दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए लाई गई ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के बहिष्कार को लेकर भाजपा ने आम आदमी पार्टी के सभी 22 विधायकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सोमवार को दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों के घर और कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। कालकाजी विधायक और नेता प्रतिपक्ष आतिशी मार्लेना पर भाजपा नेताओं ने विधानसभा से दूरी और योजना के विरोध को लेकर तीखे सवाल उठाए।
दिल्ली की राजनीति में सोमवार को एक बार फिर महिला कल्याण योजना को लेकर सियासी गर्मी दिखाई दी। दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए लाई गई ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के बहिष्कार के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी के विधायकों के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने राजधानी के अलग-अलग इलाकों में आम आदमी पार्टी के विधायकों के घर या कार्यालय के बाहर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की बनाई योजना के तहत आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का संयोजन प्रदेश महामंत्री मोहनलाल गिहारा ने किया। भाजपा का आरोप है कि आम आदमी पार्टी के सभी 22 विधायकों ने दिल्ली की महिलाओं के हित से जुड़ी इस योजना का बहिष्कार किया है। इसी को मुद्दा बनाकर भाजपा ने विधायकों के खिलाफ सड़क पर उतरने का फैसला किया।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा सियासी निशाना कालकाजी की विधायक और नेता प्रतिपक्ष आतिशी मार्लेना बनीं। उनके निवास के बाहर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर आम आदमी पार्टी की भूमिका पर सवाल उठाए।

कालकाजी विधायक आतिशी मार्लेना के निवास पर दिल्ली भाजपा महामंत्री योगिता सिंह, मंत्री नरेश वशिष्ठ और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि आतिशी पिछले एक साल से और खास तौर पर लगभग छह महीने से विधानसभा की गतिविधियों से दूर रहकर गोवा में घूम रही हैं। प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ यह सवाल भी उठाया गया कि एक महिला नेता होने के बावजूद उन्होंने अपनी पार्टी को महिलाओं के लिए लाई गई दिल्ली लक्ष्मी योजना का विरोध करने दिया।
भाजपा नेताओं का कहना था कि महिला हित से जुड़ी किसी योजना को लेकर राजनीतिक विरोध अपनी जगह हो सकता है, लेकिन महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजना के बहिष्कार को लेकर आम आदमी पार्टी को जवाब देना चाहिए।
भाजपा के प्रदर्शन की तस्वीर केवल कालकाजी तक सीमित नहीं रही। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई विधानसभा क्षेत्रों में आप विधायकों के कार्यालय और निवास के बाहर पहुंचकर विरोध जताया।
कोंडली विधायक कुलदीप के कार्यालय पर मयूर विहार जिलाध्यक्ष विजेंद्र धामा और प्रदेश उपाध्यक्ष ऋचा पांडेय के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ।
सीमापुरी विधायक वीर सिंह धिंगन के खिलाफ दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष सारिका जैन के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया।

बाबरपुर विधायक गोपाल राय के विरुद्ध दिल्ली भाजपा मंत्री राज गौतम के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
करोलबाग विधायक विशेष रवि के खिलाफ प्रदेश उपाध्यक्ष सोना कुमारी और पार्षद मनीष चड्ढा के नेतृत्व में विरोध दर्ज कराया गया।
वहीं देवली विधायक प्रेम चौहान के कार्यालय पर भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष रजत चौधरी के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया।
तुगलकाबाद विधायक सहीराम पहलवान के कार्यालय पर भाजपा पूर्वांचल मोर्चा अध्यक्ष संतोष ओझा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।
चांदनी चौक विधायक पुनरदीप सिंह साहनी के कार्यालय और निवास के बाहर भाजपा के वरिष्ठ नेता राजन तिवारी तथा विधानसभा प्रत्याशी रहे सतीश जैन के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ।

गोकुलपुरी विधायक सुरेंद्र कुमार के कार्यालय पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष अनीस अब्बासी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया।
पटेल नगर विधायक प्रवेश रत्न के खिलाफ पूर्व विधायक राजकुमार आनंद और भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष अर्चना गुप्ता के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ।
अंबेडकर नगर विधायक अजय दत्त के कार्यालय पर भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया।
तिलक नगर विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष विजय सोलंकी, निगम पार्षद श्वेता सैनी और हरीश ओबेरॉय के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया।
सदर विधायक सोमदत्त के खिलाफ दिल्ली भाजपा मंत्री अभिषेक टंडन और पार्षद मनोज जिंदल के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुआ।
वहीं बल्लीमारान विधायक इमरान हुसैन के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व दिल्ली भाजपा मंत्री रोहित चहल और पार्षद कमल बागड़ी ने किया।

दिल्ली लक्ष्मी योजना को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब महज विधानसभा के भीतर की राजनीतिक बहस नहीं रह गया है। भाजपा ने इसे सीधे महिला हित और आम आदमी पार्टी के विधायकों की जवाबदेही से जोड़ते हुए सड़क पर उतार दिया है।
एक तरफ भाजपा इस बहिष्कार को महिलाओं के हितों के खिलाफ बता रही है, तो दूसरी ओर इस मुद्दे ने दिल्ली की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या महिला कल्याण की किसी योजना का विरोध राजनीतिक मतभेद तक सीमित रहेगा या आने वाले दिनों में यह मुद्दा दिल्ली की राजनीति का बड़ा चुनावी हथियार बनेगा?
फिलहाल भाजपा ने साफ संकेत दे दिया है कि वह इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है। अब नजर इस बात पर है कि आम आदमी पार्टी और उसके विधायक भाजपा के इन आरोपों का क्या जवाब देते हैं और दिल्ली लक्ष्मी योजना को लेकर विधानसभा के भीतर सियासी तस्वीर आगे किस करवट बैठती है।
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