JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च हिंसक टकराव की स्थिति तक पहुंच गया। सात बैरिकेडिंग टूटने के बाद वाटर कैनन और लाठीचार्ज किया गया। छात्र CBI जांच और JSSC-CGL रिजल्ट रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।
झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच आमना-सामना हो गया। कई चरणों की बैरिकेडिंग तोड़ते हुए छात्र विधानसभा के बेहद करीब तक पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पहले बैरिकेडिंग, फिर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और स्थिति बिगड़ने पर लाठीचार्ज भी किया गया।
लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से पुलिस पर जूते-चप्पल फेंके जाने और पथराव के आरोप सामने आए। एक पुलिसकर्मी के घायल होने की भी सूचना है। मौके पर तनाव बढ़ने के बाद अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और ड्रोन कैमरों से प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब छात्रों का आंदोलन 17वें दिन में पहुंच चुका है और रविवार को सरकार तथा छात्र प्रतिनिधियों के बीच करीब छह घंटे तक बातचीत के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हो पाया।
सोमवार को बड़ी संख्या में JPSC-JSSC अभ्यर्थी विधानसभा घेराव के लिए निकले। प्रशासन ने छात्रों को विधानसभा तक पहुंचने से रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक बैरियर पार किए और आगे बढ़ते गए।
छात्रों ने सातवीं बैरिकेडिंग तक तोड़ दी। इसके बाद प्रदर्शनकारी अलग-अलग समूहों में बंट गए। कुछ छात्र विधानसभा की ओर आगे बढ़ते रहे, जबकि पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती रही।
जगन्नाथपुर मंदिर के पास प्रशासन ने चार लेयर वाली नई बैरिकेडिंग तैयार की थी। इसके अलावा दो स्थानों पर कंटीले तार भी लगाए गए थे। पुलिस अधिकारियों की ओर से लगातार छात्रों से शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने और आगे नहीं बढ़ने की अपील की जाती रही।
लेकिन छात्र अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं थे।

जब छात्रों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश जारी रखी तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की तेज बौछारों के बावजूद कई प्रदर्शनकारी मौके पर डटे रहे।
कुछ छात्रों को वाटर कैनन से बचने के लिए छतरियों का इस्तेमाल करते हुए देखा गया। प्रदर्शनकारियों में से कुछ पानी की बौछार के बीच नारे लगाते और आगे बढ़ते नजर आए।
इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने छात्रों को पीछे हटाने के लिए लाठीचार्ज किया।
लाठीचार्ज पर छात्रों ने उठाए सवाल
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने लाठीचार्ज को बर्बरतापूर्ण बताया। एक छात्र ने आरोप लगाया कि बैरिकेडिंग के पास प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं।
प्रदर्शनकारी का कहना था कि लाठी का इस्तेमाल कमर के नीचे किया जाना चाहिए, लेकिन कई छात्रों के सिर, हाथ, चेहरे और शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी लाठियां लगीं।
छात्रों ने इसे सरकार के दोहरे रवैये से जोड़ते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं।
हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़कर देखा गया है।
SP पारस राणा ने बताया क्यों हुआ लाठीचार्ज
रांची के पुलिस कप्तान पारस राणा ने कहा कि पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन वे आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे और निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे थे।
उनके मुताबिक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
SP ने यह भी कहा कि पुलिस छात्रों के खिलाफ नहीं है और प्रशासन उनकी मांगों को लेकर संवेदनशील है। लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और परिस्थितियों को देखते हुए कार्रवाई करनी पड़ी।
यानी पुलिस का तर्क साफ है—छात्रों की मांगों से असहमति नहीं, लेकिन विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था तोड़कर आगे बढ़ने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती।

