ईरान-अमेरिका युद्ध के 26वें दिन हालात थोड़े सकारात्मक दिख रहे हैं। बातचीत की कोशिशें तेज हुई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हमले अभी भी जारी हैं।
मध्य पूर्व में जारी ईरान-अमेरिका युद्ध अब 26वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पहली बार हालात में कुछ नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। जहां कुछ दिन पहले तक दोनों देशों के बीच लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे थे, वहीं अब बातचीत की संभावनाएं उभरती नजर आ रही हैं।
युद्ध के 24वें दिन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था। शुरुआत में ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया, लेकिन अब तेहरान बातचीत के लिए तैयार होता दिख रहा है। हालांकि ईरान ने साफ किया है कि वह अमेरिका की किसी चाल में नहीं फंसेगा और सतर्कता बनाए रखेगा।
मंगलवार को ट्रंप ने ईरान को औपचारिक शांति प्रस्ताव भेजते हुए भरोसा जताया कि करीब एक महीने से चल रहा यह युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। इसी बीच ईरान ने एक बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि वह गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति देगा। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा संभालता है, ऐसे में इसका खुला रहना बेहद महत्वपूर्ण है।

इस बीच भारत भी इस कूटनीतिक गतिविधि का हिस्सा बना। ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत थी। इस संघर्ष में अब तक अमेरिका और इजराइल के हमलों में कम से कम 6 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई भी प्रभावित हुई है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी आगे आकर मध्यस्थता की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच शांति वार्ता की मेजबानी करने के लिए तैयार है। तुर्की और मिस्र के साथ मिलकर अगले 48 घंटों में बातचीत कराने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
हालांकि कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। मंगलवार को ईरान ने इजराइल पर नए मिसाइल हमले किए, जिससे तेल अवीव में भारी नुकसान हुआ और कई लोग घायल हुए। शहर के मेयर रोन हल्दई के अनुसार एक पॉश इलाके की इमारत को सीधा निशाना बनाया गया।
इसी दौरान कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले में एक फ्यूल टैंक में आग लग गई, जिससे संपत्ति को नुकसान हुआ। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।

तनाव और बढ़ गया जब ईरान ने International Atomic Energy Agency को सूचित किया कि उसके बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट परिसर में एक प्रोजेक्टाइल गिरा था। हालांकि राहत की बात यह रही कि संयंत्र को कोई नुकसान नहीं हुआ और संचालन सामान्य बना हुआ है।
दूसरी ओर इजराइल ने तेहरान में ईरान की क्रूज मिसाइल फैक्ट्रियों पर हवाई हमले किए, जो उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
खाड़ी क्षेत्र में भी असर साफ दिख रहा है। ईरान के लगातार हमलों से कतर में गैस संकट पैदा हो गया है और वहां इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी है। बताया जा रहा है कि गैस प्लांट को ठीक होने में 2-3 हफ्ते लग सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगाया है। वहीं चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने और शांति का रास्ता अपनाने की अपील की है।
कुल मिलाकर, एक ओर जहां बातचीत की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर हमलों का सिलसिला जारी है। अब सबकी नजर अगले 48 घंटों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि यह युद्ध खत्म होगा या और भयानक रूप लेगा।
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