मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत ने समय रहते रणनीतिक कदम उठाते हुए कच्चे तेल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित कर लिया है। सरकारी और निजी रिफाइनरियों की रिकॉर्ड खरीदारी के चलते देश में अगस्त 2026 तक पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका नहीं है।
दुनिया के कई हिस्सों में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है और कई देशों में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे समय में भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिफाइनरियों और तेल कंपनियों ने दूरदर्शी रणनीति अपनाते हुए देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित कर लिया है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, भारत ने कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) का इतना भंडार सुनिश्चित कर लिया है कि कम-से-कम अगस्त 2026 तक घरेलू मांग को पूरा करने में किसी प्रकार की समस्या नहीं आएगी।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हाल के सप्ताहों में भारतीय तेल कंपनियों ने संयुक्त अरब अमीरात की अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) सहित कई अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं से रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी की खरीद की है। इस रणनीतिक खरीदारी ने भारत को उस स्थिति में भी सुरक्षित बना दिया है, जब वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की रणनीतिक तैयारी
मिडिल ईस्ट लंबे समय से दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और संभावित संघर्षों के कारण कई देशों में तेल और गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता पैदा हो गई है। समुद्री मार्गों पर खतरे और आपूर्ति में व्यवधान की आशंकाओं के बीच भारत ने समय रहते अपने आयात स्रोतों को मजबूत करने का निर्णय लिया।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने केवल पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय कई वैकल्पिक क्षेत्रों से भी खरीद बढ़ाई है। इससे देश को आपूर्ति संबंधी किसी भी संभावित संकट से बचाने में मदद मिली है।
शिप-टू-शिप ट्रांसफर से सुनिश्चित की जा रही आपूर्ति
ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए भारतीय कंपनियां आधुनिक और लचीली लॉजिस्टिक रणनीतियों का उपयोग कर रही हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है शिप-टू-शिप (Ship-to-Ship) ट्रांसफर प्रणाली।
इस प्रक्रिया के तहत समुद्र के बीच एक जहाज से दूसरे जहाज में कच्चे तेल और एलपीजी की खेप स्थानांतरित की जाती है। इससे समय की बचत होती है और आपूर्ति श्रृंखला को किसी भी बाधा से बचाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि ADNOC अपने फुजैराह स्टोरेज, जिर्कू और दास द्वीप से भारतीय रिफाइनरियों के लिए लगातार कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है। इसके अतिरिक्त ओमान के सोहार और मलेशिया में भी री-लोडिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। भारत के लिए एलपीजी की अधिकांश खेप सोहार से लोड की जा रही है।
जुलाई तक एलपीजी और अगस्त तक कच्चे तेल की चिंता नहीं
एक भारतीय रिफाइनरी के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि देश के पास एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे कम-से-कम जुलाई के मध्य तक घरेलू जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है। वहीं कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर भी अगस्त 2026 तक किसी प्रकार की कमी की आशंका नहीं है।
यह स्थिति ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देश आपूर्ति को लेकर दबाव में हैं।
HPCL ने खरीदी 40 लाख बैरल मुरबान क्रूड की बड़ी खेप
सरकारी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने हाल के दिनों में बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की खरीदारी की है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने अगस्त डिलीवरी के लिए संयुक्त अरब अमीरात से 40 लाख बैरल मुरबान (Murban) क्रूड खरीदा है।
यह सौदा टोटलएनर्जीज की ट्रेडिंग इकाई टोट्सा और मर्कुरिया के माध्यम से किया गया। बताया जा रहा है कि यह खरीद जुलाई के डेटेड ब्रेंट बेंचमार्क के मुकाबले लगभग 40 सेंट प्रति बैरल प्रीमियम पर हुई है।
इससे पहले भी HPCL ने अपनी राजस्थान रिफाइनरी के लिए ब्राजील और पश्चिम अफ्रीका से लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। यह रिफाइनरी प्रतिदिन लगभग 1.80 लाख बैरल तेल प्रसंस्करण की क्षमता रखती है।
IOC और MRPL ने भी बढ़ाई खरीदारी
केवल HPCL ही नहीं, बल्कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों ने भी स्पॉट टेंडर के माध्यम से बड़े पैमाने पर खरीदारी की है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियों ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए समय रहते बाजार में सक्रियता दिखाई, जिसका लाभ अब देश को मिल रहा है।
लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से बढ़ा आयात
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बाद भारत ने अपनी आयात रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पारंपरिक खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करते हुए भारत ने लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है।
ब्राजील, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से तेल आयात करने की नीति ने भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मामले में अतिरिक्त मजबूती प्रदान की है। साथ ही सऊदी अरब जैसे पारंपरिक साझेदार देशों से भी भारत को लगातार सहयोग मिलता रहा है।
आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब?
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पर्याप्त भंडारण और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। इससे रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति भी सामान्य बनी रहेगी।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का असर घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है, लेकिन फिलहाल भारत में ईंधन की कमी जैसी स्थिति बनने की संभावना बेहद कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते उठाए गए इन रणनीतिक कदमों ने भारत को वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में ला खड़ा किया है। आने वाले महीनों में यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां और जटिल होती हैं, तब भी भारत के पास अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहेंगे।
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