Sunday, March 29, 2026

10 दिन की मोहलत या महायुद्ध की उलटी गिनती? ट्रंप के फैसले से दुनिया में बढ़ी बेचैनी

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच हमले टले, लेकिन 6 अप्रैल की डेडलाइन ने बढ़ाया वैश्विक खतरा

New Delhi , Latest Updated On - Mar 27 2026 | 17:01:00 PM
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ईरान-अमेरिका जंग के 28वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने हमलों को 10 दिन के लिए टाल दिया है। बातचीत जारी है, लेकिन मिसाइल हमलों, समुद्री संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव ने हालात बेहद संवेदनशील बना दिए हैं।

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मिडिल ईस्ट में जारी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब अपने 28वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात हर गुजरते दिन के साथ और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों को फिलहाल 10 दिनों के लिए टाल दिया है। इस फैसले ने जहां एक ओर तत्काल राहत दी है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर सस्पेंस और चिंता को और बढ़ा दिया है।

ट्रंप ने यह घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” के जरिए की। उन्होंने बताया कि ईरान सरकार के अनुरोध पर यह निर्णय लिया गया है। अब हमले की नई समयसीमा 6 अप्रैल 2026 रात 8 बजे तय की गई है। पहले यह डेडलाइन इसी सप्ताह समाप्त होने वाली थी, लेकिन अब दुनिया की निगाहें इस नई तारीख पर टिक गई हैं।

बातचीत जारी, लेकिन खतरा बरकरार

ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और “बहुत अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि ईरान तय शर्तों को पूरा नहीं करता है, तो अमेरिका ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने बताया कि ईरान ने पहले 7 दिन की मोहलत मांगी थी, लेकिन उन्होंने 10 दिन देने का फैसला किया। इससे पहले अमेरिका की ओर से 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था, जिसे बाद में 5 दिन और अब 10 दिन तक बढ़ा दिया गया है। विशेषज्ञ इसे एक रणनीतिक दबाव की नीति के रूप में देख रहे हैं।

विवादित बयान से बढ़ा तनाव

इस बीच ट्रंप का एक और बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि CIA के पास ईरान के संभावित सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर कुछ निजी जानकारियां हैं। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है, जिससे यह बयान विवाद का विषय बन गया है।


रियाद पर मिसाइल हमला

तनाव के बीच रियाद पर छह बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में खतरा और बढ़ गया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से दो मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि बाकी चार मिसाइलें खाली इलाकों या समुद्र में गिरीं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह घटना बढ़ते सैन्य खतरे का संकेत है।

समुद्री मार्गों पर संकट गहराया

अब तक दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर थी, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। लेकिन अब बाब-अल-मंदेब भी एक नया तनाव बिंदु बनकर उभर रहा है। यह मार्ग यूरोप और एशिया के बीच व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग भी अस्थिर होता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। आशंका जताई जा रही है कि ईरान सीधे तौर पर नहीं, बल्कि यमन के हूती विद्रोहियों के माध्यम से इस क्षेत्र में दबाव बना सकता है।

ईरान में सख्ती, 15 गिरफ्तार

जंग के बीच ईरान ने अपने भीतर भी सख्ती बढ़ा दी है। इस्फहान प्रांत में 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर संवेदनशील सैन्य जानकारी लीक करने का आरोप है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन लोगों ने सैन्य ठिकानों की जानकारी और हमलों से जुड़ी तस्वीरें विरोधी मीडिया को भेजी थीं।

समुद्र में फंसा जहाज, क्रू लापता

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि थाईलैंड का कार्गो जहाज Mayuree Naree, जो पहले हुए हमले का शिकार हुआ था, अब केश्म आइलैंड के पास फंसा हुआ है। इस जहाज के तीन क्रू सदस्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं।


हूती विद्रोहियों का बयान

इस बीच हूती विद्रोहियों ने बयान दिया है कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए फिलहाल कोई खतरा नहीं है और व्यापार सामान्य रूप से जारी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति कभी भी बदल सकती है।

संयुक्त राष्ट्र में अहम बैठक

बढ़ते तनाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान मुद्दे पर एक अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक बंद कमरे में होगी और इसमें अमेरिका, रूस और अन्य देशों के रुख पर नजर रहेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने इस बैठक की मांग की थी।

आगे क्या?

ट्रंप का यह फैसला फिलहाल टकराव को टालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन 6 अप्रैल की डेडलाइन ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यदि इस दौरान कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो यह संकट एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।

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