प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत का रहस्य गहराया। गंभीर चोट के बाद चौथी मंजिल तक पहुंचने पर सवाल, ब्लड सैंपल की टॉक्सिकोलॉजी जांच और आश्रम से जुड़े आरोपों पर पुलिस की पड़ताल जारी।
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े आश्रम परिसर में रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। शरीर पर गंभीर चोट के बावजूद उनका सीढ़ियों से चौथी मंजिल तक पहुंचना, कमरे से खून लगा ग्राइंडर मिलना और अब रक्त के नमूने की टॉक्सिकोलॉजी जांच ने जांच में एक नए संभावित एंगल को जन्म दिया है। हालांकि आश्रम में ड्रग्स के इस्तेमाल या किसी नशीले पदार्थ की मौजूदगी की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वृंदावन की आध्यात्मिक नगरी में हुई एक साधक की रहस्यमयी मौत अब ऐसे सवाल खड़े कर रही है, जिनके जवाब तलाशना पुलिस के लिए भी आसान नहीं है। संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की 25 सितंबर को गुरु कृपा कुंज परिसर की चौथी मंजिल से गिरकर मौत हुई थी। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का माना गया, लेकिन मौत से पहले की घटनाओं ने पूरी कहानी को कई सवालों के बीच ला खड़ा किया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर रसिक दुलारी की मौत से ठीक पहले उनके साथ क्या हुआ था?
पुलिस CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल और फॉरेंसिक साक्ष्यों को जोड़कर घटना की कड़ियां तलाश रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने अब तक बड़ी संख्या में आश्रम से जुड़े लोगों और परिजनों से पूछताछ भी की है।
गंभीर चोट के बाद भी सीढ़ियों से चौथी मंजिल तक कैसे पहुंचे?
इस मामले की सबसे परेशान करने वाली कड़ी रसिक दुलारी की मौत से पहले का घटनाक्रम है।
पुलिस जांच में सामने आया कि उनके कमरे से एक ग्राइंडर बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम में शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें मिलीं। रिपोर्टों के अनुसार, उनके गुप्तांग पर भी गंभीर चोट थी और मौत का प्रमुख कारण अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया। इसके बाद वह कमरे से बाहर निकले और CCTV में परिसर की सीढ़ियों की ओर जाते दिखाई दिए।
यहीं से जांच की दिशा और गंभीर हो जाती है।
इतनी गंभीर चोट के बाद कोई व्यक्ति किस मानसिक और शारीरिक स्थिति में सामान्य रूप से चल सकता है? क्या वह अत्यधिक दर्द के बावजूद खुद सीढ़ियां चढ़कर चौथी मंजिल तक पहुंचा? या उस समय उसकी चेतना और दर्द महसूस करने की क्षमता पर किसी चीज का असर था?
CCTV फुटेज में वह कुछ समय तक चौथी मंजिल पर बैठते और फिर वहां से नीचे गिरते दिखाई दिए। पुलिस फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को समयक्रम में जोड़ने की कोशिश कर रही है।
अब ब्लड सैंपल की टॉक्सिकोलॉजी जांच पर नजर
यही वह बिंदु है, जहां कथित ड्रग्स एंगल चर्चा में आया है।
पुलिस ने रसिक दुलारी के रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। टॉक्सिकोलॉजी जांच यह पता लगाने में मदद कर सकती है कि उनके शरीर में किसी नशीले, साइकोएक्टिव या अन्य रासायनिक पदार्थ की मौजूदगी थी या नहीं। फिलहाल रिपोर्ट सामने नहीं आई है और इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनकी मौत में ड्रग्स की कोई भूमिका थी।
यानी अभी सवाल है, जवाब नहीं।
अगर टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में किसी प्रतिबंधित या प्रभाव डालने वाले पदार्थ की मौजूदगी सामने आती है, तो जांच की दिशा निश्चित तौर पर बदल सकती है। तब यह भी पता लगाना होगा कि वह पदार्थ रसिक दुलारी तक कैसे पहुंचा और क्या उसके सेवन का इस पूरी घटना से कोई संबंध था।
लेकिन अगर रिपोर्ट सामान्य आती है, तब भी सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि इतनी गंभीर चोट के बाद रसिक दुलारी ने आगे क्या किया और उनकी मानसिक स्थिति उस वक्त कैसी थी?