लाठीचार्ज के बाद स्थिति और बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस की तरफ जूते-चप्पल फेंके जाने की बात सामने आई। अंतिम बैरिकेडिंग के पास एक छात्रा द्वारा पुलिस की ओर जूता-चप्पल फेंकने की सूचना भी सामने आई।
इसके अलावा छात्रों की ओर से पथराव किए जाने का आरोप है। इस दौरान एक पुलिसकर्मी के सिर में चोट लगने की सूचना मिली।
घटना के बाद पुलिस ने सुरक्षा और कड़ी कर दी तथा अतिरिक्त बल की तैनाती की गई।
नौ दिन से भूख हड़ताल पर छात्र नेता भी पहुंचे
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। वह पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
महतो एंबुलेंस से प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे और बाद में स्ट्रेचर पर लेटकर मार्च में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल के बावजूद वह छात्रों के बीच पहुंचे हैं और उन्हें रोका नहीं जा सकता।
उनका कहना है कि छात्रों की मांगें जायज हैं और सरकार को उन्हें स्वीकार करना होगा।
सरकार से छह घंटे बातचीत, तीन परीक्षाओं पर बनी सहमति
यह टकराव उस बातचीत के अगले ही दिन सामने आया है जिसमें रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडलों के बीच लगभग छह घंटे तक चर्चा हुई थी।
बातचीत में तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनने की बात सामने आई। इनमें 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा तथा JPSC बैकलॉग 2023 और 2025 की परीक्षा शामिल हैं।
14वीं JPSC परीक्षा में आर्थिक अनियमितताओं की जांच ED से कराने की बात भी सामने आई है।
इसके अलावा JPSC के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दिया, जिन्हें राज्यपाल ने मंजूर कर लिया।
लेकिन विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा अभी भी JSSC-CGL रिजल्ट बना हुआ है।
छात्र इस रिजल्ट को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार इस मांग पर सहमत नहीं हुई है।

छात्रों की प्रमुख मांगों में JPSC-JSSC से जुड़े मामलों की CBI जांच भी शामिल है। फिलहाल सरकार ने इस मांग पर सहमति नहीं दी है।
सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिया गया है। इसके लिए IIM और XLRI जैसी संस्थाओं की मदद लेने और परीक्षा व्यवस्था के लिए नया पोर्टल तैयार करने की बात कही गई है।
लेकिन छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
विधानसभा में भी उठा छात्रों का मुद्दा
छात्र आंदोलन की गूंज झारखंड विधानसभा के भीतर भी सुनाई दी।
निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार से पूछा कि यदि छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत मांगों को मानने की बात कही जा रही है, तो JSSC-CGL से संबंधित मांगों पर कोर्ट के आदेश के अनुरूप भरोसा क्यों नहीं दिया जा रहा।
इससे साफ है कि परीक्षा विवाद अब सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विधानसभा के भीतर भी राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन चुका है।
जयराम महतो बोले- यह छात्रों का अपना आंदोलन
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम कुमार महतो ने भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल आंदोलन को कुछ समर्थन जरूर देंगे, लेकिन यह मूल रूप से छात्रों का अपना आंदोलन है।
उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर नाराज हैं और यदि उनकी मांगें पूरी हो जाती हैं तो उन्हें प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जयराम महतो ने विधानसभा मार्च में शामिल होने की बात भी कही।

परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने आरोप लगाया कि हजारों छात्र विधानसभा मार्च कर रहे हैं क्योंकि सरकार 17 दिनों से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाई है। उन्होंने छात्रों की ओर से की जा रही CBI जांच की मांग का समर्थन करते हुए रांची में सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कंटीले तारों और आवाजाही पर कथित रोक का भी सवाल उठाया।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध कैसे खत्म होगा।
एक तरफ सरकार तीन परीक्षाओं को रद्द करने, ED जांच और परीक्षा सुधार की दिशा में कदम उठाने की बात कर रही है। दूसरी तरफ छात्र JSSC-CGL रिजल्ट और CBI जांच जैसे मुद्दों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
सोमवार का विधानसभा मार्च आंदोलन का अब तक का सबसे टकरावपूर्ण चरण बन गया है। छात्रों का विधानसभा के अंतिम सुरक्षा घेरे तक पहुंचना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती रहा।
लाठीचार्ज, वाटर कैनन, जूते-चप्पल और पथराव के आरोपों के बीच अब असली परीक्षा सिर्फ छात्रों या पुलिस की नहीं, बल्कि सरकार की भी है।
क्योंकि यह आंदोलन अब केवल परीक्षा परिणाम का विवाद नहीं रह गया है।
यह सवाल बन चुका है कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और छात्रों के भरोसे को सरकार किस तरह वापस हासिल करेगी।
और जब तक इस सवाल का ठोस जवाब नहीं मिलता, छात्रों के आंदोलन के थमने के आसार फिलहाल कम ही दिखाई दे रहे हैं।
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