अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्णकालिक CEO के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। देशभर से मिले 5,200 से ज्यादा आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद 18 उम्मीदवारों को अंतिम इंटरव्यू के लिए चुना गया है। चार दिन तक चलने वाली इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व कौशल और बड़े स्तर की व्यवस्थाओं को संभालने के अनुभव को परखा जाएगा। चयन समिति तीन नाम ट्रस्ट के सामने रखेगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। CEO के नाम की घोषणा 2 सितंबर को होने की संभावना है।
अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को अब और पेशेवर ढंग से संचालित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्णकालिक CEO पद के लिए उम्मीदवारों के इंटरव्यू का दौर शुरू हो चुका है।
दिलचस्प बात यह है कि इस एक पद के लिए देशभर से 5,200 से ज्यादा आवेदन पहुंचे थे। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों की प्रारंभिक फोन स्क्रीनिंग और इंटरव्यू के बाद महज 18 उम्मीदवारों को अंतिम चरण के लिए चुना गया है।
अब इन 18 उम्मीदवारों की अग्निपरीक्षा चार दिनों तक चलेगी। इंटरव्यू की प्रक्रिया 11, 12, 13 और 14 अगस्त को अयोध्या में आयोजित की जा रही है।
इन चार दिनों में चयन समिति उम्मीदवारों की योग्यता, प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और बड़े स्तर पर जटिल व्यवस्थाओं को संभालने की क्षमता को परखेगी।
यानी 5,200 से ज्यादा दावेदारों की लंबी दौड़ अब सिर्फ 18 उम्मीदवारों तक सिमट गई है।
लेकिन असली सवाल अभी भी बाकी है—
इन 18 में से आखिर वह कौन होगा, जिसे राम मंदिर ट्रस्ट की महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी?
तीन नाम जाएंगे ट्रस्ट के पास, एक पर लगेगी अंतिम मुहर
जानकारी के मुताबिक, 18 उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद चयन समिति इनमें से तीन नामों का चयन करेगी।
इन तीन नामों को अंतिम विचार के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के सामने भेजा जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट इन तीनों में से किसी एक उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला लेगा।
बताया जा रहा है कि CEO के नाम की घोषणा 2 सितंबर को की जा सकती है।
इसका मतलब साफ है कि फिलहाल इंटरव्यू बोर्ड उम्मीदवारों की क्षमता परख रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय मंदिर ट्रस्ट के हाथ में होगा।
कौन ले रहा है 18 उम्मीदवारों का इंटरव्यू?
CEO के चयन के लिए बनाई गई समिति में तीन प्रमुख सदस्य शामिल हैं।
इस चयन समिति में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर) विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हवारे शामिल हैं।
तीनों सदस्य 18 उम्मीदवारों के प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और बड़े स्तर की जिम्मेदारी संभालने की योग्यता को परखेंगे।
बताया जा रहा है कि 18 उम्मीदवारों में पूर्व नौकरशाहों के साथ-साथ दक्षिण भारत के विभिन्न मंदिरों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके लोग भी शामिल हैं।
इससे संकेत मिलता है कि ट्रस्ट ऐसे व्यक्ति की तलाश में है, जिसे बड़े धार्मिक संस्थान की जटिल व्यवस्थाओं और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को संभालने का व्यावहारिक अनुभव हो।
CEO का पद इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
राम मंदिर के CEO की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासनिक पदों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। आने वाले समय में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना को देखते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित और पेशेवर तरीके से संचालित करना बड़ी चुनौती होगी।
CEO के सामने श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन से लेकर मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
इसके अलावा कर्मचारियों का संचालन, अलग-अलग सरकारी और निजी एजेंसियों के बीच समन्वय, तकनीकी व्यवस्थाएं और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर व प्रशासनिक सिस्टम तैयार करना भी इस पद की अहम जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, बेहतर प्रशासन और जवाबदेही भी CEO के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
यानी यह सिर्फ दफ्तर चलाने वाला पद नहीं होगा। यह ऐसी व्यवस्था की जिम्मेदारी होगी, जिसके केंद्र में देश-दुनिया से अयोध्या पहुंचने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर प्रशासन होगा।
चढ़ावे की चोरी के आरोपों के बाद क्यों महसूस हुई CEO की जरूरत?
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्णकालिक CEO पद की जरूरत उस समय और गंभीरता से महसूस की गई, जब मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आए थे।
इसके बाद ट्रस्ट ने मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने के लिए पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने का फैसला किया।
CEO के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को एक स्पष्ट नेतृत्व देने, विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा व्यवस्थाओं की निगरानी मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।
सोमवार देर रात अयोध्या पहुंचे सभी उम्मीदवार
सूत्रों के मुताबिक, इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए सभी 18 उम्मीदवार सोमवार देर रात अयोध्या पहुंच गए थे।
ट्रस्ट की ओर से उम्मीदवारों के ठहरने की व्यवस्था भी की गई।
उम्मीदवारों ने अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचने का अपना कार्यक्रम पहले ही ट्रस्ट को भेज दिया था। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से उन्हें एयरपोर्ट से अलग-अलग वाहनों के जरिए निर्धारित स्थानों पर पहुंचाया गया।
मंगलवार सुबह उम्मीदवार करीब 9 बजे राम मंदिर परिसर पहुंचे, जबकि इंटरव्यू की प्रक्रिया करीब 10 बजे शुरू हुई।
यदि मंगलवार को सभी उम्मीदवारों के इंटरव्यू पूरे नहीं होते हैं तो प्रक्रिया बुधवार को भी जारी रखी जा सकती है।
तीर्थयात्री सुविधा केंद्र में हो रहा इंटरव्यू
जानकारी के मुताबिक, इंटरव्यू की प्रक्रिया राम मंदिर के तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के सम्मेलन कक्ष में आयोजित की जा रही है।
उम्मीदवारों को इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान मीडिया से बातचीत नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
इंटरव्यू पूरा होने के बाद उम्मीदवारों को वापस अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचाया जाएगा, जहां से वे नई दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे। दिल्ली पहुंचने के बाद वे अपने-अपने गंतव्यों के लिए रवाना होंगे।
अब निगाहें 18 उम्मीदवारों पर
एक पद...
5,200 से ज्यादा आवेदन...
स्क्रीनिंग के बाद 18 उम्मीदवार...
चार दिन की परीक्षा...
और फिर सिर्फ तीन नाम चयन समिति की ओर से ट्रस्ट तक पहुंचेंगे।
इसके बाद इन तीन नामों में से एक को राम मंदिर ट्रस्ट का पूर्णकालिक CEO बनने का मौका मिलेगा।
यह पद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है।
अब देखना यह होगा कि चयन समिति किन तीन चेहरों पर भरोसा जताती है और आखिरकार ट्रस्ट किस नाम पर अपनी मुहर लगाता है।
फिलहाल 18 उम्मीदवार अयोध्या में हैं और चार दिनों की इस प्रक्रिया के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।
अंतिम घोषणा 2 सितंबर को होने की संभावना है।
तब पता चलेगा कि राम मंदिर ट्रस्ट की इस बेहद अहम प्रशासनिक जिम्मेदारी के लिए आखिर किस चेहरे पर भरोसा जताया गया।
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