विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर आयोजित दंत जांच एवं तंबाकू जागरूकता कैंप में 77 लोगों की जांच की गई। जांच में लगभग 47 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते पाए गए, जबकि 5 लोगों में कैंसर बनने से पहले के गंभीर घावों की पहचान हुई।
तंबाकू की लत केवल एक आदत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला करने वाली गंभीर समस्या है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष दंत जांच एवं तंबाकू जागरूकता शिविर में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। जांच में शामिल लोगों में लगभग हर दूसरा व्यक्ति तंबाकू का सेवन करता पाया गया, जबकि कुछ लोगों में ऐसे घाव मिले जो भविष्य में कैंसर का रूप ले सकते हैं।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कैंप का उद्देश्य लोगों को तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, मुंह और दांतों से जुड़ी बीमारियों की शुरुआती पहचान करना तथा समय रहते उपचार के लिए प्रेरित करना था। शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और विशेषज्ञ चिकित्सकों से स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्राप्त किया।
77 लोगों की हुई जांच, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
आयोजित कैंप में कुल 77 लोगों की दंत जांच की गई। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि 36 लोग, यानी लगभग 46.8 प्रतिशत प्रतिभागी किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे थे। इनमें गुटखा, खैनी, सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों का उपयोग करने वाले लोग शामिल थे।
विशेषज्ञों के अनुसार यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि समाज में तंबाकू की लत अभी भी व्यापक रूप से मौजूद है और इसके खिलाफ जागरूकता अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
5 लोगों में मिले कैंसर से पहले के गंभीर संकेत
जांच के दौरान सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि 5 लोगों में ऐसे घाव पाए गए जिन्हें चिकित्सकीय भाषा में "प्री-कैंसरस लीजन" यानी कैंसर बनने से पहले के गंभीर संकेत माना जाता है। यह संख्या कुल जांच किए गए लोगों का लगभग 6.5 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे घावों की समय रहते पहचान और उपचार न किया जाए तो भविष्य में यह मुंह के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। हालांकि शुरुआती चरण में पहचान हो जाने पर उपचार की संभावना काफी बेहतर रहती है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी स्वास्थ्य संबंधी सलाह
शिविर के दौरान विशेषज्ञ दंत चिकित्सकों की टीम ने सभी प्रतिभागियों की विस्तार से जांच की और उन्हें व्यक्तिगत स्वास्थ्य परामर्श दिया। लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों के बारे में सरल और सहज भाषा में जानकारी दी गई।

डॉक्टरों ने बताया कि तंबाकू केवल मुंह के कैंसर का कारण नहीं बनता, बल्कि यह मसूड़ों की बीमारी, दांतों के कमजोर होने, मुंह में सफेद या लाल चकत्ते बनने, सांस की दुर्गंध, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी और कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
तंबाकू छोड़ने के लिए किया गया प्रेरित
कैंप में तंबाकू सेवन करने वाले लोगों को इसकी लत छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि तंबाकू छोड़ने के बाद शरीर में सकारात्मक बदलाव शुरू हो जाते हैं और कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
साथ ही प्रतिभागियों को तंबाकू मुक्ति से जुड़ी उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं और परामर्श सुविधाओं की जानकारी भी दी गई ताकि जरूरत पड़ने पर वे विशेषज्ञ सहायता प्राप्त कर सकें।
जिनमें समस्या मिली, उन्हें आगे जांच की सलाह
जांच के दौरान जिन लोगों में किसी प्रकार की गंभीर समस्या या शुरुआती लक्षण पाए गए, उन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए शारदा डेंटल कॉलेज आने की सलाह दी गई। चिकित्सकों ने उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने के लिए भी प्रेरित किया।
डीन डॉ. हेमंत साहनी ने दिया महत्वपूर्ण संदेश
इस अवसर पर स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज के डीन डॉ. हेमंत साहनी ने कहा कि तंबाकू से होने वाली बीमारियां धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं और अधिकांश मामलों में इनका पता काफी देर से चलता है।
उन्होंने कहा, “तंबाकू से होने वाली बीमारियाँ धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुँचाती हैं और अक्सर देर से पता चलती हैं। ऐसे में समय पर जांच और शुरुआती पहचान बेहद आवश्यक है। जागरूकता और नियमित कैंपों के माध्यम से हम लोगों को गंभीर बीमारियों से समय रहते बचा सकते हैं। समाज को तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में इस प्रकार के प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
जागरूकता के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा का संदेश
कैंप का आयोजन डॉ. मनीषा सिंह के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान डॉ. ऋचा मिश्रा, डॉ. कुशदीप गुप्ता, डॉ. शुभांगी गर्ग सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान लोगों को यह संदेश दिया गया कि तंबाकू से दूरी बनाना केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि परिवार और समाज की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि नियमित जांच और जागरूकता अभियान इसी तरह जारी रहे तो मुंह के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में कमी लाई जा सकती है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर आयोजित यह शिविर केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज को तंबाकू के खिलाफ जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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