रक्षाबंधन से पहले गाजियाबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र के भीमनगर में छापेमारी के दौरान करीब 10 क्विंटल छेना रसगुल्ला बेहद गंदे और अस्वास्थ्यकर माहौल में तैयार होता मिला। विभाग ने पूरी खेप नष्ट करा दी और रसगुल्ला, अरारोट, पनीर व सफोलाइट समेत चार नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई होगी।
रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है। घरों में मिठाइयां पहुंचने लगी हैं, दुकानों पर खरीदारी बढ़ रही है और बाजारों में छेना रसगुल्ले से लेकर मावा, पनीर और दूसरी दूध से बनी मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इसी बीच गाजियाबाद से सामने आई एक कार्रवाई ने मिठाई की चमक के पीछे छिपे एक बेहद गंदे सच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या बाजार में बिकने वाला छेना रसगुल्ला वास्तव में शुद्ध है?
गाजियाबाद के विजय नगर इलाके के भीमनगर में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने अधिकारियों को भी कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। यहां बड़ी मात्रा में छेना रसगुल्ला तैयार किया जा रहा था और विभाग के मुताबिक निर्माण एवं भंडारण की परिस्थितियां बेहद अस्वास्थ्यकर थीं।
मौके से करीब 10 क्विंटल तैयार छेना रसगुल्ला मिला, जिसे खाद्य सुरक्षा विभाग ने नष्ट करा दिया।
शिकायत के बाद पहुंची टीम, मौके पर मिले कीड़े और मक्खियां
खाद्य विभाग को शिकायत मिली थी कि क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र के भीमनगर इलाके में गंदगी के बीच खाद्य सामग्री तैयार की जा रही है। शिकायत के आधार पर टीम ने सोमवार शाम संबंधित परिसर में छापेमारी की।
अधिकारियों के मुताबिक, मौके पर छेना रसगुल्ला बड़ी मात्रा में तैयार किया जा रहा था। लेकिन निर्माण स्थल की स्थिति सामान्य खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं मिली।
रसगुल्ला तैयार करने और रखने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कंटेनरों में कीड़े पड़े हुए पाए गए, जबकि कई जगहों पर मक्खियां मंडराती हुई मिलीं। खाद्य सामग्री के निर्माण, भंडारण और रखरखाव में स्वच्छता मानकों की कथित अनदेखी को देखते हुए विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।
नतीजा यह हुआ कि बाजार तक पहुंचने से पहले ही करीब 10 क्विंटल रसगुल्ले की पूरी खेप नष्ट करा दी गई।
पनीर में स्टार्च, सफेद दिखाने के लिए केमिकल?
कार्रवाई सिर्फ गंदगी तक सीमित नहीं रही। जांच के दौरान रसगुल्ला तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जा रही सामग्री को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए।
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि पनीर को मैश करने के बाद उसमें स्टार्च मिलाकर छेना तैयार किया जा रहा था। इसके अलावा रसगुल्लों को ज्यादा सफेद और आकर्षक दिखाने तथा लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए रसायनों के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई है।
हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी हानिकारक केमिकल या ब्लीचिंग एजेंट की वास्तविक मौजूदगी की अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
यानी फिलहाल जो सामने आया है, वह शुरुआती जांच और मौके की स्थिति पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष लैब रिपोर्ट के बाद ही निकलेगा।
चार नमूने जांच के लिए भेजे गए
खाद्य सुरक्षा विभाग ने मौके से खाद्य पदार्थों और उनसे जुड़ी सामग्री के नमूने लिए हैं। अधिकारियों के अनुसार छेना रसगुल्ला, अरारोट, पनीर और सफोलाइट के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
इन नमूनों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि इस्तेमाल की जा रही सामग्री निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती है या नहीं और उनमें किसी प्रतिबंधित अथवा हानिकारक रसायन की मौजूदगी है या नहीं।
सहायक खाद्य आयुक्त सुरेश कुमार मिश्रा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की प्रमुख डॉ. रोशन जैकब के निर्देशों के तहत मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि विभाग फिलहाल छेना, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों पर भी विशेष नजर रख रहा है।
लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू
करीब 10 क्विंटल रसगुल्ला नष्ट कराने के बाद अब संबंधित प्रतिष्ठान पर प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है।
अधिकारी सुरेश कुमार मिश्रा के अनुसार, मौके पर खाद्य पदार्थों में विभिन्न रसायनों के इस्तेमाल की आशंका और बेहद खराब स्वच्छता परिस्थितियों को देखते हुए खाद्य लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हालांकि अंतिम वैधानिक कार्रवाई प्रयोगशाला की रिपोर्ट मिलने के बाद तय होगी। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन, मिलावट या किसी प्रतिबंधित अथवा हानिकारक पदार्थ की पुष्टि होती है तो संबंधित विक्रेता और प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मोदीनगर में भी मिठाई की दुकानों की जांच
त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य विभाग का अभियान सिर्फ भीमनगर तक सीमित नहीं है। मोदीनगर बस अड्डे स्थित बालाजी स्वीट्स पर भी टीम ने जांच की।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी पीके वर्मा ने यहां से खोया, मिल्क केक और सफेद रसगुल्ले के नमूने लिए। इन नमूनों को भी प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई से यह संकेत साफ है कि त्योहारों से पहले विभाग दूध, पनीर, मावा, खोया और इनसे तैयार होने वाली मिठाइयों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी कर रहा है।
त्योहार की मिठास में मिलावट का कड़वा सच
त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है। इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोर घटिया या संदिग्ध सामग्री से मिठाइयां तैयार कर बाजार में उतारने की कोशिश कर सकते हैं।
गाजियाबाद की यह कार्रवाई इसी खतरे की ओर इशारा करती है। करीब 10 क्विंटल तैयार रसगुल्ले अगर बाजार तक पहुंच जाते तो कितने लोगों की थाली तक पहुंचते, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
फिलहाल खाद्य विभाग ने उस खेप को बाजार में जाने से रोक दिया है। लेकिन असली तस्वीर प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद सामने आएगी।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मिठाई कितनी सफेद और स्वादिष्ट दिखाई देती है। सवाल यह भी है कि उस सफेदी के पीछे क्या इस्तेमाल हुआ और उसे तैयार करने वाली जगह कितनी साफ थी?
रक्षाबंधन से पहले हुई यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के लिए भी एक चेतावनी है कि त्योहार की मिठास खरीदते समय सिर्फ स्वाद और दिखावट नहीं, बल्कि मिठाई की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
खाद्य विभाग ने साफ किया है कि त्योहारी सीजन में दूध और दूध से बने उत्पादों की जांच जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब नजर प्रयोगशाला रिपोर्ट पर है—क्या नमूनों में वही मिलावट सामने आएगी जिसकी आशंका मौके पर जताई गई है, या तस्वीर कुछ और निकलेगी?
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