आश्रम में ड्रग्स का खेल? अभी सिर्फ जांच का सवाल
यहां एक बात बेहद साफ करना जरूरी है।
प्रेमानंद महाराज के आश्रम में ड्रग्स का कोई नेटवर्क चल रहा था या वहां नशीले पदार्थों का इस्तेमाल हो रहा था—इसकी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे तथ्य के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
फिलहाल जांच में केवल इतना महत्वपूर्ण है कि रक्त के नमूने फॉरेंसिक और टॉक्सिकोलॉजी जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि शरीर में किसी नशीले या साइकोएक्टिव पदार्थ की मौजूदगी थी या नहीं।
मौत के बाद आश्रम को लेकर उठे दूसरे सवाल
रसिक दुलारी की मौत की जांच केवल उनकी व्यक्तिगत मानसिक और शारीरिक स्थिति तक सीमित नहीं है। घटना के बाद आश्रम की व्यवस्था और वहां रहने वाले लोगों को लेकर भी कई सवाल उठे हैं।
वृंदावन के कुछ संतों और अन्य लोगों की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने और उन्हें Z+ सुरक्षा देने की मांग की गई है। इन पत्रों में आश्रम में कथित गुटबाजी, संपत्ति और जमीन से जुड़े विवादों तथा कुछ अन्य गंभीर आरोपों की जांच की मांग भी की गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कुछ लोगों ने दावा किया है कि आश्रम से जुड़े लोगों के बीच दो गुट बन गए हैं और कुछ लोग कथित तौर पर जमीन या प्रॉपर्टी के मामलों से जुड़े हैं। ये दावे भी फिलहाल आरोपों के स्तर पर हैं।
आश्रम ने भी जारी किया बयान
इस बीच श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट की ओर से रसिक दुलारी की मौत पर दुख जताते हुए कहा गया है कि आश्रम पुलिस जांच में सहयोग कर रहा है। ट्रस्ट ने लोगों से अफवाहों से बचने और जांच को प्रभावित करने वाली अपुष्ट जानकारी प्रसारित न करने की अपील भी की है।
यानी एक तरफ पुलिस हर उपलब्ध सबूत को जोड़ रही है और दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर मामले को लेकर तरह-तरह के दावे तेजी से फैल रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
रसिक दुलारी की मौत को लेकर इस वक्त कई सवाल एक साथ खड़े हैं—
अगर उन्होंने आत्महत्या की, तो उससे पहले उन्होंने इतना गंभीर कदम क्यों उठाया?
इतनी गंभीर चोट के बाद वह चौथी मंजिल तक कैसे पहुंचे?
उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति उस समय क्या थी?
क्या उनके शरीर में किसी नशीले या साइकोएक्टिव पदार्थ के अंश मिले?
कमरे में मिला ग्राइंडर घटना में किस तरह इस्तेमाल हुआ?
और क्या इस पूरी घटना के पीछे सिर्फ व्यक्तिगत मानसिक स्थिति थी या कोई दूसरा कारण भी था?
इन सवालों के जवाब CCTV, पोस्टमार्टम, मोबाइल और सबसे महत्वपूर्ण टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। जब तक फॉरेंसिक रिपोर्ट और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आते, तब तक ड्रग्स, साजिश या आश्रम के भीतर किसी नेटवर्क की बात को केवल जांच के संभावित एंगल और आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
रसिक दुलारी की मौत का सच आखिर क्या है—एक दर्दनाक आत्महत्या, किसी मानसिक या शारीरिक स्थिति का परिणाम, या कहानी में कोई ऐसी कड़ी जिसे अभी तक जांच एजेंसियां जोड़ नहीं पाई हैं?
इसका जवाब अब टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट और बाकी फॉरेंसिक सबूतों पर टिका है।
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