Thursday, March 12, 2026

मिडिल ईस्ट में जंग का 11वां दिन: तेहरान और बेरूत पर इजरायली हमले, अमेरिका के 7 सैनिकों की मौत; होर्मुज संकट से दुनिया पर खतरा

ईरान-अमेरिका-इजरायल टकराव तेज, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग 97% तक घटी; UNCTAD ने दी चेतावनी – वैश्विक व्यापार और खाद्य कीमतों पर बड़ा असर संभव

New Delhi , Latest Updated On - Mar 11 2026 | 11:34:00 AM
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मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष और तेज हो गया है। तेहरान और लेबनान के रिहायशी इलाकों में हमलों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने वैश्विक व्यापार और खाद्य कीमतों पर बड़े संकट की चेतावनी दी है।

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मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध लगातार खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। युद्ध के 11वें दिन तेहरान और लेबनान के रिहायशी इलाकों में हमलों की खबरें सामने आई हैं, जबकि वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इससे दुनिया भर में आर्थिक और ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।

ईरान ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं संयुक्त राष्ट्र की ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी UNCTAD ने एक नई रिपोर्ट जारी कर चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक व्यापार और विकास पर गंभीर असर पड़ सकता है। खासकर खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिसका सबसे ज्यादा असर गरीब और कमजोर देशों पर पड़ेगा।

UNCTAD की रिपोर्ट के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का करीब 25 प्रतिशत समुद्री तेल, 19 प्रतिशत एलएनजी और लगभग एक-तिहाई वैश्विक फर्टिलाइजर व्यापार गुजरता है। हर साल करीब 16 मिलियन टन फर्टिलाइजर इसी मार्ग से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। लेकिन 28 फरवरी 2026 को जंग शुरू होने के बाद से इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही में लगभग 97 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। सुरक्षा खतरे के कारण कई जहाज अब इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं, जिससे फ्रेट रेट, बंकर फ्यूल की कीमतें और इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी वृद्धि हो गई है।


इस बीच अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने संसद को दी गई एक रिपोर्ट में बताया कि ईरान के साथ युद्ध के पहले दो दिनों में ही अमेरिका ने लगभग 5.6 अरब डॉलर यानी करीब 46 हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिए थे। युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी सेना ने बड़ी संख्या में महंगे और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिनमें लंबी दूरी तक मार करने वाली प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलें और कई उन्नत सैन्य प्रणालियां शामिल थीं। इसके अलावा अमेरिका और उसके सहयोगियों को ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के लिए बड़ी संख्या में एयर डिफेंस हथियार भी इस्तेमाल करने पड़े।

युद्ध के 11वें दिन ईरान की राजधानी तेहरान में फिर से जोरदार धमाके हुए। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायली एयरस्ट्राइक ने शहर के एक बैंक भवन को निशाना बनाया, जिसमें एक बैंक कर्मचारी की मौत हो गई। शहर के केंद्रीय रिहायशी इलाकों में भी शक्तिशाली धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान ने आरोप लगाया है कि ये हमले नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं।

युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका पर वॉर क्राइम का गंभीर आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने कहा कि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena को डुबो दिया और बाद में रेस्क्यू ऑपरेशन में भी बाधा डाली। ईरान के मुताबिक यह घटना 4 मार्च 2026 को इंडियन ओशन में श्रीलंका के दक्षिणी तट से करीब 40 नॉटिकल मील दूर हुई। आरोप है कि अमेरिकी सबमरीन USS Charlotte ने MK-48 टॉरपीडो से जहाज पर हमला किया, जिससे वह तेजी से डूब गया।

ईरान का दावा है कि जहाज पर करीब 130 से 180 नाविक सवार थे। इनमें से 87 से अधिक की मौत हो गई, जबकि 32 नाविकों को श्रीलंकाई नौसेना ने बचा लिया और कई अब भी लापता हैं। ईरान का कहना है कि हमले के बाद अमेरिका ने शिपव्रेक साइट पर रेस्क्यू में कोई मदद नहीं की, जो जिनेवा कन्वेंशन-II और अंतरराष्ट्रीय युद्ध कानूनों का उल्लंघन है।


इसी बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC ने दावा किया है कि उसने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए चार हाई-प्रिसिजन मिसाइलें दागी हैं। इनमें से दो मिसाइलें कुवैत स्थित कैंप आरिफजान पर दागी गईं, जो अमेरिका की सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM का बड़ा सैन्य अड्डा है। यहां हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और यही से मिडिल ईस्ट में कई ऑपरेशन संचालित होते हैं।

हालांकि अब तक अमेरिका या कुवैत की ओर से किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पहले कई बार ईरानी ड्रोन और मिसाइल इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी है, लेकिन इस ताजा हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

वहीं लेबनान के दक्षिणी हिस्से में भी इजरायली हमलों ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। लेबनान के पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक टायर जिले के काना इलाके में हुए हमलों में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। इन मृतकों में जौया शहर के मेयर फॉजी फवाज और काउंसिल मेंबर अब्बास बालबेकी भी शामिल हैं। पिछले सोमवार से अब तक इजरायल के हमलों में 570 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लेबनानी नागरिक अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं।

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