा के लिए व्याख्यान, प्रस्तुतियां और अध्ययन सामग्री तैयार करना।
-
प्रभावी प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग (Prompt Engineering) सीखना।
-
व्यक्तिगत AI असिस्टेंट (Custom AI Assistant) विकसित करना।
-
रोगी देखभाल, चिकित्सा अनुसंधान और मेडिकल एजुकेशन में एआई का जिम्मेदारीपूर्ण और सुरक्षित उपयोग।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चिकित्सा क्षेत्र में एआई की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है। ऐसे में यह प्रशिक्षण डॉक्टरों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।
दैनिक कार्यों में बढ़ेगी दक्षता और सटीकता
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य केवल तकनीकी जानकारी देना नहीं, बल्कि चिकित्सकों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना भी है।
जीआईएमएस का मानना है कि यदि डॉक्टर एआई आधारित तकनीकों का सही उपयोग करें तो क्लिनिकल निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक सटीक हो सकती है। साथ ही दस्तावेज तैयार करने में लगने वाला समय कम होगा, अनुसंधान कार्यों की गुणवत्ता बढ़ेगी और मेडिकल शिक्षा को अधिक आधुनिक बनाया जा सकेगा।
कार्यक्रम में इस बात पर भी विशेष जोर दिया जाएगा कि एआई का उपयोग केवल एक सहायक उपकरण के रूप में किया जाए और चिकित्सा संबंधी अंतिम निर्णय हमेशा चिकित्सकीय विशेषज्ञता और नैतिक मानकों के अनुरूप ही लिए जाएं।
कार्यशाला के बाद प्रतिभागियों को क्या मिलेगा?
इस कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रतिभागियों को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि कई उपयोगी डिजिटल संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
कार्यशाला के समापन पर प्रत्येक प्रतिभागी को—
-
आधिकारिक सहभागिता प्रमाणपत्र।
-
उनके कार्यक्षेत्र के अनुरूप एक कस्टमाइज्ड AI असिस्टेंट (Gem)।
-
NotebookLM Knowledge Notebook।
-
चयनित AI Prompt Library।
-
अपने संस्थान या कार्यस्थल पर एआई को लागू करने के लिए विस्तृत Implementation Roadmap।
ये सभी संसाधन प्रतिभागियों को कार्यशाला के बाद भी अपने पेशेवर कार्यों में एआई का प्रभावी उपयोग करने में सहायता करेंगे।
डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने बताया भविष्य की जरूरत
जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने इस पहल को चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा और बायोमेडिकल अनुसंधान में तेजी से बदलाव ला रहा है। ऐसे समय में स्वास्थ्य पेशेवरों को एआई की व्यावहारिक दक्षताओं से सशक्त बनाना भविष्य की स्मार्ट, तेज़ और अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक हो गया है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला न केवल नवाचार को बढ़ावा देगी, बल्कि क्लिनिकल उत्कृष्टता को मजबूत करने के साथ चिकित्सा समुदाय को तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य के लिए भी तैयार करेगी।
डॉ. गुप्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला में भाग लेने वाले डॉक्टर और शोधकर्ता यहां से प्राप्त ज्ञान और कौशल का उपयोग अपने पेशेवर जीवन में तत्काल प्रभाव से कर सकेंगे।
भविष्य की चिकित्सा व्यवस्था की ओर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में चिकित्सा क्षेत्र तेजी से डिजिटल हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड, एआई आधारित डायग्नोसिस, स्मार्ट रिसर्च टूल्स और डिजिटल मेडिकल एजुकेशन अब स्वास्थ्य व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनते जा रहे हैं।
ऐसे समय में जीआईएमएस द्वारा आयोजित यह कार्यशाला न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के चिकित्सा समुदाय के लिए एक प्रेरणादायक पहल मानी जा रही है। यदि डॉक्टर एआई तकनीकों का जिम्मेदारीपूर्ण और प्रभावी उपयोग सीखते हैं, तो इसका सीधा लाभ मरीजों, चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी देखने को मिलेगा।
COMMENTS