गाजियाबाद में परिवहन विभाग ने अनधिकृत और नियम विरुद्ध संचालित एम्बुलेंस के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। 26 एम्बुलेंस के चालान किए गए, जबकि 6 वाहनों को सीज किया गया।
मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने वाली एम्बुलेंस सेवा को लेकर परिवहन विभाग ने अब सख्त रुख अपनाया है। जनपद गाजियाबाद में निजी और अनधिकृत रूप से संचालित एम्बुलेंस वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग ने विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान के दौरान अस्पतालों, निजी चिकित्सा संस्थानों और प्रमुख मार्गों पर एम्बुलेंस वाहनों की सघन जांच की गई। जांच में नियमों और दस्तावेजों का पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ वाहनों में मरीजों की सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों को भी परखा गया।
5 अक्टूबर 2026 को चलाए गए इस विशेष अभियान में परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर एम्बुलेंस वाहनों को रोककर उनके दस्तावेज और संचालन से संबंधित जरूरी मानकों की जांच की। अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आपातकालीन सेवा के नाम पर ऐसे वाहन सड़क पर संचालित न हों, जो वैध दस्तावेजों या निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते।
26 एम्बुलेंस के चालान, 6 वाहन सीज
अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीमों ने कुल 26 एम्बुलेंस वाहनों के चालान किए। इसके अलावा नियम विरुद्ध या अनियमित तरीके से संचालित पाए गए 6 एम्बुलेंस वाहनों को निरुद्ध यानी सीज कर दिया गया।
विभाग के मुताबिक, इन वाहनों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई का उद्देश्य केवल चालान या वाहन सीज करना नहीं, बल्कि एम्बुलेंस सेवा के संचालन में नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
किन दस्तावेजों और मानकों की हुई जांच?
विशेष अभियान के दौरान एम्बुलेंस वाहनों के कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की गई। इनमें मुख्य रूप से वाहन का पंजीकरण, फिटनेस, बीमा और परमिट शामिल रहे। इसके साथ ही निर्धारित सुरक्षा मानकों का भी परीक्षण किया गया।
परिवहन विभाग यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि एम्बुलेंस के रूप में संचालित वाहन वैध दस्तावेजों के साथ सड़क पर चलें और मरीजों को आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराया जा सके।
किसी एम्बुलेंस के दस्तावेज अधूरे पाए जाने, वैध अनुमति के बिना संचालन या निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने की स्थिति में उसके खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है।
निजी अस्पतालों की एम्बुलेंस भी जांच के दायरे में
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू निजी चिकित्सालयों और चिकित्सा संस्थानों से जुड़ी एम्बुलेंस हैं। परिवहन विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि अस्पताल के स्वामित्व में या किसी अनुबंध के तहत संचालित होने वाली एम्बुलेंस भी नियमों से बाहर नहीं हैं।

यदि कोई निजी अस्पताल या चिकित्सा संस्थान ऐसी एम्बुलेंस का संचालन कर रहा है, जिसके दस्तावेज वैध नहीं हैं या जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करती, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
यानी एम्बुलेंस चाहे निजी व्यक्ति की हो, अस्पताल की हो या किसी चिकित्सा संस्थान के अनुबंध के तहत संचालित हो रही हो, उसे निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
एम्बुलेंस सामान्य यात्री वाहन नहीं बल्कि आपातकालीन सेवा से जुड़े वाहन होते हैं। दुर्घटना, गंभीर बीमारी या किसी मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीज की स्थिति पहले से ही संवेदनशील होती है। ऐसे में एम्बुलेंस की फिटनेस, दस्तावेज और सुरक्षा मानकों में किसी तरह की कमी गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।
इसी वजह से परिवहन विभाग का यह अभियान केवल वाहन जांच तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मरीजों और आम लोगों की सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
विभाग का कहना है कि एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा से जुड़े वाहनों के संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
बिना अनुमति चलने वाली एम्बुलेंस पर सख्ती
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध अनुमति संचालित होने वाले वाहनों और निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाली एम्बुलेंस के खिलाफ कठोर प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।
इसका सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में भी एम्बुलेंस वाहनों की जांच जारी रह सकती है। अस्पतालों, चिकित्सा संस्थानों और प्रमुख मार्गों पर चलने वाली एम्बुलेंस विभाग की निगरानी के दायरे में रहेंगी।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
परिवहन विभाग के अनुसार विशेष प्रवर्तन अभियान को आने वाले दिनों में भी जारी रखा जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि जनपद में संचालित प्रत्येक एम्बुलेंस वैध दस्तावेजों के साथ और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो।
5 अक्टूबर को हुई कार्रवाई में 26 चालान और 6 एम्बुलेंस सीज किए जाने से यह स्पष्ट है कि विभाग ने अनधिकृत और नियम विरुद्ध एम्बुलेंस संचालन के खिलाफ प्रवर्तन तेज कर दिया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आगामी जांच में कितने और वाहन नियमों की कसौटी पर खरे उतरते हैं और क्या निजी अस्पतालों एवं चिकित्सा संस्थानों से जुड़ी एम्बुलेंस के संचालन को लेकर भी विभाग की कार्रवाई और व्यापक होती है। फिलहाल परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि एम्बुलेंस के नाम पर नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
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