ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। अमेरिका-इजरायल के साथ जारी युद्ध के बीच हुए इस सत्ता परिवर्तन ने वैश्विक राजनीति और तेल बाजार को हिला दिया है।
युद्ध के बीच ईरान में बड़ा सत्ता परिवर्तन
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध के कारण भारी तनाव के दौर से गुजर रहा है।
ईरान की सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने सोमवार को मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर घोषित किया। घोषणा के साथ ही परिषद ने देशवासियों से नए नेता के प्रति निष्ठा जताने और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की।
परिषद ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला बाहरी दबाव और सुरक्षा खतरों के बावजूद देश के संवैधानिक ढांचे के तहत लिया गया है।
राजनीतिक और सैन्य संस्थानों का मिला समर्थन
नए सुप्रीम लीडर की घोषणा के बाद ईरान के प्रमुख राजनीतिक और सैन्य संस्थान तेजी से उनके समर्थन में सामने आए हैं। ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने कहा कि अली खामेनेई की मौत के बाद दुश्मनों को उम्मीद थी कि ईरान राजनीतिक संकट में फंस जाएगा, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए नया नेतृत्व स्थापित कर दिया गया है।
लारिजानी के मुताबिक मोजतबा खामेनेई इस “संवेदनशील दौर” में देश का नेतृत्व करने में सक्षम हैं और देश को मजबूत दिशा दे सकते हैं।
ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी नए सुप्रीम लीडर के प्रति अपनी निष्ठा जताई है। संगठन ने बयान जारी कर कहा कि वह नए नेता के आदेशों का पूरी तरह पालन करेगा और जरूरत पड़ने पर देश के लिए अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि IRGC का खुला समर्थन सत्ता परिवर्तन को स्थिर बनाए रखने का संकेत देता है।
संसद और नेताओं ने किया स्वागत
ईरान की संसद के स्पीकर ने भी मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि नए सुप्रीम लीडर का अनुसरण करना धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है।
संसद और धार्मिक नेतृत्व के इस समर्थन से संकेत मिलता है कि ईरान के सत्ता ढांचे में फिलहाल कोई बड़ा राजनीतिक संकट नहीं है और नया नेतृत्व तेजी से स्वीकार किया जा रहा है।

युद्ध के बीच हुआ नेतृत्व परिवर्तन
मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष में उलझा हुआ है। युद्ध को अब दस दिन हो चुके हैं और दोनों पक्ष लगातार हमले कर रहे हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान उम्मीद से अधिक मजबूत प्रतिक्रिया दे रहा है और लगातार अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है तो अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की संख्या बढ़ सकती है।
अमेरिका के लिए बढ़ी चिंता
पूर्व सीआईए प्रमुख डेविड पेट्रेयस ने कहा है कि मोजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। उनके अनुसार मोजतबा अपने पिता की तरह सख्त विचारधारा वाले नेता साबित हो सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि नए नेतृत्व में ईरान की परमाणु और मिसाइल नीति में नरमी की संभावना कम दिखाई देती है। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।
सऊदी अरब के लिए जारी हुआ सुरक्षा अलर्ट
युद्ध का असर अब पूरे मिडिल ईस्ट में दिखाई देने लगा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने सुरक्षा खतरे बढ़ने के कारण सऊदी अरब से गैर-जरूरी अमेरिकी राजनयिकों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया है।
पिछले सप्ताह सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के आसपास ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आई थीं। इसी तरह कतर, जॉर्डन, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और पाकिस्तान से भी गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों को पहले ही वापस बुलाया जा चुका है।
कुवैत में अमेरिकी दूतावास की गतिविधियां भी अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं।

वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा असर
इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। मिडिल ईस्ट में तेल आपूर्ति पर खतरे के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। तेल की कीमतों में इस तेजी का असर अमेरिका सहित कई देशों के बाजारों पर भी पड़ा है।
अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 3.45 डॉलर प्रति गैलन हो गई है। यह सिर्फ एक सप्ताह में करीब 16 प्रतिशत की वृद्धि है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और आर्थिक व्यवस्था पर इसका और गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
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